yahudi aur hinduism

Jews यहूदी  3




 Note :- इस लेख में यहूदी क्या है उनका परिचय , उनकी चाल , उनका अक़ीदा उनपर अजब सब कुछ जानकरी देने की कोशिश करूँगा  भागो में ।

 यहूदियों का गंदा अक़ीदा !

* यहुदी आपने आपको दुनिया मे सबसे अफजल समझते है ।( सबसे उच्च कोटि के )

* यहूदी अपने सामने पूरी दुनिया को कीड़े - मकोड़े के समान समझते है । 

* यहा में और एक तबके का ज़िक्र भी साथ मे करता चलता हूं । 

* हिन्द में भी एक तबका है वो , भी अपने आपको ऊची जाती का कहते है । दुसरो को नीचा समझते है ।

* यहूदी हज़रत जिब्राईल अहेस्लाम को अपना दुश्मन समझते थे। क्यों कि हज़रत 
जिब्राईल अहेस्लाम का" वही " पूछने के सिवाय एक और काम था , कॉम के ऊपर उनके ना - फ़रमानी के सबब अल्लाह के हुक्म से अजाब नाजिल करना ।





 अर्थात : - जो कोई अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों और जिबरील और मीकाईल का शत्रु हो, तो ऐसे इनकार करनेवालों का अल्लाह शत्रु है।" ( 2:98 )



* हिन्द का जो एक तबका है वो तो इन यहूदियों से एक कदम आगे निकल गए उसने तो फ़रिशतो का ही इनकार कर दिया है । 



* यहूदियों का अक़ीदा है , की वो जन्नति है , और वो जन्नत में जाएंगे और अगर कोई जहन्नम में भी चला गया तो फिर से जन्नत में आजायेगा ।



* इसी तरह को हिन्द का भी मोक्ष - मोक्ष करता रहता है ।



* यहूदी अल्लाह को मोहताज समझते थे 

( नउजुबिल्हमीनजलिक ) कहते थे अगर उनके हाथ तंग होंगे तो अल्लाह के हाथ तंग हो गये । ( माजल्लाह ) 





* पालनहार बे - नियाज है । ( सर्वशक्तिमान है उसे किसी की जरूरत नही । )  (112:2)

* इसी तरह से वो ये नही कर सकता वो नही कर सकता ऐसा भी कहते थे ।

*  तभी पालनहार ने हज़रत ईसा की बना वालिद की पैदाइश का मोजेजा दिखाया।
( सुब्हान अल्लाह ) और बता दीया की  पालनहार हर चीज पर क्षमता  रखता है ।


*  अर्थात : - बड़ा बरकतवाला है वह जिसके दस्ते क़ुदरत में सारी बादशाही है और वह हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है। ( 67 : 1 )

* इसी तरह से हिन्द का वो तबका भी इसी तरह से कहता फिरता है , की फला चीज  वो अनादि है,  वो पहले से थी इत्यादि वो ये नही जानता वो नही जानता इत्यादि ।

अपनी अक्ल से उसकी पाक जात को समझना मुमकिन नही,क्योंकि जो चीज़ अक्ल के जरिये से समझ मे आति है अक्ल उसको अपने मे घेर ले लेती है, अल्लाह (एक ईश्वर)की शान यह है कि कोई चीज़ उसकी जात को घेर नही सकती।उसी तरह उसके गुण(सिफ़त) भी है।

*जो भी चीजे धरती और उस से बाहार होती है उसके पीछे कोई हिकमत होती है। उसका ज्ञान केवल पालनहार को हैं।।

*  पालनहार की जात स्वयं कदीम(अनादि),अजलि(सक्षम)औऱ अबदी (अमर) उसी तरह उसके गुण(शिफात) भी । अनादि, सक्षम और अमर है।

* यहुदी बड़े झुटे और मककार होते है , जो हमे हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम वाली हदीस से पता चलता  है। ( बुखारी 3329)

* और चालक होते है पीछे से चाल चलते रहते है । ( आम भाषा मे क हु तो दूसरे के कंधे पर बंदूक चलना । ) 

* जिसका उदहारण ० अमेरिका ही लेलो  ,  रिमोट यहुदी के पास है और काम अमेरिका कर रहा है ।

* उसी तरह हिन्द में भी वो तबका यही करता है । खुद  3.5 % है , 96.5 % पर राज करना चाहते है । 

* उन्होंने एक चाल रची " हिन्दू " शब्द की  हिंदूइस्म की कोइ भी किताब में हिन्दू शब्द नही है ।

