Isai dharm ki manyata

असली इसाई कौन है ?

Isai dharm ki manyata
( Aqidah )




* इस लेख में  जानने की कोशिश करते है कि हज़रत ईसा कौन थे और आप ईसा की क्या मान्यता थीं  और ईसाई कोन है , ईसाईयो की  क्या मान्यता है और असली ईसाई कौन है  ये सब जानने का परत्न करेंगे इन्शाल्लाह  

* जैसे मैन पहले ही बात चुका हूँ , की मुसलमानो , ईसाई और यहूदी तीनो की मान्यता है , की वो इब्राहिम के दिन पर है 
(यानी हक़ पर है ) जो हमेशा से चलता  आ रहा है , आप इब्राहिम कौन थे , आपकी क्या मान्यता थी ? अल्हम्दुलिल्लाह मे विस्तापूर्वक बता चुका हूं , अगर वो लेख न पढे होतो ये रहे वो !


1 .......  नबी इब्राहिम  1

2....... नबी इब्राहिम  2 

3 .... नबी इब्राहिम 3


* जैसे समय - समय पर पाक  पालनहार ने अपने  रसूल और नबी  उसके साथ कई किताबें और सहीफ़ए नाजिल किये ( संदेश )
उसी प्रकार से आप ईसा अलेहीसल्लाम को किस कॉम के लिए नबुस ( भेजा ) फ़रमाया पहले ये जानने की कोशिश करते है ?





إِنْ هُوَ إِلَّا عَبْدٌ أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ وَجَعَلْنَٰهُ مَثَلًا لِّبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ


बल्कि (हक़ तो यह है कि) ये लोग झगड़ालू है ईसा तो बस हमारे एक बन्दे थे जिन पर हमने एहसान किया (नबी बनाया और मौजिज़े दिये) और उनको हमने बनी इसराईल के लिए
(अपनी कुदरत का) नमूना बनाया ।
( 43 : 59 )



* ये आयात से पता चला कि आप ईसा अलैहीसल्लाम को पाक पालनहार ने  बनी इस्राएल की तरफ नबी बना कर भेजा ।

* यहूदि  इस कदर तक नाफरमानी और गुस्ताखियों पर उतर आए थे और पालनहार का कई बार अज़ाब भी चख चुके थे  अपने गुनाहों के सबब यहूदी कौन है , और बनी इसराईल  ? यहाँ जाने इन्शाल्लाह पता चल जायेगा की यहूदि कौन हैं ?

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* यहूदी पालनहार को मोहताज समझने  लग गए थे । ( माजल्लाह )आज कल उनकी ही नस्ल की नाजायज औलाद भी कुछ ऐसा ही कहते नजर आते है । आत्मा , परमात्मा और प्रकुति के नाम पर वो ये नही कर सकता वो नही कर सकता फल फल ।

आत्मा , परमात्मा और प्रकुति का चक्र यहाँ देखे ?

* उस समय पाक पालनहार ने हज़रत ईसा अलैहीसल्लाम को बिना वालिद के पैदा कर के  अपनी कुदरत की निशानी जाहिर करके के उन लोगो और सारे मानव जाति को बताया कि वो सर्वशक्तिमान है और चीज पर कुदरत रखता है , जो मनुष्य की सोच और समझ जहा खत्म हो वहाँ से उसकी  कुदरत की निशानी चलो होती है ।


* अपनी अक्ल से उसकी पाक जात को समझना मुमकिन नही,क्योंकि जो चीज़ अक्ल के जरिये से समझ मे आति है अक्ल उसको अपने मे घेर ले लेती है, अल्लाह (एक पालनहार) की शान यह है कि कोई चीज़ उसकी जात को घेर नही सकती।उसी तरह उसके गुण (सिफ़त) भी है।


  पालनहार की  स्वयं  जात कदीम (अनादि),अजलि(सक्षम)औऱ अबदी  ( अमर) उसी तरह उसके गुण(सीफत) भी । अनादि, सक्षम और अमर है ।

* अल्लाह तआला की गूण न ऐन है न गैर ऐन  यानी अल्लाह के गुण उसकी जात नही न गुण किसी तरह उसकी जात से अलग हो सके क्योंकि वह गूण ऐसे है , जो कि पालनहार की जात को  चाहती है , और उसकी जात के लिए जरूरी है ।

* इसीलिए उसकी और एक बात  यह भी ध्यान में रखे कि पालनहार  के कई गुण है , और अलग है , हर गुण का मतलब भी अलग अलग है । 

उदहारण ० अल -राजिक = खिलाने वाला 


अल -हय्यूल कय्यूम = हमेशा से जिंदा और दूसरों को जिंदा  रखने वाला ( न उसे मौत आये न ऊघ , और हमेशा से कायम ) सुर्ष्टि रचेता , हर चीजो का चलाने वाला इत्यादि उसे गुण है ।


ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वह) ज़िन्दा है (और) सारे जहान का संभालने ( पालने ) वाला है उसको न ऊँघ आती है न नींद जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में है (गरज़ सब कुछ) उसी का है कौन ऐसा है जो बग़ैर उसकी इजाज़त के उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे जो कुछ उनके सामने मौजूद है (वह) और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका) है 
(खुदा सबको) जानता है और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर भी अहाता नहीं कर सकते मगर वह जिसे जितना चाहे (सिखा दे) उसकी कुर्सी ( इल्म ) सब आसमानॊं और ज़मीनों को घेरे हुये है और उन दोनों (आसमान व ज़मीन) की निगेहदाश्त उसपर कुछ भी मुश्किल नहीं और वह आलीशान बुजुर्ग़ मरतबा है ।( 2 : 255 )




 * अर्थात : - (ऐ रसूल) तुम (उनसे) कह दो कि (तुम को एख़तियार है) ख्वाह उसे अल्लाह (कहकर) पुकारो या रहमान कह कर पुकारो (ग़रज़) जिस नाम को भी पुकारो उसके तो सब नाम अच्छे (से अच्छे) हैं और (ऐ रसूल) न तो अपनी नमाज़ बहुत ऊँचा  कर पढ़ो न और न बिल्कुल धीरे  से बल्कि उसके दरमियान एक औसत तरीका एख्तेयार कर लो । ( 17 : 110 )

* सब अच्छे नाम उसी के है ।
अल्लाह
 अल रहमान
अल रहीम
अल करीम
अल मालिक 
अल कुदुस
अल राजिक
अल गफूर
अल बारीक
इत्यादि
ईश्वर
पालनहार
रब
और जो जिस भाषा मे  बोलता है सब अच्छे नाम उसी के है ।

* हयात , कुदरत , सुन्ना , देखना , कलाम , इल्म और इरादा  उसकी जात के गूण है , मगर , आंख , नाक , और जुबान से उसका सुन्ना , देखना  और कलाम करना नही क्यों कि यह सब जिस्म का काम है , और पालनहार जिस्म से पाक है , अल्लाह हर धीमी से धीमी आवाज़ को सुनता है , ऐसी सूक्षम से सूक्षम ( बारीक से बारीक ) उसकी कुदरत से पोशीदा ( छुपी ) नही जो एक उच्च कोटी की दूरबीन भी नही देख सकती वो चीज भी वो जनता और सुनता , देखता है । अगर एक काला जंगल हो और उसमें  एक काली गुफा हो और काली गुफा से एक काली चींटी भी हो और उसे न्हने पैरो की आहट को सुनता और जनता , देखता है । ( बेशक़ )
( सुब्हान अल्लाह) और सब उसके गूण है , उसी तरह से उसका  कलाम भी कदीम (अनादि ) है । उसका कलाम क़ुरान इत्यादि है । अल्हम्दुलिल्लाह ।

  * मुझे समझ नही आता कि  इस बात पर इंशानो को
   ताज्जुब ( आश्चर्य ) करता है , की ईसा  अलैहीसल्लाम को बिना बाप के पैदा कर दिया , मेरे प्यारे जब तो खुद भी कुछ न था , एक गंदे पानी से तुझे पैदा कर दिया तो उसके के लिए कोई काम मुश्किल है ,भला  !


* पाक पालनहार ने क़ुरआन मजीद फुरकान ए हामिद के कई बार फ़रमाया की ईसा की मिसाल आदम से है , आदम को बिना मा - बाप के पैदा किया और ईसा मसीह को बिना बाप के ।

إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ ٱللَّهِ كَمَثَلِ ءَادَمَ خَلَقَهُۥ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया  ( 3 : 59 )

 *  वैसे ही हज़रत ईसा को भी पैदा की जैसे आदम को मोजेजा के तौर पर बिना वालिद के  क़ुदरत की पाबंदी तो मानव के लिए है ,नाकि उस पाक पालनहार के लिए बल्कि क़ुदरत खुद उसकी मोहताज है  और हर चीज के  पीछे हिकमत है और  वो हर चीज पर क़ुदरत रखता है ।


مَا كَانَ لِلَّهِ أَن يَتَّخِذَ مِن وَلَدٍ سُبْحَٰنَهُۥٓ إِذَا قَضَىٰٓ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

खुदा कि लिए ये किसी तरह सज़ावार नहीं कि वह (किसी को) बेटा बनाए वह पाक व पकीज़ा है जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस उसको कह देता है कि ''हो जा'' तो वह हो जाता है । ( 19 : 35 )

أَوَلَمْ يَرَ ٱلْإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقْنَٰهُ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ

