JANG E AZADI AUR MUSALMAN

जंगे - ए - आज़ादी



*  सभी  देश प्रमियों  के  लिए 
अस्सलामु अलैकुम ।

*  क्या सच्च में मुसलमान देशद्रोही है 


* चलाइये देखते है  ।

* हमारा  देश  15 अगस्त 1947 में  अंग्रेजों से आज़ाद हुआ  । (अल्हम्दुलिल्लाह )

* क्या  सच्च में जंगे ए आज़ादी में मुसलमानो की कोई भागेदारी  नही थी ?

* उसे से पहले इस्लाम  शिक्षा और  
अल्लाह के प्यारे रसूल और  इन्शानियत की जान नबी करीम 
 (सल्ललाहु अलैही वसल्लम  )
का कॉल मुबारक 



BOOK 




* अल - मस्नून -फि - मरीफिल - अल -हदीस - अल - मौदू - इमाम सुयूती  91/1




* हकीम = 4053




* मुसलिम शरीफ भाग 3 हदीस 3342 , 3480 इत्यादि ।




* का निचोड़ है कि आप ने फरमाया  ,




वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा है ।



 * ये शिक्षा इस्लाम देता है ।



* और इस बात में कोई शक नही की मुसलमान यहाँ का मूलनिवासी है ।




* पर ये भी हकीकत है कि हमारे  बुजुर्गों ने इस्लाम की शिक्षा को अपनाया है ।

* जो कि आरंभ काल से चला आ रहा था  ,
एक  पालनहार की उपासना करना जो कि हक़ है ।  इस्लाम का सच्च 1400 साल पुराना या कब से  यहा देखे @

* जो कि उनके बाप - दादा ने हक़ को  छोड़ कर मानव निर्मित चीजो की पूजा अर्चना चालू करदी थी और घोर अंधकार में चले गए थे ।

* तो इस्लाम ने फिर से उन्हें  एक जुट कीया यानी एक पालनहार की उपासना , स्तृती करने की शिक्षा  जो कि  हमेशा से चलता आ रहा था ।

* कही इस्लामिक  उलमा का कहना है , की और उसके प्रमाण भी  मोजूद है , एक आदम अलेहसल्लम हिन्द की सरजमी पर ही आये थे ।  और कई सौ नबी इस जमीन में आराम।फरमा रहे है ।

* आदम  मट्टी की पैदाइश या कुछ और

* बरहाल ये हमारी  मान्यता है , ये बात मन्ना या ना मन्ना आपका इख्तियार है ।




* अब देखते है , जंग -ए -आज़ादी में  
मुसलमानो का किरदार ।


* हज़रत टीपू सुल्तान  (रहमतुल्लाह अलहे )
का नाम अपने सुनाया  या पढ़ा होगा , और उनसे पहले  भी बहुत से है , परन्तु जिनका को जनते है उनके बारे में चर्चा करते है ।

शेरे ए हिन्द  the great

टीपू सुल्तान






* सन 1792 - 99 ईसवी मैसूर के सुल्तान 
हज़रत टीपू सुल्तान 




* अंग्रेजो के विरुद्ध में लोहे की बनी रॉकेट मिसाइल का आविष्कार करके प्रयोग किया जिसके चलते ब्रटिश आर्मी में घबराहट का माहोल फैल गया  था ,

फिर उसके बाद अंग्रेजों ने तोप का महत्व जाना  और उसकी तकनीक को विकसित कर के पूरे विश्व मे फैला दिया ।


* और कई जंगो में अंग्रेजों को शिकस्त दी 
परंतु कहते है ना  ? बहार के दुश्मनो जितना नुकसान नही उससे कई ज्यादा घर के छुपे शत्रुओ से होता है ।

* ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ था  जिसके वजह से आपको शहादत का जाम पीना पढ़ा ।

* और मोमिन उस चीज का  नाम है जो मौत से भागता नही मौत को गले लगता है ,और अपने शहादत का जाम नोश फ़रमाया और वतन की मोहब्बत में  अपनी जान देदी और  वतन से मोहब्बत  का नमूना पेश किया है , की एक मोमिन वतन के लिए क्या कर सकता है  ।


* और दुनिया को रॉकेट ( तोप ) देने वाला मुसलमान  देश का बेटा , देश की जान बान  आन , शान हज़रत टीपू सुल्तानथे । आज कल इनके बारे में भी टिप्पणी कर के देश द्रोही का सर्टिफिकेट बटा जा रहा है । 

जयन्ती पर भी एतराज अफसोस कि बात है 
शर्म आनी चाहिए  जिसने अपने देश के लिए जान देदे वह लोगो देशद्रोही ।

* अब आगे ........

