yahudi aur hinduism

Jews यहूदी  4



 Note :- इस लेख में यहूदी क्या है उनका परिचय , उनकी चाल , उनका अक़ीदा ,उनपर अजब सब कुछ जानकरी देने की कोशिश करूँगा  आखरी भाग ।

* बनी ईस्राइल की कॉम पर अल्लाह की नेअमत  और उन पर अज़ाब उनके ना -फरमानी के सबब ।


* फिरौन बनी ईस्राइल पर बड़ा जुल्म सितम करता  था उनके बेटो को मारता था और उनकी बेटियाँ को जिंदा रखता ।


* तो अल्लाह का एहसान हुआ , की बनी ईस्राइल की कॉम में हज़रत मूसा अहेस्लाम को भेजा ।

* हज़रत मूसा अहेस्लाम फिरौन के घर मे ही बड़े हुए थे ।

फिरौन बनी ईस्राइल पर बड़ा जुल्म सितम करता  था ,  उनसे जानवरों की तरह से काम लेता था ।


* तो अल्लाह ने मूसा अहेस्लाम के जरिये उनको फिरौन और अहले फिरौन से नजात बक्शी और दरिया निल से पार लगवा दिया और वो लोग आजाद होगये फिरौन से ।

* फिर उसके बाद उन को जिंदगी जीने के लिए शरीयत की जरूरत थी । तो अल्लाह ने तौरेत से मदद फरमाई ।

* तोरैत = कानून ( शरीयत )

* फिर अल्लाह ने मूसा अहेस्लाम को तुर की पहाड़ी पर वादे के लिए बुलाया ,40 दिनों के लिए तो आप ने अपने भाई अपने पीछे हज़रत हारून  अहेस्लाम जो कि वो। भी नबी थे  इस कॉम की रहनुमाई में लिए छोड़ कर चले गए ।

* तो उन बदबख्त लोगो ने एक सोने की गाय के बछड़े का पुतला बनाकर उनकी पूजा करना चालू कर दी ।


* फिर जब हज़रत मूसा का वादा पूरा हो गया  तो आप तशरीफ़ लाये , तो देखा कि ये बदबख्त लोगो एक पालनहार की इबादत छोड़ कर गाय के बछड़े की पूजा चालू कर दी है , तो आप हज़रत हारून पर नाजर होए और कहा कि ये किया हो गया , तो हज़रत हारून ने बताया कि मैंने इनको काफी समझा पर ये ना माने और इस कि पूजा चालू करदी ।

* यहूदी भी गाय को पूजनीय मानते थे । समझदारों के लिए इशारा काफी है  .

* आप मूसा उन लोगो  पर काफी नाराज होए और कहा कि अल्लाह का एहसान भूल गए जो फिरौन वालो से नजात बख्शी थी ।

* और तुम लोगो ने गाय के बछड़े की पूजा चालू कर दी  तो तुम ने अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी करी है ।

* तो वो लोग कहने लगे कि सामरी जादूगर ने उन्हें गुमराह किया था , जो कि  बनी ईस्राइल  
में से था ।

* कुछ लोगो का कहना है की शैतान ने इंसानी शक्ल में आ कर गुमराह किया था ,जो सामरी जादूगर था । अल्लाह बेहतर जानने वाला है ।

* अलबत्ता अल्लाह का हुक्म आया कि इनको इनकी ना फ़रमानी की सजा मिलेगी ।

* जिन होने बछड़े की पुजा की है उनको क़त्ल किया जाए ।

* इस तरह उन पर अल्लाह का अज़ाब आया उनके कुफ्र के सबब ।

* कहते है कि बनी ईस्राइल 12 गरोह थे , इस वाकये में 1 गरोह वह से भाग निकल ने मैं कामयाब हो गया था।

* जो ईरान में जा बसे  और वहा से हिन्द आये । बरहाल अल्लाह बेहत्तर जनने वाला है ।

* इसलिए वह नबी को नही मानते क्यों कि उनपर सजा नाफिश की थी इसलिए । 
बाकी अल्लाह ही सच्च जानता है ।

* पर देखा जाए तो यहूदी और वो हिन्द का तबके का अक़ीदा काफी हद्द तक मिलता जुलता है ।

