ved aur ishvar

वैदिक काल की स्वतंत्रता


Vedic shiksha


वैदिक भय


* एक शुद्व शाकाहारी  लेख !

* उन मित्रो के लिए  या कह  लीजिये अति विद्ववानों के लिए जो अपनी मूर्खता का प्रमाण लोगो मे बाटते फिरते नजर आते है कहते  है  मुसलमानो  का अल्लाह  मुसलमानो पर  अपनी मर्जी  चलता है , और उन्हें पाबंदी में  रखा है ? 

* अब इन मूर्खो को क्या जवाब दे फिर भी सुनलो  बंधुओं ।

इस्लाम का अर्थ ?

* इस्लाम का अर्थ होता है , गर्दन रखना  या आसान शब्दो मे अपनी ना -जायज  को पालनहार  की आज्ञा से छोड़ देना ,  
( आत्मसमर्पण  )


इस्लाम


का यहाँ देखे ?

* पाक पालनहार और शरियत ए मुस्तफा सलल्ललाहु अलैहि वसल्लम  ने हमे उन चीजों से रोका है जो मानव मात्र के लिए हानिकारक है , उदाहरण ० शराब , जुआ  , दूसरे स्त्रियों पर बदनिगहि इत्यादि ।

* और जो बाते शरियत ( कानून ) से नही टकराती उसे हमे अपने मर्जी से करने की अनुमति है  इस्लाम एक मुकमल दिन है जो कि अवल भी यही है और आखिर  भी ,बच्चे की पैदाइश से लेकर उसकी मुर्त्यु  तक हर एक एक चीज पालनहार ने बता दी है कि किस तरह से जीवन बिताना है और विस्तारपूर्वक  समझया गया है ।


* और इसे पाबंदी नही बल्कि अनुशासन कहते है ।

* बरहाल मंदबुद्धि को समझा कर कोई फायदा नही , जो जिस भाषा मे समझता है उसे उसकी भाषा मे समझना पढता है ।



* वैदिक ईश्वर का भय या आसान भाषा के कह लीजिये  उसकी दादागिरी ।

* कर्म के लिए स्वतंत्रता का दिन रात बीन बजाने वालो देखो तो तुम्हारा 2 पग पर चलने वाला वैदिक ईश्वर की मनमर्जी  विष का प्याला पीने के लिए तैयार हो जाओ  और कमजोर ह्रदय वाले  पहले ही इस लेख को छोड़ कर चले जाएं क्या पता शरीर से प्राण बाहर आ जाये । 


आये देखते है ?
भय ( ख़ौफ़ ) और मनर्जी




*  आते हुए नमस्कार , दूर जाते हुए नमस्कार
है रूद्र  तुझे खड़े होकर नमस्कार , और बैठे कर नमस्कार । ( अर्थवेद 11 : 2 : 15 )

* दिन रात लगे रहो  ।





*  शाम में नमस्कार , काल मे नमस्कार , रात में नमस्कार , दिन में नमस्कार , अच्छी , बुरी दोनों  परिस्तिथि में  नमस्कार । 
 ( अर्थवेद 11 : 2 : 16 )

* इतनी चाटूकारिता आखिर वजह क्या है ?
वो गए पता चलेगा ? 







* हजारों आंखों वाला हमे इधर उधर से देखता है , अनेक प्रकार से गिराने वाला है  और महाबुद्धिमान के चलते हुए रूद्र से हम विरूद्ध न करे । ( अर्थवेद 11 : 2 : 17 )



* इतनी पाबंदी चारो तरफ से देखता है , और कुछ करने भी न दे और  पहले ही आत्म समर्पण आखिर वजह क्या है ?  स्वतंत्रता काहा गई ?



* सबको चोरों ओर से मारते , डरवाने क्लेषकारी के रथ को गिराते हुए , सूर्य के रथ को चलाते हुए , हम पहले से ही नमस्कार करते है । ( अर्थवेद 11 : 2 : 18 )

* इतना ख़ौफ़ की पहले ही  ! 


और असल वजह ये है  ! 


