yahudi aur hinduism

Jews यहूदी  2




 Note :- इस लेख में यहूदी क्या है उनका परिचय , उनकी चाल , उनका अक़ीदा ,उनपर अजब सब कुछ जानकरी देने की कोशिश करूँगा  भागो में ।


* यहूदियों की गुस्ताखि !


*  अल्लाह का पाक कलाम क्या कहता है ।


* अर्थात : - वे कहते है ( यहूदी ) " हमारे दिलों पर पर्दे पड़े है , " नही अल्लाह ने उन पर लानत ( उन पर फटकार पढ़ी है । ) उनके कुफ्र के सबब अतः वो ईमान थोड़े ही लाएंगे  ( 2:88)

भावार्थ : - अब देखते है , की लानत और रहमत क्या है ? 



* लानत : - लानत का मतलब होता है , अल्लाह की रहमत से दूर होना यानी अल्लाह उसको  उसी हाल में छोड देता है ,क्यों कि वह खुद हिदायत पाने की कोशिश नही करता और कुफ्र पर अड़ा रहता है ,तो अल्लाह भी उसको उसी की हालत पर छोड़ देता है , वह भटकता रहता है ।


* रहमत : - अल्लाह जिस पर रहम
 ( एहसान)  करे । 



* जो व्यक्ति सत्य की खोज में रहता  है , अल्लाह तआला भी उसकी सहायता करत है   सत्य जानने के लिए ।


* क्यों कि अल्लाह ने दुनिया मे इसलिये भेज है , परीक्षा के लिए उसने हर चीज बता दी है अपने  नबी के जरिये क्या सही है और क्या गलत ,और पालनहार के उसको उसके हाल पर छोड़ दिया है कि वो क्या चुनता है सही या गलत उसी के आधार पर फल मिलेगा ।

* और जो सत्य जानना चाहता है तो पालनहार भी उसकी मदद करता है सत्य जानने के लिए ।


* नसीहत उन के लिए है जो सीधा मार्ग पर चलना चाहे । ( 81 : 27'28'29)( 40:28)




* यहूदी कहते थे , की अल्लाह ने ही उनको गुमराह किया है । ( माजल्लाह )



* ऐसा सवाल आज कल हिंदूइस्म के लोग भी करने लगे है , कहते है कि अल्लाह चाहे जिसको हिदायत दे जिसे चाहे गुमराह करे ।



* अब इन ना - समझ लोगों के बारे में क्या कहा जाए मेरे मित्रो ये आयात और ऊपर वाली आयात का मतलब एक ही है ।



* जो सत्य की खोज को जानना चाहता है , पालनहार भी उसकी मदद करता है यानी हिदायत की तौफीक देता है , उनके कोशिश के सबब ।



* और जो कुफ्र और अपनी हेटी पर अड़ा रहता है , वह अल्लाह की रहमत से दूर रहता है , अपने कुफ्र के सबब क्योंकि वो खुद सत्य जानना नही चाहता और गुमराही इख्तियार कर बैठा है । तो अल्लाह भी उसको उसी के हाल में छोड़ दे है । ये है गुमराही का माना ।



* इतनी छोटी सी बात दिमाग मे नही बैठति क्यों कि इनके दिमाग मे जंग लगा है इनके बेवकूफी के सबब इत्यादि ।






* अर्थात  : - भला वह व्यक्ति जो जनता है , की जो कुछ तुम पर उतरा तुम्हारे रब की तरफ से सत्य है , कभी उस जैसा  हो सकता है , अंधा ? परन्तु समझ तो वही है जो बुद्धि  और समझ रखते है । ( 13 : 19 )

* बरहाल यहाँ समझदारों का काम है , मंदबुद्धियो का नही । 👍

* सत्य की खोज का सबसे बड़ा उदहारण हज़रत सलमान फ़ारसी  रिजिअल्लाहु अन्हु है अगर इनके बारे में  आप जानने की इच्छा रखते है तो मुझे कमेंट में बता दे इन्शाल्लाह उसके बारे में लेख जरूर बनाऊंगा ।