* दयानद सरस्वती के मुताबिक हिंदू शब्द मुगलो की दी हुई गली है । 

* हिन्दू शब्द की चाल में इंडिया का
 75-80 % लोगो को फसा रखा है । 

* हकीकत में इस  धर्म का नाम वैदिक धर्म है 

* अगर देखा जाये तो NT ,ST, OBC. में 1500 जाति  ( गोरह ) है जो कि वेदों को नही मानते ना जानते । दयानद के मुताबिक जो वेदों को नही जानता और मानता वो अनाड़ी है ( यानी शूद्र है ) और इन्ही को हिन्दू शब्द के माया जल में फसा कर । इनसे काम लेते है ,  मुसलमानो के खिलाफ और खुद हमेशा पीछे रहते है और चाल चलते रहते है । 



*  जबतक आर्यावर्त देश से शिक्षा नही गई जब तक सब मूर्ख थे यानी शूद्र थे ।

अमेरिका , यूनान , मिस्र , इंग्लैंड इत्यादि देश सब शुद्र थे । अच्छा है कि इनसे शिक्षा नही ली नही तो अबतक सिर्फ धोती बनना शिखते रहते ।😊 ( सत्यार्थ प्रकाश 7 समुलास )

* बरहाल सब जानते ही है ।

* ये लोग अपनी 2500 - 3000 साल की गुलामी भूल बैठे है , और बाबा अम्बेटकर , और इत्यादि की क़ुरबानी जब इनका काम निकल जायेगा तो फिर से ये तुमको गुलाम बना देंगे ।

* बरहाल यहुदियों की बात  चालू है ।

* यहूदी धर्म कोई अपना नही सकता जो यहूदी है वही यहूदी होते है । दूसरा कोई नही 

* उसी तरह से वो तबका का भी यही अक़ीदा है ।


यहूद तो कहते हैं कि अज़ीज़ ख़ुदा के बेटे हैं और ईसाई कहते हैं कि मसीहा (ईसा) ख़ुदा के बेटे हैं ये तो उनकी बात है और (वह ख़ुद) उन्हीं के मुँह से ये लोग भी उन्हीं काफ़िरों की सी बातें बनाने लगे जो उनसे पहले गुज़र चुके हैं ख़ुदा उनको क़त्ल (तहस नहस) करके (देखो तो) कहाँ से कहाँ भटके जा रहे हैं। (9:30)

* यहूदी हज़रत उजैर आहेस्लाम को अल्लाह का बेटा बोलते थे ।( माजल्लाह )




وَأَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُون
और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा) (37:147)



فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा
(37:148)



فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ
तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे  (37:149)



أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِنَٰثًا وَهُمْ شَٰهِدُونَ
(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे
(37:150 )



أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ
ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है ( 37:151 )





وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَ
और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं ( 37:152 )





أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ
क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है  ( 37:153 )





مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो
(37:154)




أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
37:155 )



37:156

أَمْ لَكُمْ سُلْطَٰنٌ مُّبِينٌ
या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है



37:157

فَأْتُوا۟ بِكِتَٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ
तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो



37:158

وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًا وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे



37:159

سُبْحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है



37:160

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)



37:161

فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ
ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद



37:162

مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَٰتِنِينَ
उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते



37:163

إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ
मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है



37:164

وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌ مَّعْلُوم
और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है



37:165

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ
और हम तो यक़ीनन (उसकी इबादत के लिए) सफ बाँधे खड़े रहते हैं



37:166

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُون
और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं



37:167

وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ
अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे



37:168

لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ
कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता



37:169

لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ
तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते



37:170

فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब 
(उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा



37:171

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِي
और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है ।



* NOTE : -  ऊपर जो आयते है यह पर यहूदियों और मुशरिकों  का रदद् है ।




لَتَجِدَنَّ أَشَدَّ ٱلنَّاسِ عَدَٰوَةً لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱلْيَهُودَ وَٱلَّذِينَ أَشْرَكُوا۟ وَلَتَجِدَنَّ أَقْرَبَهُم مَّوَدَّةً لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّا نَصَٰرَىٰ ذَٰلِكَ بِأَنَّ مِنْهُمْ قِسِّيسِينَ 
وَرُهْبَانًا وَأَنَّهُمْ لَا يَسْتَكْبِرُونَ

अर्थात : -तुम ईमानवालों का शत्रु सब लोगों से बढ़कर यहूदियों और बहुदेववादियों को पाओगे। और ईमान लानेवालो के लिए मित्रता में सबसे निकट उन लोगों को पाओगे, जिन्होंने कहा कि 'हम नसारा हैं।' यह इस कारण है कि उनमें बहुत-से धर्मज्ञाता और संसार-त्यागी सन्त पाए जाते हैं। और इस कारण कि वे अहंकार नहीं करते ।
( 5 : 82 )


अब आगे देखेंगे की  इन पर  अज़ाब और चाल ...................................... !





0 comments:

Niyog kya hai

नियोग विधि   नियोग क्या है ? * आखिर नियोग क्या है ? ये बात पहले बता चुके है फिर भी संक्षेप परिभाषा समझना चाहते हो इतना ही का...