NABI IBRAHIM AUR NAMROOD

PROPHET ABRAHAM  नबी इब्राहीम 2



नमरुद का दर्दनाक अंजाम 



* जब आप इब्राहिम अलेहसल्लाम  ने नमरुद को कई बार समझाया कि एक पालनहार 
( रब ) पर ईमान लेआ । 

* तू शिर्क से  , बुरे कामो  से  बाज आजा और तौबा करले , पालनहार की बारगाह में सच्चे दिल से माफी तलब कर , तुझे अल्लाह ने कितनी लंबी उम्र दिया और बादशाह बनाया । 


* तूने खुली आंखों से  उसकी की निशानियां 

देखी और तुझ पर हक़ भी साफ हो गया , फिर भी तू अपनी पुरानी  बातो पर अड़ है  और अब भी अपने खुदा  होने का दावा करता है , और तुझे अपने माल दौलत  पर घमंड है ।

*अल्लाह का क्या जोर है  तू नही जानता तेरी  ताकत उसकी जोर के आगे कुछ नही ।


* फिर गुरुर खाते कहने लगा , मेरे सिवाय  जामिन पर दूसरा कोई नही जो मुझसे ज्यादा ताकत रखता हो ।


* और अगर तेरा दावा है , की तेरा पालनहार मुझसे ज्यादा  ताकतवार है तो तू आसमान से कोई  फ़ौज लेआ देखते कौंन ज्यादा ताकतवर है 


* तो आपने अल्लाह की बारगाह में  फ़ौरन दुआ के लिए हाथ उठाये दुआ की ये  मेरे मालिक इस गुरुर करने वाले का गुरुर चकना चूर फ़रमा , उसी वक़्तत हज़रत जिब्राईल वहा पहुँच गए , और आपने फ़रमाया नमरुद से कहो हमारी फ़ौज आ रही है , तुम अपनी फ़ौज तैयार रख ।


* नमरुद ने तीन दिनों की मौहलत मांगी , और उसी बीच उसने लाखो की तादाद में फ़ौज जमा कर ली और  एक खाली मैदान में सब के सब जमा हो गए ।




* और चौथे दिन आप इब्राहिम  अकेले तन्हा 
आये ।

* कुर्बान आप पर हमारे माँ -बाप - बाल-बच्चे हमारी जाने क्या ईमान था  ।


* वे लोग कहने लगे  कहा है वो आसमानी फ़ौज ? 

* आपने फ़रमाया अभी तुम्हारे सामने आती है , इतना कहना था कि एका - एक  मच्छरों  का एक बड़ा झुंड जो कि सूरज की रोशनी  छुप गई और पूरा आसमान काला बदल से हो गया ।



* ये नजारा देख कर  नमरुद घबरा गया , चारो ओर ख़ौफ़ का माहौल हो गया था , ये देख कर सब लोग भागने की नाकाम कोशिश करने लगे  ।

*  और एक -एक दुष्मनाने  खुदा के ऊपर असंख्यों मच्छरों ने हमला कर दिया ,सिर से   लेकर पैर तक ऐसा चिमटे की हड्डी पर गुस्सा का नामो निशान बाकी न रखा । 

* और हजारों इन्शान अल्लाह की एक छोटी से मखलूक से बच न सके ।


* और  नमरुद ये नजारा देख कर अपने महल की तरफ भागने लगा  और  औरतों के छिपने ने की कोशिश करने लगा , उसी वक़्त 
एक अदना सा  कमजोर लंगडा मच्छर आया और उसकी नाक में घुस गया और नाक के रास्ते से सीधे दिमाग की ओर दौड़ा और उसके भेजे में अपना ढंक घुसो दिया ।

* उसका सुख -चैन सब खत्म हो गया  और पूरे महल में पागलो की तरह इधर उधर भागता दौड़ता  और लग -भग  40 दिनों तक उसका यही हाल रहा , कुछ और बयान करना बहुत ही मोश्किल है और तडप -तड़प के मर गया ।


NOTE : -  अल्लाह की एक  अदना सी मखलूक से नही बचे सके  और अल्लाह को चैलेंज  देते  फिरते है । और आज ये लोग अल्लाह के कानून के साथ खिलवाड़ करने की नाकाम साजिस कर रहे है ,उस कॉम को फना करना चाहते है , जिस कॉम ने नमरुद , हामान ,फिरौन ,करुन ,इत्यादि का जुल्म देखा है , फिर उनका क्या हाल हुआ आप बेहतर जानते  , अनक़रीब दुष्मनाने इस्लाम का यही हाल होने वाला है ।