* हे दृष्टि वाले के रक्षक हमारे लिए  अदभुत अपनी मुट्ठी ( घुसा ) को ताक कर मत छोड़ न  हम पर मत क्रोध  कर नमस्कार है !हमसे दुसरो की भुजा हिला । 

(अर्थवेद 11 : 2 : 19 )


घुसा

* इतना  दादागिरी  की  घुसा मारने की बाते इतना अहंकर  और पहले से ही चाटुकारिता की हम तेरे गुलाम है हमे छोड़ और दूसरों को 
मार वाह क्या शिक्षा है 👌  जो दूसरों के
बारे मे बुरी सोच रखते है ।




* हमे  मत कष्ट दे , हमे ईश्वर हो कर उपदेश दे सर्वाथ अलग रख क्रोध मत कर तेरे साथ हमे युद्ध नही करना  । ( अर्थवेद 11 : 2 : 20 )



* वैदिक ईश्वर है ,या छोटासा बच्चा जो समझना पढ़ रहा है , की हमें तो तेरे मानने वाले है , हमे छोड़ दे , और तेरे साथ युद्ध नही करना ?



* या फिर  2 पग पर चलने वाला वैदिकईश्वर  कमज़ोरो पर अपना जोर दिखाना चाहता है , इतनी दादागिरी । 2 पग में मुराद  कोई मनुष्य जिसने वेदों को लिखा है , क्योंकि सच्चा पालनहार ऐसा उपदेश नही कर सकता जिसका उदाहरण ये है  ।





* न तो हमारी गौ में  , न तो पुरुषों में , न हमारी बकरियों  और भेड़ो में मारने की इच्छा रख ! हे बलवान दुसरो में घुस जा और उनकी प्रजा को मार ।  ( अथर्वेद  11 - 2 - 21 )

*  वैदिक ईश्वर है या कोई पशु  घुस कर मार , बेचारे जानवरो तक नही छोड़ रहा है ?

* और अपनी जान बचाने के लिए दूसरों को मार क्या शिक्षा है वाह 👌👌👌 और वैदिक ईश्वर को अपने मे और दूसरों में फर्क नही समझता क्या जो उसे बार बार याद दिलाना पड़ता है ।

* ये तो वही बात हो गई कि मिया मिट्ठु  जंग के मैदान में दुश्मनो के ऊपर वॉर के बाजए अपने ही सिपाहियों को  मरना शुरू कर दिया , ऐसा प्रतीत होता है , की याददाश कम है बार बार याद दिलाना पड़ता है की हम तो तेरे मानने वाले है ?

भय

उसी तरह से ये भी 



* हे वैदिक ईश्वर  न तो हमारे पूजनीयों को 
( बड़ो को ) , न  हमारे बच्चों को , न  हमारे युवा को , न  हमारे माता , पीता को , ना तू मार ना नही हमारे शरीर को नाश कर ।
( अर्थवेद 11 : 2 : 29 )




अब उसे भी बढ़ कर  ?




* वैदिक ईश्वर कहता है मैं मरता हु ।
मेरा कौन क्या कर  सकता है । स्वतंत्रता की बात का भी रदद् है क्यों कि ये सबको मरता और दंड देता है । 
कही आर्य समाजी को मारने की बात तो नही कर रहे है क्योंकि उनके जैसा दुष्ट यहूदियों के बाद दूजा कोई नही ?
( ऋग्वेद 10 : 48 :6:7 )


* क्या एकता डिग्री ली है सब करने की  ?

अब भाई पाबंदी  वाली बाते ? 




* अर्थात : -  हे  नारी , नीचे देख ,ऊपर मत देख , दोनों पैरो को ठीक तरीके से एकत्र करके रख  ,तेरे दोनों स्तन ,पीठ ,पेट ,नाभ, दोनों  जांघ , दोनों  पिडलिया नग ना कर 
यह सब इसलिए क्यों कि नारी  निर्माण कर्त्री हुई है । ( ऋग्विद 8 : 33:19 )




* भावर्त : - 1 . नारी को अपनी दृष्टि नीचे रखनी चाहिए उपर नही ।


2 . नारी को चलते समय  दोनों पैरों को मिलाकर सावधानी से  चलना चाहिए ।


3. इठलाते हुई , मटकते हुई , हाव भाव का प्रदर्शन करते हुई , चलचलता और चपलता से नही चलना चाहिए ।




