Biography of dayanand saraswati 3

हिन्दुइस्म का इतिहास 


Dayanand saraswati biography


 ये लेख से पहले दयानन्द सरस्वती के बच्चपन  और घर से भाग जाने का किस्सा बताया गया है अब देखते है उसके आगे अगर आप ने ना देखा हो तो यहाँ दोनों लेख पढ़ लीजिये जिसके पश्चात आपको आगे का किस्सा स्पष्ट रूप से समझ आ जाएगा ।

मांस ,मघ और हिन्दू ग्रंथ 


* फिर वहा ( हरिद्वार  ) से एक ब्रह्मचारी और दो पहाड़ी साधु मेरे साथ आये ,वहा बहुत साधु और  पंडितो का समगान हुआ वहाँ  एक पंडित ने मुझे और ब्रह्मचारी को अपने घर में भोजन के लिए निमंत्रण 
( दावत ) दिया।  समय होने पर एक व्यक्ति बुलाने आ गया तब मै और ब्रह्मचारी उसके घर भोजन करने को गए। 

* जब उसके घर  के दरवाजे में घुसे तो देखा की एक ब्रह्मण मांस को काट रहता था  उसको देख कर अंदर की ओर गया तब बहुत से पंडित को एक कमरे के अंदर  बैठे देखा और वहाँ बकरे का मांस ,चमड़ा और सिर रखा था  उसको देख के पीछे की ओर लौटा। 

*  ( सत्य वचन मांस खाना और चीजे हिन्दुइस्म का एक अटूट अंग है जिस के बारे में मनु आदि ग्रन्थ से भी प्रमाण मिलता है  परन्तु पशु हत्या ना करे ऐसा मंत्र जैन मत से लिया गया था  नहीं तो इतिहास साक्षी है इन बातों का की ऋषिमुनि आदि बलि प्रथा और मांस सेवन किया करते थे जो आज भी करते नजर आते है  बरहाल पूरी जानकारी के लिए ये प्रमाण और  गुरु जी को जरूर सुने 👇 ) 





Dayanand saraswati biography
मनु ५ अधय्या 

Dayanand saraswati biography
मनु ५ अधय्या

Dayanand saraswati biography
ऋग्वेद  १ : १६२ : १३ 



* पंडित आते देख के बोला की आईये बैठिये तब मैंने उत्तर दिया आप अपना काम करे  ( किसी से बात करने का अंदाज  संस्कार दीखता है बातों से  ) बहार की और जाता हु ऐसा कह कर वापस लौट आया पर फिर से पंडित बुलाने आ गया हमने  कहाँ की आप हमें सूखा अन्न  भिजवा दीजिये हम स्वतः पका लेंगे
 ( परन्तु एक शंका है  ,की मांस पान करने वालो के हाथो से और उसके घर का सूखा अन्न की आज्ञा कौन देता है।  ) 

* परन्तु पंडित बोला ये सब पदार्थ आप के लिए ही पकाया गया था पर मैने उसे मना कर दिया  फिर उसने सूखा अन्न भेजवा दिया फिर वहाँ कुछ दिन रुक कर पंडितो से पूछा यहाँ कोई धर्म ग्रन्थ मिलेंगा उन्हें में देखना चाहता हु तब उन्होंने कहा की है व्यकरण  ,काव्य , कोष  , ज्योतिष और तंत्र - मन्त्र बहुत मिलते है । ( हा , अथर्ववेद  काले  जादू के लिए प्रशिद्ध है जिसका एक उद्धरण लेते चलते है  ) 



Dayanand saraswati biography
अथर्ववेद   १० : ३ : १४ 

* तब मैने कहा की मै तंत्र मन्त्र की पुस्तक को देखना चाहता हु उन्होंने मुझे वो ग्रंथ दे दिया उसमे लिखाता था की माता ,कन्या ,भगिनी , चमारी ,चंडली  ,आदि से संभोग करना चाहिए  ( जो की इतिहास से भी प्रमाणित है , की ये लोग करते थे  ) नग्गे होकर पूजा करना सत्य वचन जो की  मनुस्मुर्ती भी इसकी आज्ञा देती है ।  स्त्रियों से मैथुन करना इस पांच कामो से मुक्त होना चाहिए और वो ग्रंथो में क्या -क्या  है  यहाँ देख सकते है 👉👉   नंगा नाच



Dayanand saraswati biography
मनुस्मृति 11 : 201 


दयानन्द का सफर करना 


*  फिर वहां से श्री -नगर को जा कर केदार घाट के मंदिर में ठहरा और वहाँ भी तंत्र -मंत्र के ग्रन्थों को देखा और कई पंडितों से संवाद होता रहता इतने में एक गंगागिरी साधु जो कि पहाड़ो में ही रहते थे उनसे भेट हुई और योग विषय मे बात चीत हुई वे अच्छे साधु थे 




