Veda bhashyakar

सायण भाष्य का महत्व





सायणचार्य का जीवन परिचय


* सायण ने अपनी रचनामे अपने जीवन चरित्र के विषय मे आवश्यक तथ्यों का निर्देश किया है , ये दक्षिण भारत के निवासी थे इनके पिता का नाम मायण और माता का नाम श्रीमती इनका गोत्र भारद्वाज था ।


वेदों में भाष्य की भूमिका 


*  माधव , उदगीता , स्कन्दस्वामी , नारायण , आनंदतीर्थ , रावण , मुदगल और दयानंद आदि आदि भाष्यकर्ता ने भाष्य किया है , इसमें किसी का भाष्य पूर्ण रूप से उपलब्ध नही है ।

* सायण जीवन काल 14 शताब्दी है वह विजयपुर नरेश हरिहर एवं बुक्क में मंत्री रहे थे आयुर्वेद ग्रन्थ 
" माधव निदान " लिखने वाले माधव आचार्य इन्ही के भाई थे ।

* सायण ने ऋचाओ के प्रत्येक शब्द का विस्तार से अर्थ किया ही प्रत्येक शब्द व्याकरण सम्मत व्युत्पत्ति की है तथा उन्होंने निघण्टु , प्रतिशवय एक ब्राह्मण ग्रन्थों के उद्धरण देकर अपने अर्थों की पुष्टि की है। 

* सायण ने चारों वेदों पर पूर्ण भाष्य लिखे है , और वे उपलब्ध भी है , उन्हें देशविदेश में विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता प्राप्त है । इस प्रकार एकमात्र सायणचार्य
ही ऐसे भाष्यकर्ता  है जिन्होंने विना किसी पूर्वाग्रह वेदों मंत्रो का अर्थ किया है और उन के भाष्य के आधार पर साधारण पाठक वैदिक कालीन संस्कृति का सही रूप  समझ परख सकता है ।

सायण भाष्य का महत्व 


* वैदिक मंत्र के अर्थ जानने हेतु यास्काचार्य ने 3 साधन बताय है ? 

  • आचार्य से परंपरा द्वारा सुना हुआ ज्ञान एंव ग्रन्थ
  • तर्क
  • मनन

* सायण ने इन तीनो का ही सहारा लेकर अपना भाष्य लिखा है कुछ आचार्यो ने यह विश्वास रखा है कि प्रत्येक वैदिक मंत्र के उक्त 3 प्रकार के अर्थ संभव  है , अधिभौतिक , आधात्मिक और अधिदैवक सायण ने प्रसंग के अनुकूल कुछ मंत्र का मानव जीवन संबंधित , कुछ यज्ञ संबंधित और कुछ आत्मा - परमात्मा संबंधित अर्थ दिया है । सायण के अनुसार अधिककांश  मंत्रो का अर्थ दैनिक जीवन संबंधित है दो प्रकार का अर्थ उन्होंने कम किया है । 

* इस प्रकार एकमात्र सायण ही ऐसा भाष्यकर्ता है , जिन्होंने किसी वाद का चश्मा लगाय बिना वैदिक मंत्रों का अर्थ किया है उनका भाष्य साधारण व्यक्ति को वेदार्थ समझने में भी सहायक है ।

सायणचार्य की मृत्यु 


* सायणचार्य की मृत्यु आज से लग भाग 632वर्ष पूर्व हुआ था , 1387 ईसवी ( 1444 सावंत ) माना जाता है । वे वेदों में सर्वमान्य भाष्यकर्ता थे एंवम सायणचार्य द्वारा अनेको ग्रंथों भाष्य किया है वैदिक संस्कृति में सायणचार्य का नाम स्वर्णशब्दो में बोला और लिखा जाता है । वैदिक धर्म मे सायणचार्य बहुतों  बड़ा उपकार रहेंगा।  

धन्यवाद




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1 comments:

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Unknown
admin
January 27, 2020 at 11:15 AM ×

Congrats bro Unknown you got PERTAMAX...! hehehehe...
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