क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है । ( 36 : 77 )


أَوَلَيْسَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يَخْلُقَ مِثْلَهُم بَلَىٰ وَهُوَ ٱلْخَلَّٰقُ ٱلْعَلِيمُ

(भला) जिस (खुदा) ने सारे आसमान और ज़मीन पैदा किए क्या वह इस पर क़ाबू नहीं रखता कि उनके मिस्ल (दोबारा) पैदा कर दे हाँ (ज़रूर क़ाबू रखता है) और वह तो पैदा करने वाला वाक़िफ़कार है । ( 36 : 81 )

إِنَّمَآ أَمْرُهُۥٓ إِذَآ أَرَادَ شَيْـًٔا أَن يَقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

उसकी शान तो ये है कि जब किसी चीज़ को (पैदा करना) चाहता है तो वह कह देता है कि ''हो जा'' तो (फौरन) हो जाती है ( 36 : 82 )

فَسُبْحَٰنَ ٱلَّذِى بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ كُلِّ شَىْءٍ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ

तो वह ख़ुद (हर नफ्स से) पाक साफ़ है जिसके क़ब्ज़े कुदरत में हर चीज़ की हिकमत है और तुम लोग उसी की तरफ लौट कर जाओगे ।
 ( 36 : 83 )

हज़रत मरियम सलामुल्लाह अलैहा की आमद आमद वाकिया ।


إِذْ قَالَتِ ٱمْرَأَتُ عِمْرَٰنَ رَبِّ إِنِّى نَذَرْتُ لَكَ مَا فِى بَطْنِى مُحَرَّرًا فَتَقَبَّلْ مِنِّىٓ إِنَّكَ أَنتَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ

(ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब इमरान की बीवी ने (ख़ुदा से) अर्ज़ की कि ऐ मेरे पालने वाले मेरे पेट में जो बच्चा है (उसको मैं दुनिया के काम से) आज़ाद करके तेरी नज़्र करती हूं तू मेरी तरफ़ से (ये नज़्र कुबूल फ़रमा तू बेशक बड़ा सुनने वाला और जानने वाला है ।
( 3 : 35 )


فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ إِنِّى وَضَعْتُهَآ أُنثَىٰ وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْ وَلَيْسَ ٱلذَّكَرُ كَٱلْأُنثَىٰ وَإِنِّى سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَإِنِّىٓ أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ ٱلشَّيْطَٰنِ ٱلرَّجِيمِ

फिर जब वह बेटी जन चुकी तो (हैरत से) कहने लगी ऐ मेरे परवरदिगार (मैं क्या करूं) मैं तो ये लड़की जनी हूँ और लड़का लड़की के ऐसा (गया गुज़रा) नहीं होता हालॉकि उसे कहने की ज़रूरत क्या थी जो वे जनी थी ख़ुदा उस (की शान व मरतबा) से खूब वाक़िफ़ था और मैंने उसका नाम मरियम रखा है और मैं उसको और उसकी औलाद को शैतान मरदूद (के फ़रेब) से तेरी पनाह में देती हूं  ।  ( 3 : 36 )

 * आप मरियम बचपन से ही इबादत गुजार थी और आपकी अम्मी ने आपको अल्लाह की राह से वफत कर दिया था , और हज़रत जकरिया अलैहिस्सलाम के पास छोड़ कर चली आई  आप जकरिया भी अल्लाह के नबी थे  और हज़रत मरियल के खालू  से लगते थे आप को हज़रत जकरिया ने बैतूल मुक़दस ( मस्जिद ए अक़्सा ) में जगह इबादत के लिए देदी और वहाँ पर्दा कर दिया कि कोई वहाँ पर आ जा न सके और ताले में कुंजी लगा कर चले आते थे  ।


ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يُلْقُونَ أَقْلَٰمَهُمْ أَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يَخْتَصِمُونَ


(ऐ रसूल) ये ख़बर गैब की ख़बरों में से है जो हम तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजते हैं (ऐ रसूल) तुम तो उन सरपरस्ताने मरियम के पास मौजूद न थे जब वह लोग अपना अपना क़लम दरिया में बतौर क़ुरआ के डाल रहे थे (देखें) कौन मरियम का कफ़ील बनता है और न तुम उस वक्त उनके पास मौजूद थे जब वह लोग आपस में बात कर  रहे थे ।  ( मतलब हज़रत जकरिया को हज़रत मरियम की परवरिश आता हुई )( 3 : 44 )

* आप मरियम रात की इबादत गुजार और दिन में रोजे रखने वाली थी  और आप जकरिया वहाँ पर सहरी और इफ्तार का 
इंतजाम कर दिया करते थे ।

