SATYARTH PARKASH AUR ISLAM ? सत्यार्थ प्रकाश पोल खोल 7

पोल - खोल  7

सत्यार्थ प्रकाश  14
समुलास



😊  बाबा जी की पुस्तक है  😊


प्रशन : - 31,32,33,34,35,36,37,38,39,40 


??????????

उत्तर :

 (  यजुर्वेद  3 : 1, 2, 3 ,4  )



* ( समीक्षक ) : -  जो यज्ञ को छोड़ा है यज्ञ का पालन करने वाला  वैदिकों का ईस्वर उसको छोड़े देता है ! ( यजुर्वेद 2 : 23 )


* जो यह बात  सचची  तो आर्यो  का वैदिक ईस्वर यज्ञ छोडने वालो को छोड़ देता है ? जो कहते है कि वो सर्वव्यपाक है 
( हर चीज और हर जगह पर में है  )



* तो केवल आग में घी डालने से की प्रसन्न होता  है ?

*  ( उत्तरपक्षी ) : - क्या यज्ञ  करना छोटी बुतपरस्ती  है ? 
या नही बड़ी ? 

* ( पूर्वपक्षी ): - हम वैदिक आर्य है , हम अग्नि , सूर्य , चंद्र आदि की पूजा नही करते , हम तो मूर्ती पूजा का खंडन करते है ।
और इट - पत्थरो से केवल घर बनाओ ।


* ( उत्तरपक्षी ): - वाह जी ! फीर यज्ञ में और इत्यादि का उपदेश क्यों ? 

* ( पूर्वपक्षी ) : - क्यों कि उसकी आज्ञा मन्ना आवश्क है । ( यजुर्वेद 40 : 1)

*  (उत्तरपक्षी ) : -  जैसे तुम्हारे मनगढ़ वेद है  की आज्ञा है उसी प्रकार आर्य समाज के लिए सत्यार्थ प्रकाश  का वचन है ।





* जैसे वेदों को ईश्वरीय ज्ञान समझते है जो कि एक असत्य बात है ।
उसी प्रकार सत्यार्थ प्रकाश को  समझ बैठे है 90 % आर्य समाजी ने कभी भी वेदों को पढ़ा नही देखा 😢😢केवल सत्यार्थ प्रकाश को पढकर  अपनी आपको विद्धवान समझ बैठे है ।😊😊😊😊

परंतु वे घोर अन्धकार में  है । इसीलिए आर्य समाजी सत्यार्थ प्रकाश को अत्ति पूजनीय  है क्या ये  मूर्ती से बढ़कर पुस्तक पूजा नही लगती ।





👍 ये महाशय  एक पेज फेसबुक , 3 ब्लॉग चलते है इनका ये मत है । 😢





(समीक्षक ) : -  हे  विद्वन आपके अनार्य देशो(जो आर्य देश नही है)में बसने वालो मे गांव से नही दुग्ध आदि को दुहते।(जो गौ दूध नही देती)दिनको नही तापते है(जो वेदों से अपरिचित है) वे क्या करते वह करे आप  हम लोगो के लिए जो कुलीन मुझ को प्रप्त होता है,उसके धनोको सब प्रकार से धारण करे(पकड़ना-उसके माल को आसान शब्दों में लूट लेना वाह क्या बात है)और ये क्षेषट धन से युक्त आप हम लोगों के नीचे शक्ति जिसमे उसकी नितृति करो।(यानी गुलाम बनाओ)👌बोहत खूब(ऋग्वेदा 3:53:14)


*सत्यार्थ प्रकाश में दयानद सस्वती यही बात करते है।




*इस व्यवस्था को कभी न तोड़े की जो-जो युद्ध मे जिस-जिस भृत्य( सैनिक)वा अध्यक्ष ने रथ, घोड़ा, हाथी,छत्र, धन,धान्य, गाय, आदि पशु और NOTE स्त्रीया(लेडिस)तथा अन्य प्रकार के सब द्रव्य और घी .......... इत्यादि युद्ध मे जाते उस-उस को ग्रहण करे (यानी लूट लो) यही बात मनुसमूर्ति में कई जगह पर लिखी है।*तो क्या स्त्रीयो के साथ नियोग के नाम पर बलत्कार करें।(वाह भाई वाह)क्या बात है(6 समुलास पेज नम्बर126) इसके  आगे लिखा है कि किसको कितना हिसा मिलना चाहिए।👍




