punarjanam ka sach पुनर्जन्म का सच



पुनर्जन्म का सच




इस लेख में जानने की कोशिश करेंगे कि पुनर्जन्म क्या है  ? हिंदूइस्म और इस्लाम मे पुनर्जन्म की परिभाषा क्या है ? इत्यादि


सबसे पहले हिंदूइस्म की पुनर्जन्म की परिभाषा का विश्लेषण करेंगे कि मर ने के बाद पुनर्जन्म का नियम और ऐसा कौन कौन से पाप पुण्य किये जाते है की उसको वो यौनि में जन्म मिलता है ।

* हिंदूइस्म के पुनर्जन्म की मान्यता अक्सर पाई जाती है और अपनी मान्यताओं को साबित करने
के लिए इस्लाम का सहारा लेते नजर आते हैकिंतु इस्लाम मे फिर से जन्म लेने की परिभाषा कुछ ओर है और  हिंदूइस्म में कुछ ओर आये जानते है दोनों की पुनर्जन्म का नियम संक्षेप में ?

वेद और पुनर्जन्म 

पुनर्जन्म
( यजुर्वेद 4 : 15 )


* अर्थात : -  मनुष्यों को आयु फिर फिर प्रप्ति होती है , शरीर आधार फिर प्रप्ति होती है ,देखने के लिए आंखे , सुनने के लिए कान और पुनः  शरीर प्रप्ति होती है ।

* उसी प्रकार से गीता में भी है , की जिस तरह मनुष्य कपड़े बदलता है उसी प्रकार आत्मा भी बारम्बार शरीर बदलती रही थी है और भी कई प्रमाण मिलते है ।

* इस से पता चला कि हिंदूइस्म में पुनर्जन्म का अंत नही पुनर्जन्म बारम्बार होता रहता है और कर्म के अनुसार वेदों का ईश्वर किसी को , पशु , पक्षी किसी को लंगडा, किसी को लूला , किसी को रोगी , किसी को श्रेष्ठ , किसी को शुद्रो का जन्म देता है आदि आदि ।

* शरीर का अंत होता है , परंतु आत्मा ( रूह ) का नही हा हम भी इस बात को मानते है कि एक बार पालनहार के हुक्म से रूह बनी उसके बाद रूह का अंत नही किंतु वेदों के अनुसार ऐसा नही वेद कहता हैआत्मा परमात्मा और प्रकृति अनादि ( अमर अजन्मी ) है यानी कभी पैदा नही हुई ये तीनो पहले से थे ऐसा कहके ईश्वर का शरीक बना दिया , बरहाल हमे अपनी मान्यताओं से कोई गरज नही । 



अब देखते है हिंदूइस्म में पुनर्जन्म का नियम

* हिंदूइस्म में पुनर्जन्म के नियम के अनुसार जब
भी किसी मनुष्य की मृत्यु हो जाती है , उसके
पश्चात सबसे पहले हवा में आवरो की तरह से गर्दिश करता है , उसके बाद नाले , नदी , झरने इत्यादी में रहता है , फिर उसके बाद खेती वगैरा में जाता है फिर उसके बाद धान्य इत्यादि में बसर होता , उसके बाद फिर धान्य आदि उत्पन्न होकर
भोजन की शक्ल में मनुष्य उसे ग्रहण करता है
उसके बाद उसके वीर्य्य में प्रवेश करता है , उसके बाद कोई पुरूष स्त्री के साथ संभोग ( सेक्स ) करता है उसके बाद वो गर्भ में जाता है ये सब हो कर मर ने वाले को पुनः शरीर की प्रप्ति होती है ।


पुनर्जन्म


* ये सब नियम के बाद ही पुनर्जन्म होता है , पता नही दयानंद सरस्वती किस के लिंग में बैठा होगा
फिर कोई नियोग करेंगा फिर दयानद का पुनर्जन्म होगा क्या मिथ्या है ।

अब देखते है कि किस को किस यौनि में जन्म मिलता है ?