* एक दफा कुछ जरूरी काम की वजह से इफ्तार देना भूल गए क्योंकि उसके पीछे अल्लाह की हिकमत थी जब आप नबी को याद आया तो फिरौन ही वहाँ चले आये इफ्तार देने , तो वहाँ देखा कि बे मौसम फल और ताजी खजूरे है , जो कि कुछ इस तरह से है ।


فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُولٍ حَسَنٍ وَأَنۢبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنًا وَكَفَّلَهَا زَكَرِيَّا كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهَا زَكَرِيَّا ٱلْمِحْرَابَ وَجَدَ عِندَهَا رِزْقًا قَالَ يَٰمَرْيَمُ أَنَّىٰ لَكِ هَٰذَا قَالَتْ هُوَ مِنْ عِندِ ٱللَّهِ إِنَّ ٱللَّهَ يَرْزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ

तो उसके परवरदिगार ने (उनकी नज़्र) मरियम को ख़ुशी से कुबूल फ़रमाया और उसकी नशो व नुमा (परवरिश) अच्छी तरह की और ज़करिया को उनका कफ़ील बनाया जब किसी वक्त ज़क़रिया उनके पास (उनके) इबादत के हुजरे में जाते तो मरियम के पास कुछ न कुछ खाने को मौजूद पाते तो पूंछते कि ऐ मरियम ये (खाना) तुम्हारे पास कहॉ से आया है तो मरियम ये कह देती थी कि यह खुदा के यहॉ से (आया) है बेशक ख़ुदा जिसको चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है ।
( 3 : 37 )


* आप जकरिया  को कोई औलाद न थी  और आप काफी बुजुर्ग हो गए थे , आपको ओलाद की  बडी चाह थी  और  खुदा से दुआ किया करते थे कि औलाद मिल जाये जो मेरा काम संभाले यानी नबुव्वत का वारिस बने 
आप ने मन ही मन मे सोच की जो बे मौसम फल दे सकता है वो क्यों कर मुझे बूढ़ा पे में औलाद नही दे सकता बेशक वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है

هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُۥ قَالَ رَبِّ هَبْ لِى مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً إِنَّكَ سَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ




(ये माजरा देखते ही) उसी वक्त ज़करिया ने अपने परवरदिगार से दुआ कि और अर्ज क़ी ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (भी) अपनी बारगाह से पाकीज़ा औलाद अता फ़रमा बेशक तू ही दुआ का सुनने वाला है ।  ( 3 : 38 )


और जो दुआ मांगी वो इस तरह से है ?


ذِكْرُ رَحْمَتِ رَبِّكَ عَبْدَهُۥ زَكَرِيَّآ

ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी का ज़िक्र है जो (उसने) अपने ख़ास बन्दे ज़करिया के साथ की थी  ।  ( 19 : 2 )


إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُۥ نِدَآءً خَفِيًّا

कि जब ज़करिया ने अपने परवरदिगार को धीमी आवाज़ से पुकारा । ( 19 : 3 )


قَالَ رَبِّ إِنِّى وَهَنَ ٱلْعَظْمُ مِنِّى وَٱشْتَعَلَ ٱلرَّأْسُ شَيْبًا وَلَمْ أَكُنۢ بِدُعَآئِكَ رَبِّ شَقِيًّا

(और) अर्ज़ की ऐ मेरे पालने वाले मेरी हड्डियां कमज़ोर हो गई और सर है कि बुढ़ापे की (आग से) भड़क उठा (सेफद हो गया) है और ऐ मेरे पालने वाले मैं तेरी बारगाह में दुआ कर के कभी महरूम नहीं रहा हूँ । ( 19 : 4 )


وَإِنِّى خِفْتُ ٱلْمَوَٰلِىَ مِن وَرَآءِى وَكَانَتِ ٱمْرَأَتِى عَاقِرًا فَهَبْ لِى مِن لَّدُنكَ وَلِيًّا

और मैं अपने (वफात के ) बाद अपने वारिसों से सहम जाता हूँ (कि मुबादा दीन को बरबाद करें) और मेरी बीबी उम्मे कुलसूम बिनते इमरान बांझ
 ( अब बूढी हो चुकी है कि बच्चे की उमीद रखना दुशवार है ) है पस तू मुझको अपनी बारगाह से एक जाँनशीन फरज़न्द अता फ़रमा । ( 19 : 5 )


يَرِثُنِى وَيَرِثُ مِنْ ءَالِ يَعْقُوبَ وَٱجْعَلْهُ رَبِّ رَضِيًّا


जो मेरी और याकूब की नस्ल की मीरास का मालिक हो ऐ मेरे परवरदिगार और उसको अपना पसन्दीदा बन्दा बना  । ( 19 : 6 )

 * उसी तरह से कुछ इसमे भी
 ( 3 : 38 , 39 ,40 , 41 ) है ।


* कहते है , की सबर का फल मीठा होता है पाक पालनहार पर  ईमान रखने वालो पर अल्लाह महेर बान होता है और अल्लाह ने हज़रत जकारिया की दुआ क़बूल फरमाई और हज़रत यहया की खुश खबरी दी जो , काफी नेक और अल्लाह के पसिन्दा नबी थे और काफी खोफ रखते थे , जो की इन्शाल्लाह आगे बताएंगे , और हज़रत यहया हज़रत ईसा के खाला जात भाई भी लगते थे ।


हज़रत जकरिया की दुआ क़बूल और हज़रत यहया की आमद की खुशीखबरी !