* एक और वाकिया मिलता है ।

* हज़रत मूसा अहेस्लाम यहुदियों को बताया कि  अल्लाह हुक्म देता है , बैतूल मुक़दास जो कि आज के वक़्त जेरोशीलम में है ।





* हुक्म हो कि यहाँ पर एक कॉम है जो कि बहुत ही मजबूत लोग थे , उनसे लड़ने का तो ये बदबख्त लोगो कहने लगे तुम और तुम्हारा रब उनसे लड़े हम नही लड़ते जब जीत जाओ तो हमे भी बोला लेना ।  माजल्लाह ।



* तो आप मूसा ने कहा कितने जाहिल लोग है ये । तो अपने रब और उसके रसूल की बाते नही मानते ये अल्लाह का एहसान भूल गए हो 



* जब आप मूसा को काफी गुस्सा आया आप सजदे में गिर पड़े और अल्लाह से दुआ की ये मेरे रब मुझे अपने और अपने भाई पर ही इख्तियार है । तो पालनहार का हुक्म आया कि इन्होंने मेरी ना फ़रमानी की है और मेरी की नेअमत  भूल गये । 



* NOTE : -  अल्लाह जिनको चुन लेता है उनकी आज़माइश ज्यादा लेता है  क्योंकि ये लोग अपने बात पर कायम है कि वो एक अल्लाह पर ईमान है या नही और अच्छी और बुरी परस्ती में डाल कर इन्शान की परीक्षा लेता है कौन कितना पका है अपने वादे पर ।



* अल्लाह का फरमान आया कि इतने मोजजे देखे इतनी नेअमत देखी पर भी इंकार कर दिया है ।



* जब उनपर अज़ाब नाजिल हुआ और  और वो अज़ाब था । कई सालों तक वीरान जंगलों में भटक ते रहे , उनके जिस्म में कोढे पढ़ गए जिस्म के अंग अंग नीचे टपकता था और कई लोगो को जंगल के कबीलों वालो ने  गुलाम बना लिया इत्यादि ।



* फिर कुछ सालो बाद अल्लाह ने इनको नजात दी और रहम फ़रमाया ।



* इनको मन और सलवा की बेहतरीन नेअमत से नवाजा ।



* मन = कहते है एक मीठी सी  चीज को जब रात होती तो पानी की बूंदों की तरह से सुबह तक  इनके घरों के इर्दगिर्द जमा होती थी और ये लोग उसे जमा कर के  खाते थे ।



* सलवा = कहते है एक किसम का परिंदा होता है जिसको बटेर भी कहते है । जो कि इनके इर्दगिर्द झुन्डो की शक्ल  आज जाते फिर ये लोग उनको पकड़ कर खाते थे ।



* कहते है कि इनके बच्चे पैदा होते थे तो ग़ैब से कपड़ो भी मिल जाते थे । अल्लाह बेहत्तर जानने वाला है ।

* फिर कई सालों बाद इनको फिरौन की गुलामी में जो सुखी रोटी और कच्ची प्याज याद आ गई ।



* और कहने लगे कि ये मूसा आप अपने रब को कहे कि हमारे लिए साग ,सब्जी, कंद, मूल इत्यादि भी दे ।

 ( ओ, हो मिजाज तो देखो इन लोगो के ) माजल्लाह । 



*  तो अल्लाह ने उनसे वो नेअमत भी उठा ली उनकी नाशुक्रि के सबब ।



* एक बार तो कहने लगे कि जब तक अल्लाह को नही देख लेते ईमान नही लाएंगे ।

( अल्लाह की पन्हा) फिर इन पर लानत उतरी  बदला इनके कुफ्र का । फिर अल्लाह इन पर रहम फ़रमाया और माफ की ।



* अल्लाह ने  इनको कई मौके दिए पर ये गुस्ताखि और नाशुक्री करते रहे पर अज़ाब आता रहा।



* जिसके कुछ उदहारण ०



1 . बंदर और सुअर बना दिये गए ।



2 . हज़रत उजैर अहेस्लाम के वक़्त भी इन पर अज़ाब आया था । इनको न इनके घर और शहर से बाहर निकल दिया गया ।