* मनुष्य शरीर की प्रप्ति केवल उन्हें को प्राप्त होती है जो वेद को सत्य मानते है  और वेदों की आज्ञा का पालन करते है उन्ही को मनुष्य यौनि में जन्म मिलता है ।

* ऐसा है क्या ? भला बताना की वर्तमान में केवल पूरे विश्व मे  3 -5 % लोगो  ही वेदों को मानते है और जानते है और जो वेदों को नही मन्नते वही नास्तिक है ।



* मतलब पुनर्जन्म में केवल 3 - 5 % लोगो को 
मनुष्य शरीर की प्रप्ति होगी ।

* और जो वेद आदि को नही मानते जिनको वेदों में मारने और काटने का हुक्म दिया है ।



वेद और आतंकवाद  के बारे में ये दोनों लेख जरूर पढे । 👇


भगवा आतंकवाद ( वेद और आतंकवाद )

हा में आतंकवादी हु भगवा आतंकवाद

* और जो वेदों को नही मानते उनको ये शरीर प्राप्त होता है ।


पुनर्जन्म


पुनर्जन्म
पुनर्जन्म का रहस्य






* कहते है , की सब चीज अपना अपना पाप और पुण्य  भोग रहे है , शेर बनने के लिए ऐसा कोनसा पाप करना पड़ता है , भला मुझे भी बता देना की वो पाप करके में भी पुनर्जन्म में शेर बनू


पुनर्जन्म
सच्च का आईना 


पुनर्जन्म



 * मतलब जीवआत्मा की एक निर्धारित संख्या
है जो बारम्बार रिपीट होती रहती है तो वेदों का ईश्वर को तो पता होगा कि उनकी संख्या कितनी है , और वेदों में तो ज्ञान विज्ञान है इतने बार रिपीट हो गया है तो वेदों में जीवात्मा की संख्या बताई होगी कृपिया हमे भी बता दे उनकी कितनी संख्या है और हा असंख्य नही कहना ? नही तो वेदों और वैदिक ईश्वर पर दोष आएगा हम मुस्लिम तो ये कहते हैं कि मनुष्यों को अल्लाह ने उतना ही ज्ञान दिया है जितना हम को आवश्यकता नाकि पूर्ण पर तुम्हारा कहना है कि वेदो में हर चीज है तो कभी संख्या वाली बात को तर्क की कसौटी पर नापना  अगर न बैठे तो ऐसे ज्ञान विज्ञान को कूड़ेदान में डाल देना ।



*  सुर्ष्टि की उपत्ति के से पूर्व न अभाव वा असत्ता होता  और  न व्यक्त जगत रहता है ,
न लोक रहता और न अंतरिक्ष रहता है , जो आकाश से  ऊपर निचे लोक - लोकान्तर  है , वे भी नही रहते , क्या किसको घेरता वा आवरत करता है , सब कुछ कुहरान्धकार 
( पूरा अंधकार होता है ) के गृह आवरण में रहता है , गहन गहरा क्योंकि रह सकता है ।
 ( ऋग्वेद 10 : 129 : 1)



* उस अवस्था में  न तो  मृत्यु रहती न ही काल व्यहार , न ही रात - दिन  का चिन्ह का नही रहता  । ( ऋग्वेद 10 : 129 : 2 )


 Note :-  जब कुछ नही रहता तो जीवआत्म को कहा रखाता होगा  ? 

सुर्ष्टि की उपत्ति

* सुर्ष्टि की आदि ( शुरुआत ) में पशु आदि ही आते है उसके पश्चात मनुष्य इसका मतलब ये हुआ कि सुर्ष्टि की शुरुआत में सब पापी धरती पर जन्म लेते है ।



पुनर्जन्म


मानव उतपत्ति  का कारण 


* फिर धरती  पर मानव की उत्पत्ति की प्रक्रिया इस प्रकार हुई  ? कहते है कि मानव पेड़ो के तुल्य बीच के समान तिब्बत के पत्थरों में था वो  भी वयस्क ( जवान 25 वर्षों ) तक और उसी की  नाभि ऊपर की ओर निकली थी और वो पत्थरों के अंदर बैठा था  और नाभ के जरिए से उसका खाना ,पीना , ऑक्सीजन इत्यादि की पूर्ति होती थी फिर 25 वर्षों के बाद पत्थरों से बाहर निकल कर पूरी दुनिया मे फैल गए ।

पुनर्जन्म


* इसी प्रकार से कई कई जगह मानव निकले थे
और मानव जीवन की शुरुआत हुई  देखो तो
वेदों का ज्ञान - विज्ञान अरे मूर्खो ये कौनसा विज्ञान है और कोनसे वैज्ञानिक ने इस का शोध लगा कर प्रमाण शिद्ध किया है ?