* बनी - इसराईल की कॉम एक वक़्क़ था कि पालनहार की पसंदीदा कॉम थी जो आज इस्लाम के मानने वालों को काम सोपा है वही काम यहूदियों को दिया था । पर इतनी ना - फ़रमा  थी कि अपने ही नबियो को क़त्ल कर देती थी । ( अल्लाह की पनाह ) जिसका जिक्र आगे करेनेगे । इन्शाल्लाह ।

*  यहूदी काफी चालक होते है , मदीने पाक से कुछ दूर पर खाएबर नाम का एक शहर हुआ करता था जो आज भी खंडर पढे है यह ये लोग रहते थे और पीछे से चाल चलते रहते थे कि ईमान वालो को कैसा सताया जाए।



खैबर शहर 

* जिसका एक उदाहरण की हुज़ूर के नाम से किस तरह  से हसद करे थे, ये लनती लोग इससे पहले बातादु  की नबी ए पाक का ज़िक्र पिछली हर किताबें में था । वो भी इन्शाल्लाह आगे बताने की  कोशिश करुंगा ।



*  हदीस : - हज़रत अनस रिजिअल्लाहु अन्हु ने बयान कीया की , अब्दुउल्लाह बिन सलाम  को पत्ता चाल की नबी ए पाक सल्लल्लाहु अलैह वस्लम मदीने मुनव्वर तशरीफ़ आने  की खबर मिली वह नबी ए पाक की खिदमत में आये और 3 सवाल किए  और कहा इनके जवाब सिवाय नबी के कोई नही जानता जवाब मिलने पर हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम रिजिअल्लाहु अन्हु ईमान की  दौलत से मालामाल हो गए  फिर अर्ज किया या रसूलल्लाह यहुदी बहुत झुटे लोग  है ।

अगर उनको मेरे बारे में इल्म हो गया की मैं ईमान ला चुका हूँ तो मुझे झुट लाएंगे ।

थोड़ी देर बाद कुछ यहुदि आये और हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम रिजिअल्लाहु अन्हु घर के अंदर जा कर पोशीदा हो गए ।

आप सल्लल्लाहु अलैह वस्लम  ने उन यहूदियों को हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम के बारे में पूछा कि तुम मे वो क्या मकाम रखते है ?



सारे यहुदी बोल उठे की  वह हम में सबसे बड़े अलीम है और सब से बड़े अलीम के बेटे है , और हम में सबसे बहत्तर और सबसे बहत्तर के बेटे है ।

आप नबी ए पाक ने  फ़रमाया अगर वो ईमान ले आये तो  , तो तुम्हारा क्या खयाल है इस बारे में ? तो यहूदियों ने कहा कि अल्लाह उनको इस से महफूज रखे ( यानी ईमान से बचाये माजल्लाह ) 

तो हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम रिजिअल्लाहु अन्हु  बाहर तशरीफ़ लाये और कलम ए हक़ बुलंद कर दिया । ( तो वही यहूदी जो पहले तारीफ के पुल बांद रहे थे ।)

अब वह यहूदी हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम रिजिअल्लाहु अन्हु  के मुताल्लिक कहने लगे । हम में सब से बत्तरनी और बत्तरीन का बेटा है । उनकी बुराई करने लग गए ।  ( सही बुखारी 3329 )


* ये है यहूदी जो आपने सगे के नही होते। 

अगर जो पहले इनको महबूब रहता है , मुस्लिमों होने के बाद वही दुश्मन बन जाता है इनको आका के नाम से हसद थी क्यों कि जो ये हरकत करते थे लोगो से इन्होंने हराम को भी हलाल ठहरा कर काम करते थे , आका ने इनका ये राज खोल दिया इस लिए चिढ़ते थे 