*और ऋग्वेदादीभाष्यभूमिक में लिखा है कि युद्ध ही एक मात्र धन प्रप्ति का जरिया हैं इसी लिए उसे निघण्टु कहा जाता है(यानी महाधन का जरिया)😊दूसरों को लूटो धन जमा करो और ये बात मनुसमूर्ति में भी है।

(22-10 राजप्रजाधर्मविषय पेज नम्बर 285)



* उसी प्रकार मनुसमूर्ति में भी यही है ।





मनुसमूर्ति 7 :96 ( 71)


* भला ! वैदिका का मार्ग में लूट -मार फिर सब  स्त्रियों की हिस्सेदरी ।
💐💐💐वाह भाई वाह 💐💐💐






* वैदिक ईश्वर कहता है मैं मरता हु ।मेरा कौन क्या कर  सकता है ।
यहां पर कर्म के  लिए स्वतंत्रता वाली बात का भी रदद् है क्यों कि ये सबको मरता और दंड देता है ।  ( ऋग्वेद 10 : 48 :6:7 )


* मांसखाने वालो का सिर काट दो ? क्या आतंक है ।




* यजुर्वेद ( 25 : 35 ,36 )

*मारो नही  फिर ये क्या है ?



* (ऋग्वेद 1 : 163 :13 )

* अब ये कौंन पका रहा है ?

* उनकी  खाल का उपयोग  किस तरह करे ?
😢😢😢😢😢




* वाह वैदिकों खूब  ओढो और बिछाओ  और पहनो 
मनुसमूर्ति  ( 2: 16 )




मनुसमूर्ति 2 : 19



* खूब पहनो पर जानवरों को ईजा मत दो  वाह क्या मूर्खता फैला रखी है जब तक मरेंगे नही तो उपयोग कैसे कर सकते ।

* नही मारने के बाद उपयोग करते है ,ये बात मूर्खता से कम प्रतीत नही होती मित्र  लगभग  24 घंटे के अंतर्गत उसमे  जीव जन्तु लग जाते है ।  क्या सब मारने के बाद उपयोग करते थे  , क्या सच्च में  इतने जानवर  मरते होंगे ??



* अब देखते है , की वेदों में कितनी स्वतंत्रता है वैदिकों को ?????




मनुसमूर्ति ( 2 : 153 ) 121


* अब गाना बजा ना छोड़ दो ।
😢😢😢😢😢😢😢

* अब देखते  स्त्रियों की स्वतंत्रता का प्रमाण 





* अर्थात : -  हे  नारी , नीचे देख ,ऊपर मत देख , दोनों पैरो को ठीक तरीके से एकत्र करके रख  ,तेरे दोनों स्तन ,पीठ ,पेट ,नाभ, दोनों  जांघ , दोनों  पिडलिया नग ना कर 
यह सब इसलिए क्यों कि नारी  निर्माण कर्त्री हुई है ।
( ऋग्विद 8 : 33:19 )

* भावर्त : - 1 . नारी को अपनी दृष्टि नीचे रखनी चाहिए उपर नही ।

2 . नारी को चलते समय  दोनों पैरों को मिलाकर सावधानी से  चलना चाहिए ।

3. इठलाते हुई , मटकते हुई , हाव भाव का प्रदर्शन करते हुई , चलचलता और चपलता से नही चलना चाहिए ।
😢😢😢😢😢😢

4 . नारियों को वस्त्र इस प्रकार धारण करना चाहिए कि उनका स्तन , पेट ,पीठ , जांघे ,पिंडलियां इत्यादि दिखाई न दे । अपने अंगों का प्रदर्शन  करना विमासित और घोतक है ।