يَٰزَكَرِيَّآ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَٰمٍ ٱسْمُهُۥ يَحْيَىٰ لَمْ نَجْعَل لَّهُۥ مِن قَبْلُ سَمِيًّا

खुदा ने फरमाया हम तुमको एक लड़के की खुशख़बरी देते हैं जिसका नाम यहया होगा और हमने उससे पहले किसी को उसका हमनाम नहीं पैदा किया । ( 19 : 7 )


قَالَ رَبِّ ٱجْعَل لِّىٓ ءَايَةً قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَٰثَ لَيَالٍ سَوِيًّا

ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर कर दें हुक्म हुआ तुम्हारी पहचान ये है कि तुम तीन रात (दिन) बराबर लोगों से बात नहीं कर सकोगे । ( 19 : 10 )


فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِۦ مِنَ ٱلْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰٓ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا۟ بُكْرَةً وَعَشِيًّا


फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो । 
( 19 : 11 )


يَٰيَحْيَىٰ خُذِ ٱلْكِتَٰبَ بِقُوَّةٍ وَءَاتَيْنَٰهُ ٱلْحُكْمَ صَبِيًّا

(ग़रज़ यहया पैदा हुए और हमने उनसे कहा) ऐ यहया किताब (तौरेत) मज़बूती के साथ लो
( 19 : 12 )


وَحَنَانًا مِّن لَّدُنَّا وَزَكَوٰةً وَكَانَ تَقِيًّا

और हमने उन्हें बचपन ही में अपनी बारगाह से नुबूवत और रहमदिली और पाक़ीज़गी अता फरमाई ! ( 19 : 13 )


وَبَرًّۢا بِوَٰلِدَيْهِ وَلَمْ يَكُن جَبَّارًا عَصِيًّا

और वह (ख़ुद भी) परहेज़गार और अपने माँ बाप के हक़ में सआदतमन्द थे और सरकश नाफरमान न थे ! ( 19 : 14 )


وَسَلَٰمٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَي

और (हमारी तरफ से) उन पर (बराबर) सलाम है जिस दिन पैदा हुए और जिस दिन मरेंगे और जिस दिन (दोबारा)  । ( 19 : 15 )

* आप यहया अलैहिस्सलाम  बचपन से ही ख़ौफ़ ए खुदा रखते थे , अल्लाह की पाकी दिन रात पढता करते थे , जिस वक्त बच्चों की खेलने कूदने की उम्र होती थी , उस वक़्त आप तन्हा गारो में जाकर अल्लाह की तस्बीह किया करते और ख़ौफ़ ए खुदा में आंसू बहाया करते ।

فَٱسْتَجَبْنَا لَهُۥ وَوَهَبْنَا لَهُۥ يَحْيَىٰ وَأَصْلَحْنَا لَهُۥ زَوْجَهُۥٓ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ يُسَٰرِعُونَ فِى ٱلْخَيْرَٰتِ وَيَدْعُونَنَا رَغَبًا وَرَهَبًا وَكَانُوا۟ لَنَا خَٰشِعِينَ



तो हमने उनकी दुआ सुन ली और उन्हें यहया सा बेटा अता किया और हमने उनके लिए उनकी बीबी को अच्छी बता दिया इसमें शक नहीं कि ये सब नेक कामों में जल्दी करते थे और हमको बड़ी रग़बत और ख़ौफ के साथ पुकारा करते थे और हमारे आगे गिड़गिड़ाया करते थे ।
( 21 : 90 )


* आप यहया के समय पर एक बादशाह था  उसने आप से  एक मसला पूछा कि मै आपने छोटे भाई की बेटी से निकाह करना चाहता हु आप  यहया की क्या राय है इस बारे मे आप यहया ने फरमाया ये निकाह हराम है क्योंकि तू उसका रिश्ते में चाचा और वो तेरे भाई की बेटी जो कि चाचा भी बाप की मिसाल है , ये बात सुनकर बादशाह भटक उठा , और वो उसके भाई की लड़की बोली जब तक यहया हमे है , जब तक हमारा निकाह मुश्किल है , इसलिए तू यहया को मर दे ( माजल्लाह ) तो उसे म्रदु यहुदी ने हज़रत यहया और हज़रत जकारिया को शहीद कर दिया और  ये यहूदी कई नबी को कत्ल किया करते  थे और किया है  , यहूदियों पर बेशुमार लानत उनके कुफ्र के सबब ।

आप मरियम को अल्लाह ने चुन लिया था अपनी निशानी जाहिर करने के लिए  !


