Manusmriti aur Nari


नाम एक अभिशाप या वरदान


Manusmriti aur Nari



मनुस्मृति


* आये देखते है , मनु जी काज्ञान  और मनुवादीयो की सोच ?

* सबसे पहले मनु जी ज्ञान की बात करेंगे फिर उनके मानने वालों की ?


मनुस्मृति और नारी
( 3 : 7 )

  1.  जिस परिवार में उत्तम क्रिया न हो ?
  2.  जिस परिवार में उत्तम ज्ञानी पुरूष न हो ?
  3. जिस परिवार  मे कोई पढ़ा लिखा न हो ?
  4. जिस परिवार के लोगो के शरीर ऊपर बड़े बड़े बाल हो ?
  5. जिस परिवार में किसी को बवासीर हो ?
  6. जिस परिवार मे किसी को  T. B की शिकायत हो  ?
  7. जिस  परिवार में किसी को पेट की कोई शिकायत हो ?
  8. जिस परिवार में किसी को मृगी की शिकायत हो ?
  9. जिस परिवार में किसी को सफेद दाग की शिकायत हो ?
  10. जिस परिवार में किसी को कुष्ट रोग की शिकायत हो ऐसे परिवार में कभी भी विवाह न करे ।


मनुस्मृति और नारी
मनुस्मृति 3 : 6

* चाहे कितना भी मालदार हो ऊपर जो 10 बाते है ऐसी परिवार की लड़कियों से कभी भी विवाह न करे ।

* वाह भाई वाह क्या ज्ञान है , अगर परिवार के किसी एक भी सदस्य को किसी प्रकार की परेशानी होतो उसकी परिवार की लड़कियों से कोई शादी न करे मतलब उन परिवारों की लड़किया जिंदगी भर कुवारी रहे वाह क्या अधिकार क्या समानता है ।

* अगर कोई वेद आदि नही जानता तो उसके परिवार में विवाह न करे , जिस घर मे कोई पढ़ा लिखा नही उस परिवार में विवाह न करे 
जिस परिवार में कोई रोगी हो उस परिवार में विवाह न करे ।

* और जिस परिवार के सदस्यों के शरीर पर ज्यादा बाल होतो उस परिवार में विवाह न करे  , अगर जिस भी कुल में ये दोष पााये जाये तो येे ऐसे कुल में न कोई कन्या और 
कोई वर से विवाह  करे ।

* किसी के शरीर पर ज्यादा बाल होने से उस घर की लड़कियों से विवाह न करे ऐसा कौन सा उसके पीछे विज्ञान है कि ज्यादा बालो में ,कोई विशेष शोध होगा इनका ।

* किसी एक कुल के सदस्य को बवासीर की शिकायत हो और उसके परिवार के बच्चें बच्चीयों विवाह न कारे इसके पीछे ऐसा कोनसा विज्ञान है ।

* बुहत ही प्रशनशिय ज्ञान है , किसी एक को परेशानी और उसकी सजा पूरे परिवार को वाह , क्या कोई रोग होना  पीड़ित का दोष होता है वेद तो कहते है , रोग आदि वैदिक ईश्वर की न मानने के कारण होता है । 
( अर्थवेद 11 : 4 : 11 ) तो कर्म के लिए स्वतंत्रता कहा ?

* और वर्तमान में कोई एक ऐसा कुल हो जिस में किसी को किसी प्रकार के रोग से पीड़ित न हो भला ? हा अगर कोई पीड़ित हो भी तो उसकी सजा परिवार के कन्या और वर को ये कोनसा कानून है ? मनु जी मुझे आपका ज्ञान बहुत भाया 👌👌👌

मनुस्मृति और नारी
( 3 : 9 )

* न तारे - सितारे ( नक्षत्र ) , न पेड़ -पौधे  , 
न नदी , न पर्वत इत्यादि नाम वाली कन्या
से विवाह न करे ।


* उद्धरण ० रेवती , रोहिणी , चप्पा , गंगा , जमुना , सरस्वति , गोदावरी , नर्बदा , कोयल , हंसा , इत्यादि नाम वाली कन्या से कभी भी विवाह न करे ।



* केवल नामो के वजह से विवाह न करे वाह फिर एक प्रश्न उठता है , की जिनते भी हिंदूइस्म के देवी देवता के नाम अधिकतर 

इन्ही  नामो पर है , गंगा , जमुना , यमुना आदि - आदि शायद गलत रखे होंगे ?
शंकर की पत्नी का नाम पार्वती , गंगा , ब्रह्मा की बेटी का नाम सरस्वती  और भी रेवती आदि सब इन्ही नाम पर आधरित है ?