5 . यदि नारी ही बिगड़ गई  सृष्टि ही बिगड़ जांयगी ।
👌👌👌👌👌👌👌👌


* वैदिक ईशवर की आज्ञा जो मानता है वो सुखी रहता है जो नही मानता वो  दुख के सागर में बहे  जाता है ।
( यजुर्वेद 19 : 77 )

* इसलिए कहता हूं वैदिकों  ऊपर जो भी लेखा है उसको मानो @
😊😊😊😊😊😊

* आप पर छोड़ता हु की किसमे समानता है हक़ की तालीम दी और किसने क्या दिया ।
👌👌👌👌👌👌


* इसलिए लोगो को मूर्ख बनाना छोड़े दे ।


समीक्षक : -


* इसी कारण हम ने(अल्लाह)बानी इस्राइल में लिख दिया था की जिसने किसी व्यक्ति को खून का बदला लेने या जमीन में फ़साद फैलाने के अतिरिक्त किसी और कारण से मार डाले तो मानो उसने सारी इंशानो की हत्या कर दी और जिसने एक व्यक्ति को जीव प्रदान की उसने सारी इंशानो को जीव दान दिया  (5:32)


 *वेद और आतंक इत्यादि पुस्तकों से प्रमाण के साथ,😊अगर किसी भी व्यक्ति को इसमें जरा भी शक हो तो प्रमाण चेक कर ले ।*वेद विरोधी के साथ और शत्रु साथ कैसा अंजाम करे उसके बारे में।


*काट डाल, चिर डाल, फाड् डाल, जला दे,फुंक दे,भस्म कर दे।(अथर्वेद 12:5:62)


*तुम करके बांध लिए गए,कुचल गए,अनिष्ट चिन्तक को आग में जला डाल(अथर्वेद12:5:61)  


* (वेदविरोधी)उन लोगो को काट डाल, उसकी खाल उतार दे,उसके मांस के टुकडो को बोटी-बोटी कर दे,उसके नसों को एठ दे,उसकी हड्डियों को मसल डाल उसकी मिंग निकाल दे,उसके सब अडो(हस्सो) और जुडो को ढीला कर दे(अथर्वेद 12:5:7) जो आज -कल हो रहा है, लोगो के साथ इंडिया में ex. मुसलमान के साथ हर जगह मार जा रहे है। तो भी मुसलमान आतंकवादी है (अफसोस कि बात है) हमारे दलित,ईसाइयो , etc साथ हो रहा है।


*अब जो मांस का सेवन करते है उनके साथ क्या करे उसके बारे में!


* मांसभक्षक अग्नि इसको पृथ्वी (जमीन) से निकाल देवे और जला डाले वायु(हवा)बड़े विस्तार अंतरिक्ष(वैसा ही कर यानी निकाल डाल)सूर्य प्रकाश से ढकेल देवे और गिरकर जला डाल।(अर्थवेद12:5:73)


*मांस खानेवाले को कारागार(जेल) में बंद कर दे।(अथर्वेद 8:3:2)


*है सूर्य और चांद तुम दोनों राक्षसों (मांसभक्षी को और वैदिक धर्म ना मानने वालों को राक्षस कहा जाता है) तपाओ दबाओ हे बलिस्ट तुम दोनों अंधकार बढ़ाने वालों को(मूर्ख जो वेदों को नही जानते या मानते) कुचल डालो, जला दो और खाऊ जनों को मारो ढकेलो  ढील डालो(दुर्बल कर दो)(अथर्वेद 8:4:1)


*  जो वेदों में ऐसी बात  न  होतो  इतना बड़ा अपराध  जो  अन्य मत वालो पे किया  और अनार्य का शोषण कीया न होता ।


* जो वेदों और अन्य धार्मिक पुस्तकों को न माने वे अनार्य , शुद्रो , मलेच्छ , मूर्ख , नास्तिक इत्यादि है ।




* कर समाज की सूख शांति को भंग करता है  ।

( मनुसमूर्ति 2 : 30 )


* मतलब पूरी दुनिया मे 95 -98 % 
लोग नास्तिक है यानी कि 
( काफिर है  = वेदों का इनकार करने वाला )