* और उदहारण तो देखो इन लोगो के कहते है कि शैवाल आदि आदि जीव भी इसी प्रक्रिया से
उत्पन्न होते है तो  मनुष्य का उतपन्न होना क्योंकर  असंभव है अब इन मूर्खो को क्या काहा जाए जो 2 +2 = 5 कहते है चलो एक क्षण के लिए मान लिया जाए कि ये सब सत्य है , की मनुष्य की उपत्ति पेड़ पौधों के तुल्य हुई है  तो भी फंसोगे अपनी बातो में क्योंकि पेड़ पौधे भी अपना पाप भोग रहे है तो पता चला कि जो भी इस प्रकार से  उत्पन्न हुआ वे भी पापी हुआ क्योंकी पेड़ पापी तो उसके गुण भी पापी और  मानव भी  उसी प्रकार के गुणों से उत्पन्न हुआ है इसीलिए मानव भी  पापी हुआ ।

* इस से पता चला कि सुर्ष्टि के आदि में पशु आदि भी पापी थे  और मानव उतपत्ति का कारण भी पापी है सुर्ष्टि के आदि में सब पापियों को भर देता है वेदों का ईश्वर क्या मिथ्या है ?

*  अरे मूर्खो भला बताओ कि एक पुरुष और एक स्त्री ऐसी मिथ्या  भारी प्रक्रिया से उत्पन्न होते तो आज क्यों कर नही हो रहे  ऐसा होता रहता तो नियोग की क्या जरूरत पड़ती  पर ऋषिमुनि का मतलब कैसा पूरा होता  ? ये भी कारण है ? सब पोपलीला है , और आज जो ट्यूबटेस्ट बेबी की जरूरत नही पड़ती ऐसे ही बच्चे पैदा होने लगते और आप लोगो का कहना है कि सर्वशक्तिमान से मुराद चमत्कार नही होता तो यहां पर वेदों के ईश्वर पत्थरो से मानव जीवन को उत्पन्न करके कैसा चमत्कार कर दिया या फिर चमत्कार के नाम पर ऋषिमुनि बल्तकार करते थे सब पोपलीला है ।



* अगर ये प्रश्न पूछा जाए कि पिछले जन्म कुछ याद क्यों नही रहता तो महाज्ञानी उत्तर देते 
नजर आते है कहते है कभी कभी  तो पिछले दिनो का कुछ याद नही रहता तो पिछले जन्म का  कहा से याद रहे ?

*  अरे प्यारे एक तरफ तो कहते हो कि श्रेष्ठ लोगो को मानव शरीर मिलता है  और  पापी लोगो को पशु आदि पीढ़ीत रूपी जन्म तो जो भला चंगा है 
वो तो पिछले जन्म में वेद को जानता था जिस के फलस्वरूप उसे मनुष्यों की योनी में जन्म मिला 
तो कुछ तो याद रहना चाहिए न एक आद बात।