4 . नारियों को वस्त्र इस प्रकार धारण करना चाहिए कि उनका स्तन , पेट ,पीठ , जांघे ,पिंडलियां इत्यादि दिखाई न दे । अपने अंगों का प्रदर्शन  करना विमासित और घोतक है ।


5 . यदि नारी ही बिगड़ गई  सृष्टि ही बिगड़ जांयगी ।

जहेज़ के कलंक 





* अर्थात : - हे वधु ! इस अग्नि के चारो तरफ देहज के साथ वधु घुमाते वा प्रदशीनन करते हैै  , यह अग्नि फिर पति के लिए प्रजा के साथ युक्त होने हरि जाया रूप में देता है। 
( ऋग्वेद 10 : 85 : 38 )


अत्याचार

मनुस्मृति 3 : 29


गाना और बजाना का अधिकार 





* मनुसमूर्ति  2 : 153 (121)



* इसलिए कहता हूं अब से गाना , बजाना छोड़ दो ।



खेती 


* अब रही  स्त्रियों को खेती वाली बात  ?


( मनुसमूर्ति 9 : 33 )

*  क्या बात है ? स्त्री खेती के तुल्य है ,
वाह भाई वाह 
तो खेति करो ।



* वैदिक ईशवर की आज्ञा जो मानता है वो सुखी रहता है जो नही मानता वो  दुख के सागर में बहे  जाता है । ( यजुर्वेद 19 : 77 )

* इसलिए कहता हूं वैदिकों  ऊपर जो भी लेखा है उसको मानो  !

अभी बच्चे हो इसलिए कहता हूं पहले अपने धार्मिक मान्यताओं को जानो और उसका अध्ययन करो फिर सोच समझ के बोलो समझे मित्रो , इसे पाबंदी नही अनुशासन कहते है , जो कि एक मनुष्य जीवन को सफल बनाने के लिए अति आवश्यक है 😊


*  मगर  इस्लाम पर  कीचड़ उछालने की ना काम कोशिश के सबब खुद ही  के कपड़े  मेंले कर रहे है ।


कमल छाप साबुन  के इस्तमाल से पुरे दाग निकल जाते है ! 😊

* और  लोगो में इस्लाम के बारे में इच्छुक जाग रही है और वे लोग इस्लाम का अध्ययन कर रहे है , और जिसको पंसद आ रहा है , वे इस्लाम के दमन से   लिपटे  जा रहा है ।

* और दुनिया मे सबसे तेजी से फैलने वाला  सच्चा दिन इस्लाम है । अल्हम्दुलिल्लाह ।

* ये होती है  असल शिक्षा का नतीजा ।

इस्लाम को क़ुदरत ने  वो लचक दी है 
तुम जितना इसे दबाउंगे ये उतना ही उभरेगा।

* बरहाल हमे आपकी मान्यता से कोई गरज नही क्यों कि इस्लाम कभी किसी को गलत नही कहता ।


*  किंतु कुछ चुतिया ( मुर्ख ) को उनकी भाषा मे जब तक ना समझया जाए जब तक उन्हें समझ नही आता 😊😊


 * हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।(2-256).  

 *पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).    
 *नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे। 
(81:27,28,29)(40:28)
       
 * ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है (सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     
    
 * और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)

 *कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      
*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट 
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है।
(17:81) 
       
NOTE : -  जो प्रशन दयानद  और उसे मानने वालों ने इस्लाम के बारे में  किये थे अल्हम्दुलिल्लाह उसका जवाब तो हम दे सकते है पर इनके दिमाग मे जंग  लगा है  इसलिए जो जैसी भाषा समझता है उसे वैसे ही समझना पड़ता है ।

* अगर किसी को ठेस पहुंची तो क्षमा चाहता हु ।

* इस लेख का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि उन इस्लाम विरोधी को जवाब देना है  जो खुद की धार्मिक गर्न्थो की मान्यता को नही जानते और इस्लाम और मुसलमानों के ऊपर तानाकाशी करते है।


धन्यवाद

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