* कई हदीसो में आता है कि  जिसमे से
 एक ?


सही बुखारी


सही बुखारी

अब देखते है हज़रत मरियम का वाकिया  ?

وَإِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصْطَفَىٰكِ وَطَهَّرَكِ وَٱصْطَفَىٰكِ عَلَىٰ نِسَآءِ ٱلْعَٰلَمِينَ

और वह वाक़िया भी याद करो जब फ़रिश्तों ने मरियम से कहा, ऐ मरियम तुमको ख़ुदा ने बरगुज़ीदा किया और (तमाम) गुनाहों और बुराइयों से पाक साफ़ रखा और सारे दुनिया जहॉन की औरतों में से तुमको मुन्तख़िब किया है । 
( 3 : 42 )



يَٰمَرْيَمُ ٱقْنُتِى لِرَبِّكِ وَٱسْجُدِى وَٱرْكَعِى مَعَ ٱلرَّٰكِعِينَ

(तो) ऐ मरियम इसके शुक्र से मैं अपने परवरदिगार की फ़रमाबदारी करूं सजदा और रूकूउ करने वालों के साथ रूकूउ करती रहूं 
 ( यानी नमाज पढ़ती रहो ।)
( 3 : 43 )


अब देखते है हज़रत मरियम से हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम की बात चीत और हज़रत ईसा की आमद की खुश खबरी ?


إِذْ قَالَتِ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرْيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٍ مِّنْهُ ٱسْمُهُ ٱلْمَسِيحُ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ وَجِيهًا فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَمِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ

(वह वाक़िया भी याद करो) जब फ़रिश्तों ने (मरियम) से कहा ऐ मरियम ख़ुदा तुमको सिर्फ़ अपने हुक्म से एक लड़के के पैदा होने की खुशख़बरी देता है जिसका नाम ईसा मसीह इब्ने मरियम होगा (और) दुनिया और आखेरत (दोनों) में बाइज्ज़त (आबरू) और ख़ुदा के मुक़र्रब बन्दों में होगा । ( 3 : 45 )



قَالَتْ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِى وَلَدٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِى بَشَرٌ قَالَ كَذَٰلِكِ ٱللَّهُ يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ إِذَا قَضَىٰٓ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ


(ये सुनकर मरियम ताज्जुब से) कहने लगी परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर होगा हालॉकि मुझे किसी मर्द ने छुआ तक नहीं इरशाद हुआ इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है जब वह किसी काम का करना ठान लेता है तो बस कह देता है 'हो जा' तो वह हो जाता है । ( 3 : 47 )



وَيُعَلِّمُهُ ٱلْكِتَٰبَ وَٱلْحِكْمَةَ وَٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ


और (ऐ मरयिम) ख़ुदा उसको (तमाम) किताबे आसमानी और दानाई की बातें और (ख़ासकर) तौरेत व इन्जील सिखा देगा ।
( 3 : 48 )



और एक जगह पर कुछ इस तरह से ? 


وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَٰبِ مَرْيَمَ إِذِ ٱنتَبَذَتْ مِنْ أَهْلِهَا مَكَانًا شَرْقِيًّ

और (ऐ रसूल) कुरान में मरियम का भी तज़किरा करो कि जब वह अपने लोगों से अलग होकर पूरब की तरफ़ वाले मकान में (अपनी जरूरत के लिए वहाँ पर्दा कर दिया)जा बैठें ।  ( 19 : 16 )


فَٱتَّخَذَتْ مِن دُونِهِمْ حِجَابًا فَأَرْسَلْنَآ إِلَيْهَا رُوحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّ

फिर उसने उन लोगों से परदा कर लिया तो हमने अपनी रूह (जिबरील) को उन के पास भेजा तो वह अच्छे ख़ासे आदमी की सूरत बनकर उनके सामने आ खड़ा हुआ ।
( 19 : 17 )



قَالَتْ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِٱلرَّحْمَٰنِ مِنكَ إِن كُنتَ تَقِيًّا

(वह उसको देखकर घबराई और) कहने लगी अगर तू परहेज़गार है तो मैं तुझ से खुदा की पनाह माँगती हूँ । (  19 : 18 )
قَالَ إِنَّمَآ أَنَا۠ رَسُولُ رَبِّكِ لِأَهَبَ لَكِ غُلَٰمًا زَكِيًّا