इस्लाम को कुदरत ने वो लचक दी है 
तुम इसे जितना  दबाउंगे ये उतना उभरेगा 

* इस्लाम मुक्त चाहिए इन्हें अनक़रीब पता चल जायेगा क्या होता है , तुम भी इंतजार करो हम भी देखते है  जितना जुल्म सितम करना है करलो ।

जंग ए आज़ादी और मुसलमान 
यहाँ देखे @




 * और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)


إِنَّ ٱلَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ ٱلْفَٰحِشَةُ فِى ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ


अर्थात : - जो लोग चाहते है कि उन लोगों में जो ईमान लाए है, अश्लीहलता फैले, उनके लिए दुनिया और आख़िरत (लोक-परलोक) में दुखद यातना है। और अल्लाह बड़ा करुणामय, अत्यन्त दयावान है !

( 24 : 19 )

أَوَلَمْ يَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَيَنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ كَانُوا۟ مِن قَبْلِهِمْ كَانُوا۟ هُمْ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَءَاثَارًا فِى ٱلْأَرْضِ فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٍ





 अर्थात : - क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ, जो उनसे पहले गुज़र चुके है? वे शक्ति और धरती में अपने चिन्हों की दृष्टि से उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे, फिर उनके गुनाहों के कारण अल्लाह ने उन्हें पकड़ लिया। और अल्लाह से उन्हें बचानेवाला कोई न हुआ ।   ( 40 : 21 ) ( 30 : 9 , 10 )



خَلَقَ ٱلْإِنسَٰنَ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ

अर्थात : - उसने इन्सान को नुत्फे ( वीर्य ) से पैदा किया फिर वह यकायक (हम ही से) खुल्लम खुल्ला झगड़ने वाला हो गया ।
( 16 : 4 )


أَوَلَمْ يَرَ ٱلْإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقْنَٰهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ

अर्थात : - क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील 
 गंदे पानी ( वीर्य ) से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है ! ( 36 :77 )

😢😢😢😢😢 अफसोस 😢😢😢😢😢

خُلِقَ ٱلْإِنسَٰنُ مِنْ عَجَلٍ سَأُو۟رِيكُمْ ءَايَٰتِى فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ

 अर्थात : - आदमी तो बड़ा जल्दबाज़ पैदा किया गया है मैं अनक़रीब ही तुम्हें अपनी (कुदरत की) निशानियाँ दिखाऊँगा तो तुम मुझसे जल्दी की (द्दूम) न मचाओ !
( 21 : 37 )

*कुछ  ना समझ लोग कहते है की क़ुरान में किस्से कहानी बाहरी है  , ये  सच्चे किस्से इस लिए बताये गए है क्यों  की इससे हम सबक हासिल कर 

सके , जिस चीजो से उनकी पकड़ होइ वो चीजो से हमें बचने का प्रयत्न करना है और जिससे वो राजी होता है ,  वो करने की कोशिश करना है ।

आदम की पैदाईश मट्टी से  या कुछ और 


لِّكَيْلَا تَأْسَوْا۟ عَلَىٰ مَا فَاتَكُمْ وَلَا تَفْرَحُوا۟ بِمَآ ءَاتَىٰكُمْ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ

ताकि जब कोई चीज़ तुमसे जाती रहे तो तुम उसका रंज न किया करो और जब कोई चीज़ (नेअमत) ख़ुदा तुमको दे तो उस पर न इतराया (घमंड ) करो और ख़ुदा किसी इतराने( घंमड ) वाले येख़ी बाज़ को पसन्द नहीं करता ।
 ( 57 : 23 )

* ये इन्शान तुझे किस चीज का घमंड है तेरे
हकीकत तो ये है ।



* अल्लाह कहा है ? यहाँ देखे @

*  इस्लाम का सच्च ? यहाँ देखे @

* आत्मा , परमात्मा और प्रकुति का चक्र  ?

 * जब ये सारा किस्सा हो चुका तो , तो आप ने  इरादा किया कि पूरी दुनिया मे तौहिद का पैगाम फैलाये और अपने वहा से कूच करने इरादा फ़रमाया और मुल्के शाम की और रवाना होए  आप पर ईमान लाने वाले हज़रत लूत थे  जो कि आपके भतीजे लगते थे , जो कि इस तरह है । फिर आप लूतअलेहसल्लाम भी नबी बने जो कि हम आगे देखगे । 


وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ


तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ । ( 37 : 99 )


فَـَٔامَنَ لَهُۥ لُوطٌ وَقَالَ إِنِّى مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّىٓ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

तब सिर्फ लूत इबराहीम पर ईमान लाए और इबराहीम ने कहा मै तो देस को छोड़कर अपने परवरदिगार की तरफ 
(जहाँ उसको मंज़ूर हो ) निकल जाऊँगा । 
( 29 : 26 )