कई बार उससे बात चीत होती रहती थी , मैने उनसे पूछता वे उत्तर दिया करते थे , वो मुझ से पूछते मैं उत्तर दिया करता दोनों प्रसन्न हो कर 2 माह साथ रहे ।
( साथ रहे या साथ सोये , गुरुजी का विचार कुछ ठीक नही लग रहा है । )

* जब वर्षों ऋतु आई तब आगे रुद्र प्रयागादि देखता हुआ अगस्त मनु के स्थान पर पहुच कर उसके उत्तर पहाड़ पर एक शिवपुरी स्थान था , वहाँ 4 माह निवास करके पीछे उन साधुओ  और ब्रह्चारी को वहाँ छोड़कर  अकेला केदार की ओर चलता हुआ गुदा काशी  में पहुँचा ( क्यों गुरुजी  साधु और ब्रह्चरियो से मन भर गया और सही भी है कब रहते , तकलीफ होती होगी न , बरहाल समझदरों को इशारा काफी है  ) भीम गुफा देख कर थोड़े ही दिनों में केदार पहुच कर निवास किया ।

*  वहाँ कई एक साधु पण्डे और केदार के पुजारी
जड़म मत के थे उनसे मेलजोल हुआ फिर इच्छा हुई इन बर्फ के पहाड़ो में भी कुछ घूम के देखे की कोई साधु वगैरह रहता है या नही  ?

( दयानंद पागल सा प्रतीत होता है और पागलो की तरह से इधर उधर फिरता रहता था ) पर मार्ग (रास्ता ) कठिन था पर वहाँ जाने के बाद कोई न मिला ।
 ( अरे दीवाने क्योंकर कोई मिलेंगा तुझ जैसे  कोई थोड़ी  दीवाना है जो बर्फ में कोई रहे) 

* वहाँ 20 दिन रहकर पीछे की ऒर लौट गया फिर वहाँ से चलके तुड़नाप के पहाड़ पर चढ़ गया वहा पहुँच कर देखा कि बहुत मंदिर , पुजारी और मूर्तिया देख कर तीसरे दिन नीचे की और उतरा ( यही वजह थी कि दूसरे मत वालों के बारे मे अपनी मंधबुद्धि से लिख गये , इनका इलाज किसी हाकिम के पास करना बेहतर होता  , घूमघूम के बाहेर की हवा लग गई थी 😱 )

* वहा से दक्षिण -पच्छिम के बीच मे जाता हूआ मार्ग से चला आगे दूर जाके देखा तो जंगल और बहुत गहरा सूखा नाला था और उसमे रास्ता बंद था फिर वहाँ से  नीचे की और उतर कर वहाँ से नाले की दूसरी ऒर एक पहाड़ी थी पेड़ो , झाड़ियां आदि के सहारे चढ़ा जिसके फलस्वरूप शरीर के वस्त्र और शरीर काटो से फट गये और शरीरों पर भी कांटे चूब गए मुझे बहुत कष्ट हुआ ।


दयानंद सरस्वती man vs wild


* फिर उस पहाड़ी से उतर कर एक सड़क मिली और सूर्ययस्त भी हो गया था अंधेरा भी काफी ज्यादा था फिर सड़क पर चलते चलते एक जगह मिली वहाँ कुछ लोग थे उनसे पूछा ये सड़क कहा जाती है कहा कि ओखी मठ और रात भर वही रुक गया और दूसरे दिन सूर्य निकलते ही चल पढ़ा और ओखी मठ जा पहुंचा वहाँ बड़े बड़े पंडित , विद्वान थे जिन्होंने धर्म के नाम पर बड़े बड़े कारखाने खोले बैठे थे उन्होंने काहा हमारे चेले बन जाओ  ।

* पर मैने उनकी न मानी और जोशी मठ की ओर चला और वहाँ जाकर शास्त्री आदि संन्यासी से मिल कर ठहर गया । 


* ये थे समाज सुधारक  जो दीवानो की तरह से इधर उधर घूमते फिरते थे , आगे देखेंगे दयानंद सरस्वती और भांग का नशा करना और मूर्ति में छिप जाने का किस्सा  👉  आगे यहाँ देखे


  1. दयानन्द जी का बच्चपन
  2. दयानन्द जी का घर से भाग जान
  3. सभी जानाकारी

असली हिंदूइस्म  👇👇👇














  









1 comment:

  1. वैरी गुड इनफार्मेशन । कीप it up.

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