* हज़रत अब्दुउल्लाह बिन सलाम रिजिअल्लाहु अन्हु  यहूदियों के बहुत बड़े आलिम थे तौरा ,इंजील को बहुत गरराई से जानते ते और उनसे नबी ए आखरुजमा की आने की बसारत मौजूद थी और उनकी निशानी भी अलबत्ता आप जानते थी इस लिए ईमान की दौलत  से मालामाल होए क्योंकि आपको हक़ की तलाश थी इसलिए अल्लाह ने भी आपकी मदद की । 

( सुब्हान अल्लाह )




*और जब उनके पास खुदा की तरफ़ से किताब (कुरान आई और वह उस किताब तौरेत) की जो उन के पास तसदीक़ भी करती है। और उससे पहले (इसकी उम्मीद पर) काफ़िरों पर फतेहयाब होने की दुआएँ माँगते थे पस जब उनके पास वह चीज़ जिसे पहचानते थे आ गई तो लगे इन्कार करने पस काफ़िरों पर खुदा की लानत है । (2:89)

* हज़रत इब्राहीम और इस्लाइल कि दुआ है नबी ए पाक सल्लल्लाहु अलैह वस्लम ।


ऐ हमारे रब! हम दोनों को अपना आज्ञाकारी बना और हमारी संतान में से अपना एक आज्ञाकारी समुदाय बना; और हमें हमारे इबादत के तरीक़े बता और हमारी तौबा क़बूल कर। निस्संदेह तू तौबा क़बूल करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।( 2:128)


* ऐ हमारे रब! उनमें उन्हीं में से एक ऐसा रसूल उठा जो उन्हें तेरी आयतें सुनाए और उनको किताब और तत्वदर्शिता की शिक्षा दे और उन (की आत्मा) को विकसित करे। निस्संदेह तू प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है । (2:129)

* और भी बहुत कुछ है  एक हदीस शरीफ़ में आता है कि में इब्राहीम की दुआ हु ईशा का एलान हु अपने अम्मी का सच्चा ख्वाब की बशारत हु । बरहाल सब किताबो में नबी  का ज़िक्र था ।

* वेदों में नबी का जिक्र ।

*  नराशंस = मनुष्य में प्रशंसा के लायक ।

* मोहम्मद = तारीफ के लायक ।




वह मधुर भाषी होगा , या उसका भाषण सम्मोहित करने वाला होगा ।
                (ऋग्वेद 1 - 13- 3 )



( ऋग्वेद 2 - 3 - 2 )



ऋग्वेद 5 - 5 - 2 



नराशंस इंशानो के पापो को धो देगा
( ऋग्वेद 1 - 106 - 4 )

 * इसी तरह ( ऋग्वेद 5 - 27 -1)
( अथर्वेद  20 - 127 - 1 )
( 20 - 127 -2 )
(20- 127-3)

कल्कि पुराण 
(2:15) (2:4) (12:182) (2:4) (2:11)
(2:5) ( 2:7)

भागवत पुराण 
( 12-2-19) (1-3-24) (12-2-1-20) 
(12-2-29) (12-2)
इत्यादि ।

* बरहाल दयानद सरस्वती ने इन बताओ का रदद् की है कि ये बाते सत्य नही है , बरहाल मैन सबसे ऊपर ही बता  दिया है  ।

* उस आयात में बता दिया है ये अपने मतलब का रख लेते है बाकी का छुपा देते है ।

* हमारे नबी ए पाक सल्ललाहु अलैहि वसल्लम को कोई किसी किताब से जबर दस्ती देखना नही ।

* अल्लाह ने तो उनका जिक्र ता कयामत तक के लिए  बुलंद कर दिया है ।





* और तुम्हारे लिए तुम्हारे ज़िक्र को ऊँचा कर दिया। ( 94:4)



* ये है यहुदी इनकी गुस्ताखि और नबी ए पाक  से हसद । 



* आगे देखते है उनका गंदा अक़ीदा ...........




Note:-  या अल्लाह लिखने में 
बयान करने में कोई शरियन गलती हुई हो ,तो मेरे मालिक तू दिलो के राज जानने वाला है माफ फ़रमा दे।(आमीन)     

                                                          अल्हम्दुलिल्लाह






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