(मेरे पास से हट जा) जिबरील ने कहा मैं तो साफ़ तुम्हारे परवरदिगार का पैग़मबर (फ़रिश्ता) हूँ ताकि तुमको पाक व पाकीज़ा लड़का अता करूँ । ( 19 : 19 )

قَالَتْ أَنَّىٰ يَكُونُ لِى غُلَٰمٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِى بَشَرٌ وَلَمْ أَكُ بَغِيًّا

मरियम ने कहा मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालाँकि किसी मर्द ने मुझे छुआ तक नहीं है औ मैं न बदकार हूँ  ।
 ( मैं कभी गलत काम भी नही किया है  )
 ( 19 : 20 )


قَالَ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ هُوَ عَلَىَّ هَيِّنٌ وَلِنَجْعَلَهُۥٓ ءَايَةً لِّلنَّاسِ وَرَحْمَةً مِّنَّا وَكَانَ أَمْرًا مَّقْضِيًّا

जिबरील ने कहा तुमने कहा ठीक (मगर) तुम्हारे परवरदिगार ने फ़रमाया है कि ये बात (बे बाप के लड़का पैदा करना) मुझ पर आसान है ताकि इसको (पैदा करके) लोगों के वास्ते (अपनी क़ुदरत की) निशानी क़रार दें और अपनी ख़ास रहमत का ज़रिया बनायें।
 ( 19 : 21 )

फिर हज़रत मरियम हामिल हो गई वहाँ से दूर  चली गई ?


فَحَمَلَتْهُ فَٱنتَبَذَتْ بِهِۦ مَكَانًا قَصِيًّا

और ये बात फैसला शुदा है ग़रज़ लड़के के साथ वह आप ही आप हामेला हो गई फिर इसकी वजह से लोगों से अलग एक दूर के मकान में चली गई । ( 19 : 22 )

فَأَجَآءَهَا ٱلْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ ٱلنَّخْلَةِ قَالَتْ يَٰلَيْتَنِى مِتُّ قَبْلَ هَٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا

फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह) उन्हें एक खजूर के (सूखे) दरख्त की जड़ में ले आया और (बेकसी में शर्म से) कहने लगीं काश मैं इससे पहले मर जाती और (न पैद होकर) 
( 19 : 23 )


فَنَادَىٰهَا مِن تَحْتِهَآ أَلَّا تَحْزَنِى قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا

बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम गम न खाओ और नीचे देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है । ( 19 : 24 )

وَهُزِّىٓ إِلَيْكِ بِجِذْعِ ٱلنَّخْلَةِ تُسَٰقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا

और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ । 

( 19 :25 )


فَكُلِى وَٱشْرَبِى وَقَرِّى عَيْنًا فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ ٱلْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِىٓ إِنِّى نَذَرْتُ لِلرَّحْمَٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ ٱلْيَوْمَ إِنسِيًّ


और (चश्मे का पानी) पियो और (लड़के से) अपनी ऑंख ठन्डी करो फिर अगर तुम किसी आदमी को देखो (और वह तुमसे कुछ पूछे) तो तुम इशारे से कह देना कि मैंने खुदा के वास्ते रोजे क़ी नज़र की थी तो मैं आज हरगिज़ किसी से बात नहीं कर सकती । 

( 19 : 26 )

* और जब  आप मरियम हज़रत ईसा की पैदाइश के  बाद  लोगो मे वापस आई तो लोगो आप पर ताना काशी करना शुरू कर दिया , तोहमत बांधने लगे , पर पाक पालनहार ने आप की पाक का बयान खुद किया है ?



تِلْكَ ٱلرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ مِّنْهُم مَّن كَلَّمَ ٱللَّهُ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَٰتٍ وَءَاتَيْنَا عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ٱلْبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدْنَٰهُ بِرُوحِ ٱلْقُدُسِ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقْتَتَلَ ٱلَّذِينَ مِنۢ بَعْدِهِم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَٰتُ وَلَٰكِنِ ٱخْتَلَفُوا۟ فَمِنْهُم مَّنْ ءَامَنَ وَمِنْهُم مَّن كَفَرَ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقْتَتَلُوا۟ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ


यह सब रसूल (जो हमने भेजे) उनमें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जिनसे ख़ुद ख़ुदा ने बात की उनमें से बाज़ के (और तरह पर) दर्जे बुलन्द किये और मरियम के बेटे ईसा को (कैसे कैसे रौशन मौजिज़े अता किये) और रूहुलकुदस (जिबरईल) के ज़रिये से उनकी मदद की और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग इन (पैग़म्बरों) के बाद हुये वह अपने पास रौशन मौजिज़े आ चुकने पर आपस में न लड़ मरते मगर उनमें फूट पड़ गई पस उनमें से बाज़ तो ईमान लाये और बाज़ काफ़िर हो गये और अगर ख़ुदा चाहता तो यह लोग आपस में लड़ते मगर ख़ुदा वही करता है जो चाहता है । ( 2 : 253 )