तो  फिर अल्लाह ने इन पर रहम की और हज़रत जुलकरनैन ने फिर से इनको इनके शहरों में बसा दिया ।



* ये लोगो कई सौ नबियो का कत्ल करते थे 

जिसका उदहारण ० ये कुछ रहे । माजल्लाह



* हज़रत  जकरिया , याहिया , और ईसा को भी कत्ल करने की कोशिश की थी ।



* हज़रत  मरियम पर भी बोहतन लगाया था 



* हज़रत सुलेमान के बारे में भी ये कहते थे कि , उन्होंने कला जादू का इल्म दिया है । ( माजल्लाह )


* बरहाल ये तो कुछ ही उदहारण नही तो इनकी गुस्ताखि तो बहुत है  पर चंद पेश करने की कोशिश की है ।



* अभी का कही अज़ाब लेलो 1900-1950 सालो तक पूरी दुनिया मे जलील होते रहे है ।



* और हिटलर ने  इनका कत्ले आम कर वाया था क्योंकि वो जान गया था कि ये लोग कोन है और इनकी चाल ।



* आज कल दज्जाल का आने का भी इनतजार कर रहे है  अगर  इस बारे जानने की इच्छा रखते है तो मुझे कमेटी बात दे। 



* और इन लानतियो ने ही इस्लाम आतंकवाद  का प्रोपोगंडा रचा है । पूरी दुनिया मे इस्लाम को बदनाम करने के लिए ।



 Prophet (PBUH) के जमाने मे और खलीफा के जमाने मे कुल मिला कर 30 जंग होइ है। जिस में केवल 10000 लोग की मोत वो भी दोनों तरफ के मिलाकर।जंग शिर्फ़ सेल्फ डिफेंस में कर सकते है इस्लाम मे। वरना वर्जित है युद्ध करना। और आज के टाइम फिलेंसतीन में ही 3,लाख।शिराया, etc, जगहों पर हजारों लाखों, मुसलमान को जानवरों के जैसा मारा जा रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा(jews आतंकवाद है) जो ये कर रहा हैं।



इस्लाम को दुनिया मे बाद नाम करने के लिए । इराक,सऊदी के तेल के कुआँ पर कब्जा करने के लिए अमरीका, और इस्राइल ने इस्लामिक आतंकवाद का प्रोपोगंडा रचा है। पैसे देकर काम कर आते है ये 2 स्टेट । जाहिल और ग्वार लोग जो इस्लाम (a) भी नही जानते  उन्हें पैसे का लालच दे कर। ये इस्लाम को बदनाम कर रहे है । दुनिया का सबसे बड़ा एलेक्ट्रोनिक मीडिया यहूदियों के है। वही मीडिया को पैसे दे कर इस्लाम को बद नाम कर व रहा है। आप लोग मीडिया, सोशल मीडिया ।की बात को जल्दी अस्पेट करते हो क्योंकि टेनॉलॉजी ने इन्शान का दिमाग को परालैस कर दिया है। पहले के लोग किताबो से पढ़कर कोई फैसला करते थे। आज जो मीडिया ने कहा दिया पत्थर की लकीर हो गई है। पहले के लोग ex.32+18=? फैट से 50 बोलते थे आज पहले कलकोलेटर निकल थे है।हमे अपने दिमाग इस्तमाल करना छोड़ दिया है।ये सब चाल  यहूदियों की हैं पूरी दुनिया पर राज करना चाहती है। खुद सिगरेट बनाती है। पर खुद नही पीते।खुदने बैंकिंग सिस्टम खोल है। पूरी दुनियाभर भर ब्याज को आम कर दिया। खुद आपस मे ब्याज का लेन देन नही करते।ये है यहूदी इसलिए ( हिटलर)कहता था में इन्हें क्यों मरता हु तुमहे भविष्य में पता चलेगा ।




* तर्जुमा :- यदि अल्लाह मानव के एक झुंड को  दूसरे  झुंड  के द्वारा हटाता नही रहता धरती  बिगाड़ से भर जाती , किंतु अल्लाह 

संसारवालो  के  उदार के लिए है । ( 2 : 251)