* चलो जाने दो  जिन 4 ऋषियो को वेद ग्रहण हुआ था , वह कहा है क्यों कर नही कहते कि हमे वेद मिले थे वो तो पहले भी पुण्य आत्मा थी और आज भी उनकी आत्मा को  मोक्ष की प्रप्ति होने के पश्चात मानव शरीर मिला फिर वेद मिले वो 4 कहा है अभी तो उसका भी जवाब देते है कि उनकी आत्माओं को मोक्ष मिला है हा तो प्यारे  सुर्ष्टि को तुम्हारे हिसाब से 1 अरब  64 करोड़ आदि आदि वर्ष हो गये है उसके दरमियान 1 बार भी पुनः जन्म नही लिया फिर क्यों कहते है , की जो असल वेद थे उसमे लाखो मन्त्र थे और आज 20589 मन्त्र वेदों में बाकी रह गए है , क्या जो लाखो  मन्त्र पहले थे आज हम को उसकी आवश्यकता नही क्या वेदों के ईश्वर ने  अपना ज्ञान  सुर्ष्टि के आदि में एक बार देकर छोड़ देता है तो और ऐसा नही तो 4 ऋषिमुनि  मे से एक भी पुनर्जन्म ले के धरती पर क्यों नही आता और कहते लाखो तो नही 1 ही मन्त्र ले कर 20589 से  20590 कर लो ?

*  क्यों कर कोई आएगा वेदों की रचना खुद 3000 से 2500 पूर्व की है । सब पोपलीला है ।

* और एक बार वेदों को देकर छोड़ देता और कोई पुराना वेदों की कोई लिपि भी मौजूद नही जो अरबो तो नही ? नाही करोड़ो  ? नाही लाखो
बल्कि 10 हजार साल पूरानी कोई एक भी दस्तावेज देखा दे कि वे वेद इतने साल पुराने है तो हम कैसे साबित कर सकते है कि जो इस समय वर्तमान में  मौजूदा वेद है वही हूबहू  वही वेद है जो 4 ऋषियों को मिले थे वेदों के पुराना दस्तावेज कहा से आएंगे भला जो खुद 3000 साल पुराने है और उसका प्रमाण भी  3000 साल पुराना ही जो कि पुणे में है सब पॉपलीला ये पुनर्जन्म , नियोग ,छुत अछूत  इत्यदि सब मूर्खो ने  अपनी दुकान चलाने के लिए रचा है और साधारण मनुष्य को मुर्ख बनाते फिर ते है इसीलिए लोग सच जानकर इस्लाम स्वीकार ते नजर आते है क्यों कि झुट की बुनियाद पर आज तक कोई नही टिका है तो ये क्या टिकेंगे
असल वजह यही है कि इस्लाम पर ताना काशी करते नजर आते है पर ये भूल गए है कि ।

इस्लाम को कुदरत ने वो लचक दी है तुम्ह जितना इसे दबाउंगे ये उतना उभरेंगा ।


* और एक बात नोट करने की है कहते है कि स्वर्ग और नर्क यही धरती है स्वर्ग से मतलब सुख और नर्क से मतलब दुख भरा जीवन  तो बताना की इतनी पुण्य करने के बाद भी यही जीवन रोज कमाओ और खाओ वही कष्ट जो माता को पुत्रो की जन्म के दौरान होता है वही सब कुछ तो सुखों की प्रप्ति कहा हुई बल्कि वही जीवन की गाढ़ी फस गई इतना सब कुछ करने के बाद इनाम में सिर्फ मानव शरीर इससे तो अच्छा जानवर है ना तो कोई पत्नी का टेंशन नाही कमाई का  जहा खाने को मिला वहा खालिये  और जहा सोने की जगह मिली सो गए ।
 ऐसा पुनर्जन्म हमे नही चाहिए । 😵😵😵😵


वेदों में अश्लीलता का नांगा  नाच


वैदिक ज्ञान या पाखंड


 मस्जिद या मंदिर 


मांसाहारी या शाकाहारी


  वेद का भेद 


आर्य समाज का झूठ



हा में आतंकवादी हु भगवा आतंकवाद



मनुस्मृति और नारी ( दयानन्द का ज्ञान )


यम और यमी की प्रेम कहानी



आर्य भट और जीरो


भगवा आतंकवाद ( वेद और आतंकवाद )