* सैय्यद  शाहनवाज़ अहमद  क़ादरी साहब की मसूर पुस्तक 



* में लिखते है , मुसलमानों ने देश की आजादी में  क्या  किरदार निभाया था ?
जिसमे से कुछ ।

* बाकी ये रही वह पुस्तक ।




* 1857 की जंग में मुसलमानों  ने  जंग  की थी , उस जंग में  एक लाख मुसलमान मारे गए थे 



* कानपुर से फ़ुर्रबाद में बीज सड़क के किनारे जितने  पेड़ थे उन पर  आलिमो को  फांसी पर लटका दिया था ।



* इसी तरह  दिल्ली के चांदनी चौक से लेकर खैबर तक जितने  पेड़ थे , वहा भी  आलिमो  को  फांसी पर लटका दिया ।



* 14000 अलिमो को सजा ए मौत
दी गई थी , जमा मस्जिद से  लेकर लाल किले  के बीच का मैदान 



में आलिमो  के ऊपर जुल्म  सितम कर  के जिंदा जला दिया ।


* फांसी पर चढ़ने वाले और काले पानी की सजा पाने वाले 75 % मुस्लिम ही थे ।




* इतना ही नही हैदर अली और टीपू सुल्तान 





के समय से ही अंग्रेजों  के खिलाफ जंग लड़ रहे थे , जिस में सरे आम  मुसलमानों को 500 से  900 कोढे मारे जाते थे ।



* अंग्रेजों के साथ जिहाद का फतवा मुसलमानो  के तरफ से ही दिया गया था ,फिर उसके बाद सब मजहब वालो ने  उस मे शिरकत की थी ।

* जिहाद क्या है उसके बारे मे


* दास्तान तो बुहत  सी है , अगर बयान करे तो पूरी जिंदगी कम पड़ जाए ।

* कहते है , की तुम्हारे बुजुर्गों ने  जो क़ुरबानी पेश की थी उसे के सबब तुम्हें पाकिस्तान तो मिल गया था , अब तुम्हारा क्या काम यहाँ पर ।



*  तो मैं उन प्यारे भाइयो से कहना चाहता हु , की हमारे पास तो मौका था  परन्तु  हम ने उसे  जूते की नोक पर ठुकरा दिया ।


है  , अल्हम्दुलिल्लाह  ।


 * मौलाना अबुल कलाम  आजाद का  वे इतेहासिक भाषण आज भी रेकॉर्ड है , जो आपने दिल्ली की जामा मस्जिद से दिया था ।


* कई बाते  है , पर हमें  किसी की प्रमाण पत्र देने की जरूरत नही ।

* अफसोस  आज इन लोगो को इतिहास के पन्नो में दबा दिया गया है ।




* और असिली देश प्रमियों को देशद्रोही का प्रमाण पत्र देने में लगे है 





* और जिनका जंगे आज़ादी में कोई हिस्सा नही था , जो अंग्रेजों के तलवे चाट ने में लगे थे उसके जूतों को साफ करते थे , वे लोग हमें देश भक्ति का पाठ पढ़ते है ।



* कभी ये पुस्तकों भी पढ़लेना इनकी काली करतूत पता चल जांयेंगी ।



* कभी तन्हाई में  इतिहास के पन्नो को पलट कर देखना , की हिन्द की जमीन कह कह कर पुकारेगी की मुसलमान अपने देश का वफादार है ।


* अल्हम्दुलिल्लाह और आज भी हर मुसलमान अपने वतन पर अपनी जान निछावर कर सकता है  मुह से कहना जरूरी नही दिल में मोहब्बत होनी चाहिए  वक्क्त आने पर पता चलता है हकीकत क्या है ।

* और आज भी कई मुसलमान अपने वतन की हिफाजत के लिए  सरहद पर अपनी जान निछावर  के लिए मजबूती से खड़े है चाहे कोई भी भारतीय सेना की शाखा हो  ।


* और हम से ज्यादा वतन का वफादार कौन हो सकता है ? जो इसी मट्टी पर पैदा हुआ और इसी में दफन होता है ।
सलाम उन पर 










* और कभी जो सब को देशभक्त  का
का पाठ पढ़ते है , खुद भी कभी तन्हाई में इतिहास से पन्नो को पलट कर देखना , की वे  क्या कहते है ।

* अनक़रीब इन्हें भी  देशद्रोही का प्रमाण दे देंगे ।




* और कभी इनकी क़ुरबानी को भी याद करे  








* बरहाल कोई बात नही ।
अल्लाह से दुआ है , की ये मेरे मौला हमारे वतन ए अजीज  को  दुश्मनों की बद निगाहों
से महफूज रख , हमारे वतन  में अमन और चैन आता फ़रमा , और आपस मे मोहब्बत और भाईचारे से जिंदगी गुजरने की तौफीक आता फ़रमा , अपने दिन ए हक़ , और वतन पर  जान माल निछावर करने की ताकत और जज्बा आता फ़रमा ।
 ( अमीन  )

सारे जाहा से अच्छा  हिंदुस्तान हमारा 

* सब भाइयो को  73 यौमे -आज़ादी की पहले से  मुबारकबाद ।




 अल्हम्दुलिल्लाह 



All post






Previous
Next Post »

Science in Vedas

वैदिक विज्ञान वेद और विज्ञान * सभी मित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण लेख ! जो वेदों के ज्ञान - विज्ञान बताते फिरते है उनके मुह ...