* अनार्य को लूटो औऱ गुलाम बनाओ ।


*हिंसको को मार डाल औऱ गिरा दे,जैसे वायु पैड को (NOTE:- )गौ, घोड़ा और पुरूष को मत छोड़ो(या तो इसका एक मतलब  है,की मार डालो या फिर गुलाम बनालो)है हिंसा शील(मजलूम को हिंसक कहा जा रहा बल्कि खुद हिंसा कर रहे है।)यहां से लौट कर प्रजा की हानि के लिए जगह दे (अथर्वेद10:1:17)


*कहते है, की लौहे की बनी तलवार घर है(अथर्वेद10:1:20)


*तेरी गिरवा की निडियो और दोनो पैरो को भी मैं काटूँगा निकल जा।(सब को निकाल दो ,तुम लोग रहो).(अथर्वेद 10:1:12)


*पीछे को चढाये गए दोनों भुजाओ को(हाथों)और मुख(मुँह) में बांधता हु।(अथर्वेद 7:17:4'5)


*में उस शत्रु को उसके घर से निकलता हु, जो शत्रु सेना चढ़ता है(यानी जो इनके मुक़ाबिल आता है तो घर से निकाल कर मर देंगे)प्रतापी राजा(लीडर)उसको अपने निविहन ग्रहा व्यवहार से गिराये।( अथर्वेद6:75:1)


*मांसभक्ष को मूल सहित भस्म कर दो।(अथर्वेद 8:3:18)

* यह हिंसक हमे काहा जा रहा है ।

* जो वेदों और अन्य को न माने वे अनार्य , शुद्रो , मलेच्छ , मूर्ख , नास्तिक इत्यादि है ।

*  अन्य मत वालो पर अति कठोर रहता है , क्या चोरी का बदला चोर ?

* जितना अपराध हमारे  चोर करे क्या हम भी चोरी करे ?


* ये सर्वथा अन्याय की बात है , क्या कोई अज्ञानी  हम को गालियां दे  क्या हम भी उसको गली देवे ?

* यह बाते ना ही सच्चे पालनहार  की
ना ही  पालनहार  के भक्त विद्वानों की  और ना ही  सच्चे पुस्तक की   हो सकती है भला !
यह तो केवल पाखंडी , मूर्ख सर्वथी ज्ञानरहित मनुष्यों की बना ही है ।

* और एक मजे की बात  😊 *

* प्रशन : - वेद संस्कृत भाषा मे  प्रकाशित  हुई है , वे अग्नि आदि  ऋषियों लोगों उस संस्कृत को नही जानते थे फिर वेदों का 
अर्थ उन्होंने कैसे जाना ?????
😊😊😊😊😊😊😊😊😊

( सत्यार्थ प्रकाश 7 समुलास )


😊  बाबा जी की पुस्तक है  😊

* यहा संस्कृत पहली भाषा वालो का बैंड बज गया क्यों कि उनके ऋषि को भी संस्कृत नही आती थे ?

* अब रही वैदिक ईश्वर की बात तो क्या वो मुर्ख था जो  भाषा नही जानता उस में बता रहा है । या फिर ऐसा हो सकता है कि वेदो के ईश्वर को केवल संस्कृत ही आती है ।
इससे तो ज्यादा  मनुष्य चर्तु है कि उसे कई भाषा आती है । 😊😊😊

* क्या मुर्खता की बात है ! उदहारण ०
 अगर कोई गांव में रहने वाले व्यक्ति जो केवल हिंदी जान ने  वाला है उसे कहे कि चाइनीस बोल तो छोटे बच्चे भी हंसेंगे की ये क्या बोल रहे हो ?????

* मतलब आर्य की और साधारण हिंदू भाई की हिंदी में पार्थना करना व्यर्थ है क्यों कि उसे केवल संस्कृत ही आती है और आज पूरे विश्व मे केवल कुछ ही लोग संस्कृत बोलते है 
कोई मतलब का नही रहा पार्थना करना ??