* मनु जी के हिसाब से इन लोगों ने नाम बदल देना चाहिए , इन नामो वाली से शादी कैसे किया इन लोगो ने समझ नही आता , मनु जी मैं आपके साथ हु अब सब नाम बदल दो इन लोगो के ? क्या मिथ्या है केवल नाम की वजह से विवाह नही करना क्या सोच है ?





मनुस्मृति और नारी
( 3 : 10 )

* दोषरहित अंग वाली मतलब गूंगी , बहरी , लूली लंगड़ी इत्यादि से विवाह न करे ,बल्कि  कोमल बाल हो , कोमल अंग ( नाजुक बदमन ) हो , छोटे छोटे दांत हो ऐसी कन्या से विवाह करे ?



















* वाह बहरी , गूँगी , लंगड़ी  एक अभिशाप हो गया  क्योंकर पैदा हो गई  काश माता जी पेट मे ही ?? बहरी , गूँगी होने में उसका दोष है , जिसकी वजह में मनु जी ने ऐसा कानून पास किया , क्या उसे वजह से उनका विवाह नही होगा वहा क्या फैसला है । 

* और कैसी होना कोमल बाल , छोटे छोटे दांत , कोमल अंग , हा अच्छा पर दुसरो के लिए ऐसी सोच की विवाह न करो ?


फिर जब विवाह हो तो ये ?


दहेज
 ( 3  : 29 )

कारोबार ?






 स्त्रियां खेती के समान है ?


खेती
( 9 : 33 )



आये देखते है मनु जी का ज्ञान - विज्ञान ?



मनुस्मृति और पुत्री
( 3 : 48 )

* मनु जी का ज्ञान जिसको पुत्र ( लड़का )चाहिए वो स्त्री की माहवारी के बाद 6 , 8 , 10 , 12 , 14 रात को कोई संभोग ( सेक्स ) करता है तो उसको पुत्र की  प्राप्ति  होगी  ।

* और जो 5 , 7 , 9 , 15 की रात्रि को संभोग( सेक्स ) करता है तो पुत्री होगी ( लड़की )

* मनुजी कहा से ले आये ये परिभाषा अगर ऐसा कुछ नही हुआ तो इसका जजिम्मेदार होगा ? ये थे मनु जी का ज्ञान और उनके विचार ? नय जमाने की नई  मनुस्मृति इस कदर तक मिलावट कर  दी गई है  कभी कभी तो ऐसा लगता है , की कोई इस्लामिक पुस्तक पढ़ रहा हूं , 80 % तक इस्लाम की  शिक्षा को नकल किया गया है और जो 20 % बचा कूचा बेखडा है वो जो ऊपर बात दिया  है ? 








और हा  लड़के और लड़की में क्या फर्क है 
अफसोस ?






अब देखते है एक ब्रह्चारी का ज्ञान ?


* महृषि दयानंद सरस्वती जी  की विश्व प्रशिद्ध  पुस्तक  चुत्यार्थ अंधकार अरे माफ करना सत्यार्थ प्रकाश आये इस पुस्तक के दर्शन करते है ?






विवाह की उत्तम आयु ?


* चौबीस ( 24 )साल की लड़की और  अड़तालीस ( 48 ) का लड़का शादी के लिए उत्तम आयु है । क्या बात है गुरु जी 👌
( 4 समुल्लास पेज नंबर 72 )

* कहते है , की मनु के विचार रख कर नाम के विषय मे अगर किसी काली लड़की का नाम गौरी रख दिया जाए तो उसका गोरी नाम रखना व्यर्थ है ( यानी फालतू है ,क्यों नाम का अपमान हो जाएगा क्या महाशय )

* कहते है , की पुर्नविवाह से पत्ती वार्ता धर्म नष्ट हो जाता है ।

* पुनर्विवाह के बदले नियोग कर के बच्चे पैदा कर ले यही वेदों की आज्ञा है ।








* कम से कम 10 बच्चे ?







* स्वमी च्चारस्वती अरे माफ करना सरस्वती वो स्वमी जी तम्बाकू इत्यादि का सेवन करते थे इसलिए मुह से निकल गया  से पूछा गया कि नियोग पाप प्रतीत नही होता महाशय का जवाब नियोग को पाप समझना पाप है और वेदशास्त्र के खिलाफ है !