إِنَّ ٱللَّهَ ٱصْطَفَىٰٓ ءَادَمَ وَنُوحًا وَءَالَ إِبْرَٰهِيمَ وَءَالَ عِمْرَٰنَ عَلَى ٱلْعَٰلَمِينَ

बेशक ख़ुदा ने आदम और नूह और ख़ानदाने इबराहीम और खानदाने इमरान को सारे जहान से बरगुज़ीदा किया है । ( 3 : 33 )


ये है कि मरियम के बेटे ईसा का सच्चा (सच्चा) क़िस्सा जिसमें ये लोग (ख्वाहमख्वाह) शक किया करते हैं ।
 ( 19 : 34 )

* अल्लाह ने आप ईसा के बे बाप के  पैदा किया है ,और  हज़रत मरियम सब बेबुनियाद तोहमतों से बिल्कुल पाक और साफ है 
( बेशक ) ।


فَأَتَتْ بِهِۦ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُۥ قَالُوا۟ يَٰمَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْـًٔا فَرِيًّا

फिर मरियम उस लड़के को अपनी गोद में लिए हुए अपनी क़ौम के पास आयीं वह लोग देखकर कहने लगे ऐ मरियम तुमने तो यक़ीनन बहुत बुरा काम किया । ( 19 : 27 )


يَٰٓأُخْتَ هَٰرُونَ مَا كَانَ أَبُوكِ ٱمْرَأَ سَوْءٍ وَمَا كَانَتْ أُمُّكِ بَغِيًّا

ऐ हारून की बहन न तो तेरा बाप ही बुरा आदमी था और न तो तेरी माँ ही बदकार थी  । 
(ये तूने क्या किया) । ( 19 : 28 )

आप ने कहा इसी से पूछ लो कि ये कहा से आया है और  तौहिद की गवाही  ?
 ( सुब्हान अल्लाह ) 


فَأَشَارَتْ إِلَيْهِ قَالُوا۟ كَيْفَ نُكَلِّمُ مَن كَانَ فِى ٱلْمَهْدِ صَبِيًّا

तो मरियम ने उस लड़के की तरफ इशारा किया

 ( कि जो कुछ पूछना है इससे पूछ लो) और वह लोग बोले भला हम गोद के बच्चे से क्योंकर बात करें । ( 19 : 29 )


قَالَ إِنِّى عَبْدُ ٱللَّهِ ءَاتَىٰنِىَ ٱلْكِتَٰبَ وَجَعَلَنِى نَبِيًّا


(इस पर वह बच्चा कुदरते खुदा से) बोल उठा कि मैं बेशक खुदा का बन्दा हूँ मुझ को उसी ने किताब (इन्जील) अता फरमाई है और मुझ को नबी बनाया । 

( 19 : 30 )


وَجَعَلَنِى مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَٰنِى بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱلزَّكَوٰةِ مَا دُمْتُ حَيًّا


और मै (चाहे) कहीं रहूँ मुझ को मुबारक बनाया और मुझ को जब तक ज़िन्दा रहूँ नमाज़ पढ़ने ज़कात देने की ताकीद की है और मुझ को अपनी वालेदा का फ़रमाबरदार बनाया । ( 19 : 31 )

وَبَرًّۢا بِوَٰلِدَتِى وَلَمْ يَجْعَلْنِى جَبَّارًا شَقِيًّ

और ( अल्हम्दुलिल्लाह कि) मुझको सरकश नाफरमान नहीं बनाया । ( 19 : 32 )

وَٱلسَّلَٰمُ عَلَىَّ يَوْمَ وُلِدتُّ وَيَوْمَ أَمُوتُ وَيَوْمَ أُبْعَثُ حَيًّا


और (खुदा की तरफ़ से) जिस दिन मैं पैदा हुआ हूँ और जिस दिन मरूँगा मुझ पर सलाम है और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा कर खड़ा किया जाऊँगा । ( 19 : 33 )

وَيُكَلِّمُ ٱلنَّاسَ فِى ٱلْمَهْدِ وَكَهْلًا وَمِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ

और (बचपन में) जब झूले में लेटा होगा और बड़ी उम्र का होकर (दोनों हालतों में यकसॉ) लोगों से बाते करेगा और नेको कारों में से होगा । ( 3 : 46 )

सुब्हानअल्लाह , माशाल्लाह , अल्लाहु अकबर 



































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