* इसीलिए आप लोगो को संस्कृत वाला ईश्वर मुबारक हो 💐💐💐💐💐

* और उसका ज्ञान भी अधूरा - अधूरा है  एक जगह पर कुछ दूसरी जगह पर कुछ वेद पड़ता हु तो हंसी आती है पढ़के ? 😊

* उदहारण ० यजुर्वेद में लिखा है पृथ्वी घूमती है और अथर्वेद में लिखा है रुकी है ।
क्या मजाक है ।




( मनुसमूर्ति 9 : 33 )

*  क्या बात है ? स्त्री खेती के तुल्य है ,
वाह भाई वाह 
तो खेति करो ।





 * और वह क्षमा भी नही करता कितना अहंकर भरा है और हिंसक भी है।
😢😢😢😢😢

* शत्रु को  जनवरो की तरह से मारो ।
( यजुर्वेद  17 : 33 ,34 ,35 ,36 )

* स्त्रियों को उल्टा करके मारो ।
( यजुर्वेद 23 : 21 )

* लूट  मार  करो ।
( यजुर्वेद 16 : 62 )

* जिसके घर शीशे के होते है  ओ दूसरे के घरों  पर  पत्थर नही मारा  करते ?




* क्या मूर्खता भारी पड़ी है ?

* सत्यार्थ प्रकाश  में कोई दम नजर नही आता  इसने वही वही सावल रिपीट किये है इसलिए मुझे भी वही करना पड़ता है !
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊

* मूझे लगता है  कि  सत्यार्थ प्रकाश का जवाब देना केवल  समय की बर्बादी है इसी लिए इस पर कोई बात नही करता क्यों कि समय बढ़ा मूल्यवान ।

* बरहाल हमे आपकी मान्यता से कोई गरज नही क्यों कि इस्लाम कभी किसी को गलत नही कहता ।


*  किंतु कुछ चुतिया ( मुर्ख ) को उनकी भाषा मे जब तक ना समझया जाए जब तक उन्हें समझ नही आता 😊😊

* आग तुम ने लगाई है इन्शाल्लाह बूझेंगे हम 
नही तो सत्यार्थ प्रकाश को भरे रोड पर ला के सब के सामने जलाओ और पूरे आर्य समाजी मुस्लिमों से माफी मांगे नही तो पूरा बरहना कर देंगे ।


 * हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।(2-256).  

 *पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).    
*नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे। 
(81:27,28,29)(40:28)
       
* ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है(सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     
    
 * और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)

*कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      
*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट 
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है।
(17:81) 

       
NOTE : -  जो प्रशन दयानद ने इस्लाम के बारे में  किये थे अल्हम्दुलिल्लाह उसका जवाब तो हम दे सकते है पर इनके दिमाग मे जंग  लगा है  इसलिए जो जैसी भाषा समझता है उसे वैसे ही समझना पड़ता है ।
💐👌👌👌👌👌👌👌💐

Note : - मेरा मकशद किसी व्यक्ति का अपमान नही करना है ये मेरे शब्द नही  जो दयानद ने मुस्लिम लोगो के बारे कहा है वाहा मैन  वैदिक लगा दिया है  पूरा कथन दयानद का है ।

 *  की बाते सुनकर मानव जाति का सर शर्म से नीचे झुक जाता है , बरहाल मैन जो भी प्रमाण दिए है आप स्वतः चेक कर ये बाते लिखी है  इत्यादि संबंध में  ।

* अगर किसी को ठेस पहुंची तो क्षमा चाहता हु । 😢

* इस लेख का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि उन इस्लाम विरोधी को जवाब देना है  जो खुद की धार्मिक गर्न्थो की मान्यता को नही जानते और इस्लाम और मुसलमानों के ऊपर तानाकाशी करते है।



                                धन्यवाद

science. ज्ञान विज्ञान

All post




0 comments:

Veda bhashyakar

सायण भाष्य का महत्व सायणचार्य का जीवन परिचय * सायण ने अपनी रचनामे अपने जीवन चरित्र के विषय मे आवश्यक तथ्यों का निर्देश किय...