* आखिर वजह क्या है कि दयानंद नियोग का इतना समर्थन लगता है कि ये खुद नियोग से पैदा हुआ है  या फिर इसने नियोग के नाम पर खूब मजे लिए है ( आज कि आप भाषा से एसो बलात्कारी और अय्याश बाज कहते है । )





नियोग के नियम 


* उत्तम पुरुषों के साथ नियोग का काम करेयानी  वैश्या पुरुष वैश्य स्त्री के साथ क्षत्रिया - क्षत्रिय के साथ , ब्राह्मणी - ब्राह्मण के साथ नियोग का काम करे ऐसे कलंकित काम के लिए भी भेद भाव , कहीं तो उच्च नीच छोड़ दो ?


अन्याय और अधर्म 


* स्त्रियां और पुरूष का एक ही बार विवाह होना चाहिए दूसरी बार नही अगर हो तो ये अन्याय है और अधर्म का काम है और नियोग पाप नही ? काम चलने दो ?

* तो राम जी के पिता दशरथ ने 4 विवाह क्यों किये युधिष्ठिर की 10 पत्नि और 101बच्चे इसमे कोई शक नही की ये सब अधर्मी लोग होंगे दयानद के कथन के अनुसार ?और कृष्ण की लीला पर तो पर्दा डाल कर उसका ऐब छुपा दिया ?




* अगर किसी को संतान की चाह है तो नियोग करले यही वेदों और धर्म का काम है पुर्नविवाह अधर्म और अन्याय का काम है ।

* चाहे छोटा भाई हो या बड़ा स्त्री जिससे नियोग का काम करे उसे की देवर कहा जाता है ।

* जैसा कि पाण्डु राजा की स्त्री कुंती और माद्री आदि ने किया और जैसा व्यास जी ने  चित्राडद्र और विचित्रवीर्य के मारे जाने के बाद उन अपनी भाइयो की पत्नियों के साथ नियोग करके अम्बिका में धृतराष्ट्र और अम्बालिका में पाण्डु और दासी से विदुर की उत्पत्ति की ये सब नियोग से हुई संतान है इत्यादि बात इतिहास से प्रमाणित है ।
( 4 समुल्लास  पेज नंबर 110 )


* ये सब नियोग की औलाद है हैय्य्य्य्यय ?




नियोग में 11 पुरुषों से कर सकते है ?



नियोग
( 4 समुल्लास पेज नम्बर 100 )


* इस मंत्रो का अर्थ है कि स्त्री नियोग में 11पुरुषों से काम ले सकती है और पुरुष भी 11स्त्रियों से काम ले सकता है । कही इस मंत्र के चलते 5 पांडुओ ने  1 स्त्री रखी थी ?





दयानंद की ब्रह्चारिता 


* जिस तरह से पुत्र और पुत्री वाला मनु  का शिद्धान्त को लेकर बाबाजी ने भी ऐसी बात कही है ! 

* 6 , 8 , 10 , 12 , 14 को पुत्र की प्रप्ति  और 5 , 7 , 9 ,15 को पुत्री की  ?

 बाबाजी की स्त्रियों के बारे मे राय ?

* माता बच्चे की पैदाइश के बाद 6 दिन दूध पिलाय उसे ज्यादा नही  फिर दाई  ( धाय ) दूध पिलाय या अगर दाई न रख सकते तो गाय , बकरी इत्यादि पशु का दूध पिला सकती है।

*  वाह जी ज्ञानी बाबाजी वेदों ने यही शिक्षा दी है ?

* यहाँ पर मेडिकल साइंस कहती है कि कम से कम 6 माह तक शिशुओं को केवल माँ का ही दूध पिलाय और कुछ नही और महाशय बाहर की दूध पिलाने का मशवरा दे रहे है ? क़ुरान तो अल्हम्दुलिल्लाह 30 माह तक हुक्म देता है ।

* आखिरी 6 दिन दूध पिलाने की वजह के बारे में स्पस्टीकरण करते है कि स्त्रियों की सुदंरता खत्म हो जाती है , मूर्ख व्यक्ति मा बच्चों के दूध पिलाना गर्व की बात समझती है अल्हम्दुलिल्लाह हम और सब वही पीकर बड़े हुए है  हो सकता है दयानंद ने नही पिया उसके चलते ही पगला गया था , और ब्रह्चारी को स्त्रियों की सुदंरता का बड़ा ज्ञान है क्या वजह है  ?





* तो ये रहे मनु महाराज जी का ज्ञान और विचार और महर्षि दयानंद सरस्वती का मेडिकल साइंस का ज्ञान इस बारे में आप के क्या विचार है ........................... ?


धन्यवाद










































10 ...... jihad-e-mukadas-1








12......  jews-1.




13....  jews-2.




14....  jews-3-




15..... jews-4.




























































































































































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