आत्मा और परमात्मा का अंतर 


 नियोग एक कलंक



 
सत्यार्थ  प्रकाश और इस्लाम  1 



सत्यार्थ प्रकाश और इस्लाम  2 



सत्यार्थ प्रकाश  और इस्लाम 3 



सत्यार्थ  प्रकाश और इस्लाम  4 


 सत्यार्थ प्रकाश और  इस्लाम 5


सत्यार्थ प्रकाश और इस्लाम 6



सत्यार्थ प्रकाश और इस्लाम  7


  सत्यार्थ प्रकाश और इस्लाम 8


 सत्यार्थ  प्रकाश और इस्लाम 9 






अब देखते है  इस्लाम और पुनर्जन्म


* इस्लाम मे पूर्णजन्म की परिभाष बिल्कुल साधरण है ।


وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ


और मैने ( अल्लाह ) जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें । ( 51 : 56 )



* वह जिसने मौत और जिंदगी पैदा की ताकि तुम्हारी जांच (परीक्षा) हो कि तुम में अच्छा काम कौन करता है, और वही है इज्जत वाला बख्शीश वाला । ( 67:2)


* हर जान को मौत का मज़ा चकना है,और हम (अल्लाह) अच्छी और बुरी परिस्तिथि में डाल कर मानव की परीक्षा लेता है  अंत मे तुम्हे मेरे (अल्लाह) पास ही आना है।{क़ुरआन(21:35)& (32:11)  }



* जिंदगी का मकशद यह है, अच्छे कर्म (अमल) करना ।


* पाक पालनहार ने केवल मानव को एक ही बार जन्म दिया है और उसे अच्छे और बुरे का फर्क बताया है अपने नबियों के जरिये उसी के आधार पर पाप - पुण्य के फलों की प्रप्ति होगी जिसने अच्छे कर्म किया उसे जन्नत ( स्वर्ग ) और जिसने बुरे कर्म किया उसके गुनाहों के सबब जहन्नुम 
( नरक ) बस यही इंसाफ है ।

* उसने अपने कई नबी भेजे ( पालनहार का संदेश पहुचाने वाले )  और कई बार वह्य  की
शक्ल में  उदहारण ० तोरैत , ज़बूर , इंजील ,
क़ुरआन , हजरत इदरीस अलैहिस्सलाम के सहिफे , है हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के सहिफे
और हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के सहिफे इत्यदि क़ुरान केवल चंद नबियो का जिक्र है और बहुत से नबियो का जिक्र राज है ।


وَرُسُلًا قَدْ قَصَصْنَٰهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُسُلًا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ وَكَلَّمَ ٱللَّهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًا


जिनका हाल हमने तुमसे पहले ही बयान कर दिया और बहुत से ऐसे रसूल (भेजे ) जिनका हाल तुमसे बयान नहीं किया और ख़ुदा ने मूसा से (बहुत सी) बातें भी कीं । ( 4 :164 )


رُّسُلًا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى ٱللَّهِ حُجَّةٌۢ بَعْدَ ٱلرُّسُلِ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا


और हमने नेक लोगों को बेहिश्त की ख़ुशख़बरी देने वाले और बुरे लोगों को अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बर (भेजे) ताकि पैग़म्बरों के आने के बाद लोगों की ख़ुदा पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है(4 : 165)

* पाक पालनहार अपने बन्दों को अकेला नही छोड़ता बल्कि है हर दौर में उसने अपने नबी भेजता रहा और उसके साथ अपना संदेश और अंतिम संदेश आप नबी मोहम्मद सल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाजिल किया जो कि क़ुरान की शक्ल में ।


وَٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَبِٱلْءَاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ



और जो कुछ तुम पर (ऐ रसूल) और तुम से पहले नाज़िल किया गया है उस पर ईमान लाते हैं और वही आख़िरत का यक़ीन भी रखते हैं।  ( 2 : 4 )