* तर्जुमा  :- " वे  जब भी  युद्ध के लिए आग भड़काते  है , अल्लाह  उसको बुझा देता है वे धरती  में फ़साद फैलाने के लिए प्रयास कर है , हालांकि फसाद फैलाने वालो को अल्लाह  पसंद नही करता ।  ( 5 : 64 )


* ( सुरह 22 : 39 '40)

* ( सुरह 4 : 75) 

* ( सुरह 2 : 76 )

*  ( सुरह 61 : 10 '11)

* (  सुरह 61 : 4 )

*  ( सूरह  9 : 19 ' 20 )  इत्यादि  इस  मे  



* अब तौहीद का काम अल्लाह ने हम मुसलमान को दिया है । अल्हम्दुलिल्लाह





وَجَٰهِدُوا۟ فِى ٱللَّهِ حَقَّ جِهَادِهِۦ هُوَ ٱجْتَبَىٰكُمْ وَمَا جَعَلَ عَلَيْكُمْ فِى ٱلدِّينِ مِنْ حَرَجٍ مِّلَّةَ أَبِيكُمْ إِبْرَٰهِيمَ هُوَ سَمَّىٰكُمُ ٱلْمُسْلِمِينَ مِن قَبْلُ وَفِى هَٰذَا لِيَكُونَ ٱلرَّسُولُ شَهِيدًا عَلَيْكُمْ وَتَكُونُوا۟ شُهَدَآءَ عَلَى ٱلنَّاسِ فَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱعْتَصِمُوا۟ بِٱللَّهِ هُوَ مَوْلَىٰكُمْ فَنِعْمَ ٱلْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ ٱلنَّصِيرُ


* अर्थात : - ताकि तुम कामयाब हो और जो हक़ जिहाद करने का है खुदा की राह में जिहाद करो उसी नें तुमको बरगुज़ीदा किया और उमूरे दीन में तुम पर किसी तरह की सख्ती नहीं की तुम्हारे बाप इबराहीम ने मजहब को (तुम्हारा मज़हब बना दिया उसी (खुदा) ने तुम्हारा पहले ही से मुसलमान (फरमाबरदार बन्दे) नाम रखा और कुरान में भी (तो जिहाद करो) ताकि रसूल तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बने और तुम पाबन्दी से नामज़ पढ़ा करो और ज़कात देते रहो और खुदा ही (के एहकाम) को मज़बूत पकड़ो वही तुम्हारा सरपरस्त है तो क्या अच्छा सरपरस्त है और क्या अच्छा मददगार है ।  ( 22 :78 )

*  हक़ क़ुरआन लौहे महफूज में है ।(85:21,22)

* बेशक़ क़ुरआन फैसले की बात है ।
( 86:13,14) ( 15 : 1 से 15 )

* बेशक़ क़ुरआन सीधा रास्ता देखता है ।
( 15:9 )


 *وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِلَّ قَوْمًۢا بَعْدَ إِذْ هَدَىٰهُمْ حَتَّىٰ يُبَيِّنَ لَهُم مَّا يَتَّقُونَ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ

अर्थात :-  अल्लाह की ये शान नहीं कि किसी क़ौम को जब उनकी हिदायत कर चुका हो उसके बाद बेशक अल्लाह उन्हें गुमराह कर दे हत्ता (यहां तक) कि वह उन्हीं चीज़ों को बता दे जिससे वह परहेज़ करें बेशक ख़ुदा हर चीज़ से (वाक़िफ है)       ( 9 :15 )

* हम ने ( अल्लाह ) उनकी जबान में ही कई नबी भेजे । ( 14 : 4 )


 * हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही।(2-256).  


 *पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है। (16:90).    

*नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।  (81:27,28,29)(40:28)

   
* ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है(सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     


 * और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)


*कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।
(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      


*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट 
गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है। (17:81)        



            Note:-  या अल्लाह लिखने में 

बयान करने में कोई शरियन गलती हुई हो ,तो मेरे मालिक तू दिलो के राज जानने वाला है माफ फ़रमा दे।(आमीन)     




                                                           (अल्हम्दुलिल्लाह )



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