कल्प की गणना


 कल्प की गणना



सुर्ष्टि की उत्पत्ति के पूर्व




*  सुर्ष्टि की उपत्ति के से पूर्व न अभाव वा असत्ता होता  और  न व्यक्त जगत रहता है ,
न लोक रहता और न अंतरिक्ष रहता है , जो आकाश से  ऊपर निचे लोक - लोकान्तर  है , वे भी नही रहते , क्या किसको घेरता वा आवरत करता है , सब कुछ कुहरान्धकार 
 ( पूरा अंधकार होता है ) के गृह आवरण में रहता है , गहन गहरा क्योंकि रह सकता है । 
( ऋग्वेद 10 : 129 : 1)






* उस अवस्था में  न तो  मुर्त्यु रहती न ही काल व्यहार , न ही रात - दिन  का चिन्ह का नही रहता  । ( ऋग्वेद 10 : 129 : 2 )

 Note :-  जब कुछ नही रहता तो आत्म को कहा रखाता होगा  ?


 उसी प्रकार से मनुस्मृति में  भी ( 1 : 5 )


 मनुस्मृति



* जब ये सब हो रहा था तो वैदिक ईश्वर क्या करता है  ? 


 Sky
(अथर्वेद 4 : 1 : 6 )



Sky
( मनुस्मृति 1 : 74 )



* जब तक आराम से सोये थे , फिर नीद से उठे तो सबको रच दिया , क्या मिथ्या है ?






अब देखते है की पहले क्या बना फिर क्या बना फिर क्या  ?



* सबसे पहले आकाश बना !
 ( बल्कि आकाश कोई चीज नही होती और द्रव्य व्यक्त होता जो कि क़ुरान ने बताया , जो कि गैस आदि ही  हीलियम आदि  है , वेदों के अनुसार  आकाश दृढ़ ( कठोर ) है , बरहाल ये जगह नही है बयान करने की आगे देखते है  )





* फिर वायु यानी हवा आदी ! 




* फिर  अग्नि  ( आग ) !




* फिर पानी और धरती फिर सब ।
(मनुस्मृति 1 : 75 , 76 ,77 ,78 ) उसी प्रकार  (ऋग्विद 10 : 130 )  में  भी यही है और (अर्थवेद 11 : 3 :11 , 12 , 16 ) बात है की  धरती  बर्तन है सूर्य  ढकनी  , और आकाश चमचा है  और भी बहुत कुछ है।

* ये सब बाते  आपको आगे समझ में आएगी  ये सब ध्यान पुर्वक  समझे मुझे पता है कि कई लोगो के सिर के ऊपर से निकल रहा होगा पर बहुत ही आसान शब्दों में  बताने की कोशिश कर रहा हु ।

कल्प की गणना


* जो हिंदूइस्म के मानने वाले है उन्होंने कभी न कभी कल्प और ब्रह्मा दिवस के बारे में सुना ही होगा मुझे आशा है ,की आप इसके बारे में अवश्य जानते होगे  अगर न जानते है तो ध्यान पूर्वक सुने  और समझे ?






*  (अर्थवेद  8 : 2 : 21 ) इसी प्रकार से मनुस्मृति में भी काल गणन मोजूद है ।

* एक ब्रह्मा दिवस  में !

*  4 अरब 32 करोड़  मानव दिवस होते है ।
और उतनी ही रात्रि !

*  दिन      4 अरब  32 करोड़ 
  रात्रि     +  4  अरब  32 करोड़
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                8 अरब 64 करोड़  = 1 कल्प 

* 1 कल्प में  = 8  अरब 64 करोड़  मानव दिवस ।

* जिसके बाद महाप्रलय  ।

* उसी प्रकार से  2 कल्प  के बाद फिर से  सुर्ष्टि की रचना का कार्य शुरू होता है जिसकी गणना इस तरीके से है यानी  ।

 8 अरब 64 करोड़
+ 8 अरब 64 करोड़ 
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17 अरब  28  करोड़ ( मानव दिवस )

* 2 कल्प की गणना है सही है या नही ?




* अब है एक प्रश्न उठता है ,की  महाप्रलय  के पश्चात  हर चीज़ और चोरों तरफ अंधकार और कुछ नही था  ऊपर विस्तापूर्वक बता चुका हूँ , तो ये 17अरब 28 करोड़ मानव दिवस का  अनुमान वैदिक ईश्वर  किस सूर्य से लगाता है ?

धन्यवाद


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