इस्लाम में पुनर्जन्म की परिभाषा बिल्कुल आसान सी है , मानव को पाक पालनहार ने केवल एक ही बार जन्म दिया है और मरण के बाद सीधा आख़िरत ( महाप्रलय ) के बाद हिसाब  किताब का  फैसले के वक़्त जिंदा करेंगा और यहां एक बात ध्यान देने की है  कि कब्र से मुराद  मिट्टी का गढा नही बल्कि जो जहा मर गया वही उसकी कब्र है चाहे मिट्टी के नीचे हो या जला दिया गया हो , या कोई जंगली जानवरों ने अपना शिकार बनाया हो या कोई हादसा कोई भी मर ने का कारण हो जो जहा मर गया वही उसकी कब्र है । उसको वही से आख़िरत में जिंदा करेंगा अब यहाँ एक प्रश्न उठता है कि जब कोई शरीर का अस्तित्व ही नही रहेगा तो जिंदा किस्से करेंगा अरे प्यारे जब तुझे एक गंदे पानी की बूंद से पैदा कर सकता तो उसके लिए कोई चीज करना क्योंकर मुश्किल हो सकती है और कोई दूसरा शरीर नही बल्कि वही पुराना शरीर को जमा कर जिंदा करेंगा चाहे हमारे शरीर का एक कण बाकी रहे ।


أَوَلَمْ يَرَ ٱلْإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقْنَٰهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ

क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है । ( 36 : 77 )

وَضَرَبَ لَنَا مَثَلًا وَنَسِىَ خَلْقَهُۥ قَالَ مَن يُحْىِ ٱلْعِظَٰمَ وَهِىَ رَمِيمٌ

और हमारी निसबत बातें बनाने लगा और अपनी ख़िलक़त (की हालत) भूल गया और कहने लगा कि भला जब ये हड्डियां (सड़गल कर) ख़ाक हो जाएँगी तो (फिर) कौन (दोबारा) ज़िन्दा कर सकता है  । ( 36 : 78 )


قُلْ يُحْيِيهَا ٱلَّذِىٓ أَنشَأَهَآ أَوَّلَ مَرَّةٍ وَهُوَ بِكُلِّ خَلْقٍ عَلِيمٌ

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि उसको वही ज़िन्दा करेगा जिसने उनको (जब ये कुछ न थे) पहली बार ज़िन्दा कर (रखा) । ( 36 : 79 )


ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُم مِّنَ ٱلشَّجَرِ ٱلْأَخْضَرِ نَارًا فَإِذَآ أَنتُم مِّنْهُ تُوقِدُونَ

और वह हर तरह की पैदाइश से वाक़िफ है जिसने तुम्हारे वास्ते (मिर्ख़ और अफ़ार के) हरे दरख्त से आग पैदा कर दी फिर तुम उससे (और) आग सुलगा लेते हो । ( 36 : 80 )


أَوَلَيْسَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يَخْلُقَ مِثْلَهُم بَلَىٰ وَهُوَ ٱلْخَلَّٰقُ ٱلْعَلِيمُ

(भला) जिस (खुदा) ने सारे आसमान और ज़मीन पैदा किए क्या वह इस पर क़ाबू नहीं रखता कि उनके मिस्ल (दोबारा) पैदा कर दे हाँ (ज़रूर क़ाबू रखता है) और वह तो पैदा करने वाला वाक़िफ़कार है । ( 36 : 81 )


إِنَّمَآ أَمْرُهُۥٓ إِذَآ أَرَادَ شَيْـًٔا أَن يَقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

उसकी शान तो ये है कि जब किसी चीज़ को (पैदा करना) चाहता है तो वह कह देता है कि ''हो जा'' तो (फौरन) हो जाती है । ( 36 : 82 )


فَسُبْحَٰنَ ٱلَّذِى بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ كُلِّ شَىْءٍ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ

तो वह ख़ुद (हर नफ्स से) पाक साफ़ है जिसके क़ब्ज़े कुदरत में हर चीज़ की हिकमत है और तुम लोग उसी की तरफ लौट कर जाओगे । ( 36 : 83 )

* तो ये थी इस्लाम और हिंदूइस्म के पुनर्जन्म का सच्च । 


धन्यवाद










































 हक़ बात ( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।(2-256).  



पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है। (16:90).    

नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।  (81:27,28,29)(40:28)
       
ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है (सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     
    
और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)

कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      
*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट 
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है। (17:81) 


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* इस लेख का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि उन इस्लाम विरोधी को जवाब देना है  जो खुद की धार्मिक गर्न्थो की मान्यता को नही जानते और इस्लाम और मुसलमानों के ऊपर तानाकाशी करते है।





































































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