* फिर आप वहा से छोड़ कर चल गए , आप अपनी पत्नी हज़रत सारा और हज़रत लूत  के साथ ।

* जब आप वहा चले तो मिस्र के दर्मियान के 
शख्स मिला जो कि हज़रत सारा पर बदनिगहि करने लगा , आप सारा बहुत ही खूब सूरत थी , और वो शख्स आपकी तरफ हाथ बढ़ाने लगा अपने अल्लाह से उस के लिए बद्दुआ की और उसके दोनों हाथ मे खूब ज्यादा दर्द होने लगा और वो अपाहिज हो गया , और उसने हज़रत सारा से माफी मांगी 
आप ने उसके ठीक हो  जानने के लिए दुआ करी  और वह ठीक हो गया , फिर उसने बदनिगहि करना चाही फिर आपने उसके लिए बदुआ की फिर वह अपाहिज हो गया फिर उसने माफी मांगी , इसी तरह से दो , तीन मर्तबा हो गया , वो समझ गया कि ये कोई  आम नही कोई अल्लाह की वालिया है 
और उसने सच्चे दिल से तौबा की और आपकी खदमत के लिए एक कनीज को आपकी खदमत में पेश किया ।  जिनका नाम हज़रत हाजरा था ।

* हज़रत इब्राहीम की कोई संतान न थी तो  हज़रत सारा ने आपको हज़रत हाजरा से निकाह करने का मशवरा दिया ,क्यों  की दिन ए हक़ कामआपको मिला था , जो कि आपकी  अल - ओलाद से आगे बढ़ना था । 

* और आपने हज़रत हाजरा से निकाह फ़रमाया । 

* NOTE : - यहाँ पर कुछ लोग अपनी गंदी 
रस्म को साबित करने के लिये हज़रत इब्राहीम पर तोमत लगाने की नाकाम कोशिश करते है , पालनहार ने  पुरुष को कुछ निकाह  करने की इजाजत दी है । क्यों इसकी  कई वजह  । 

* हा अगर हिंदूइस्म में बहु - विवाह नही तो  राम जी के पिता राजा दशरथ ने 4 विवाह क्यों किये ? और पांडवों ने 1 स्त्री के साथ 5 पुरुषो ने क्यों विवाह कीया अवश्य उन्होंने पाप किया है , या फिर हिंदूइस्म में बहु विवाह की प्रथा थी ? 

* बरहाल हमे आपकी मान्यता से कोई गरज नही । 
नियोग क्या है ? यहाँ देखे @

और अगर इसे मन ना बहरे तो ये भी देख लेना अश्लीलता

इस्लाम और नारी  और उसके अधिकार

यहा देखे @

* और फिर हज़रत हाजरा से हज़रत इस्माइल की पैदाइश हुई  जो कुछ इस तरह से है । हज़रत ईस्माइल की पैदाइश और जमजम का वाकिया 



رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ


वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा । ( 37 : 100)



فَبَشَّرْنَٰهُ بِغُلَٰمٍ حَلِيمٍ

तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के 

(के पैदा होने की) खुशख़बरी दी । ( 37 : 101 )







NOTE : - मैं पहले ही बता दिया है कि जो जितना अल्लाह पर ईमान रखता है अल्लाह उसकी उतनी ही आज़माइश करता और  उस आज़माइश से  उम्मत को सिख मिलती है क्यों कि पालनहार ने परीक्षा के लिए पैदा किया है ।



* वह जिसने मौत और जिंदगी पैदा की ताकि तुम्हारी जांच (परीक्षा) हो कि तुम में अच्छा काम कौन करता है, और वही है इज्जत वाला बख्शीश वाला।( 67:2)

* हर जान को मौत का मज़ा चकना है,और हम(अल्लाह)अच्छी और बुरी परिस्तिथि में दाल कर मानव की परीक्षा लेता है  अंत मे तुम्हे मेरे(अल्लाह) पास ही आना है ।(21:35) & (32:11)  



*  और आप  ईस्माइल  गोद मे ही थे  अल्लाह ने फिर से हज़रत इब्राहीम की आज़माइश लिए , जो कि इस तरह है ?

*  हज़रत इब्राहीम अलेहसल्लाम  को काफी अर्से बाद ओलाद होइ थी  और अल्लाह से ओलाद के किये दुआ करते थे ।


* और ईस्माइल का मतलब होता है , अल्लाह ने मेरी दुआ सुनली  इब्रानी  भाषा मे 


* अब देखते आगे  ............


 नबी इब्राहिम  1
कौन थे ? 



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