yahudi aur hinduism

Jews यहूदी  1 




 Note :- इस लेख में यहूदी क्या है उनका परिचय , उनकी चाल , उनका अक़ीदा ,उनपर अजाब सब कुछ जानकरी देने की कोशिश करूँगा भागो में ।



* यहूदियों का परिचय !

* बनी - इस्राइल कौन है ?


* बनी -इस्राईल  का अर्थ है याक़ूब की औलाद  !

*  बनी -इस्राईल की नींव हज़रत यूसुफ अहेस्लाम ने रखी थी मिस्र में जब आप उस वक्क्त के बादशाह थे ।

* बनी -इस्राईल में अल्लाह तआला  ने कई  नबी भेजे  थे और क़ुरआन ए करीम  में कही सो जगह पर इस कॉम का जिक्र मौजूद है ।

* क्यों कि ये कॉम  उम्मते मोहम्मदिया के बोहत ही ज्यादा करीब की कॉम है और बाकी  की कॉम काफी पहले की कॉम है इसलिए क़ुरआन में सब से ज्यादा इस कॉम का ज़िक्र इसलिए मौजूद की हम लोग इस कॉम से इबरत ( शिक्षा ) हासिल कर सके कि हम ऐसी काम नही करने है । जिस पालनहार नाराज हो ।

* कुछ ना - समझ लोगों का यह भी कहना है कि इस्लाम इब्राहीम से शुरू हुआ मुझे तो एसी बाते सुनकर हंसी आती है ।

* इसलिए क़ुरआन में उनका जिक्र ज्यादा इसलिए  है , की क़ुरआन नाजिल होने से पहले वो लोग उनके बारे जानते थे और वो लोग भी मौजूद थे और बोहत कबीर की कॉम थी ।

* क़ुरआन में 25 नबियो का ज़िक्र आया है पर कई  हज़ार नबी दुनिया मे आये है । जिक्र शिर्फ़ 25 नबी का है ये नाम आप भी जानते है ।

* बरहाल है यहूदियों के बारे में चर्चा कर रहे है  , की बनी -इस्राईल के पहले नबी हज़रत यूसुफ अलेहसल्लम  है , और आखरी नबी हज़रत ईशा इब्ने मरियम अलेहसल्लम है। कहते है , की इन दोनों नबी के दरमियान 4000 नबी आये थे बरहाल अल्लाह बहतर जानने वाला है ।

* जिसमे से कुछ नाम 
1.मूसा अलेहसल्लम
2. हारून अलेहसल्लम
3. अय्यूब अलेहसल्लम
4. यूनुस अलेहसल्लम
5. उजैर अलेहसल्लम
6. जकरिया अलेहसल्लम
7. यहिया अलेहसल्लम
8. इलियास अलेहसल्लम
9 . ईशा अलेहसल्लम
10. इत्यादि ।

 बनी -इस्राईल  का अर्थ है याक़ूब की औलाद । जिनको यहुदी कहते है । ना कि 
बनी -इस्राईल  क़ुरआन में अल्लाह ने  यहुदी को बनी -इस्राईल  कभी नही कहा बल्कि बनी -इस्राईल की कॉम कहा है ।

* यहुदियों का नाम कैसे पढ़ा ?

* हज़रत याकूब अलेहसल्लम 12 बेटे थे , जिन में से 1 का नाम यहूदा था उनकी ही निस्बत से ये नाम वजूद में आया यहुदी ।

* और हमारे और आपके नबी बनी ईस्माइल में से है इसलिए यहूदी आका से जलते थे कि ये नबी बनी  इस्माइल में कैसे आगया नबी तो सिर्फ़ बनी -इस्राएल में आते है तो ये आयत नाजिल होइ ।



* अर्थात :- अल्लाह मुसलमानो
 ( एक अल्लाह पर विसवास रखने वाले ) 
की इस हाल पर छोडने का नही जिस पर तुम हो ( कुफ्र पर ) जब तक अगल न कर दे गंदों को सुथरो से और अल्लाह चुन लेता है अपने रसूलो से जिससे चाहे । तो ईमान लाओ अल्लाह पर और उसके रसूलो पर और अगर 
ईमान लाओ और परहेगारी करो तो तुम्हारा लिए बडा इनाम है । ( 3 : 179 )

* यहा पर यहूदियों की बात का रद्द है । अल्लाह चाहे जिसे चुन लेता है । और एक मजे की बात है कि आज कल  पैशाब को तवरूप समझ ने वाले भी ये सवाल करने लगे है । पहले अपनी धोती बंदना सिख लो फिर सवाल बनता है ।

  बनी -इस्राईल लग भाग  3 किताबे मशहूर है  ।
1. तौरा = मूसा अलेहसल्लम
2. ज़बूर = दाऊद अलेहसल्लम
3. इंजील = ईशा अलेहसल्लम



 * आज कल एक प्रशन ज्यादा चर्चा में है कि अल्लाह ने सब किताबो में अगल अगल  क्यों

लिखा है ? क्या अल्लाह का ज्ञान अधूरा है ?
( माजल्लाह )

* उत्तर : - अल्लाह के कलाम में किसी किताब से किसी किताब का अफजल होनो का हरगिज यह मतलब नही , की अल्लाह की कीताब कम या ज्यादा है , उसमे कोई कमी थी। क्यों कि पालनहार एक है और उसका कलाम भी एक है । और उसकी कोई किताब में कमी नही । क़ुरआन के अलावा अक्सर बाते उनके मानने वालों ने चेंज करदीं है । क़ुरआन  वाहिद है जो मफूज है । अल्हम्दुलिल्लाह । पूरी की पूरी एक एक शब्द सही सलामत ।  अल्हम्दुलिल्लाह अलबत्ता क़ुरआन का पढ़ना सवाब मेंं ज्यादा है ।
1 शब्द के बदले 10 नेकी ।





* अर्थात : - ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है
( 5 : 15 )


* क्यों कि यहुदी कुछ आपने मतलब का बताते थे कुछ छुपा देते थे ।



* आज कल एक और भी है जो अपने आपको किताबी कहने लगा है ,  उनका दावा है कि कुछ भी निकाल सकते है ।

* मेरे मित्रो आप ही समझ जाये कि जो निकल सकते है वो डाल भी सकते हों  इसी तरह किताबो में मिलावट करते थे ।

* अल्लाह के कलाम से छेड कानी नही की जाती इसलिए क़ुरआन एक एकता किताब है जो जैसी की वैसी है । अल्हम्दुलिल्लाह , दुनिया मे सबसे ज्यादा कोई याद करने वाली कोई किताब है वो क़ुरआन है । एक अनुमान एक मुताबिक हर साल 2 करोड़ लोग क़ुरआन को याद करते है वो भी मुह जबानी ।

बरहाल यहूदी इस तरीके से करते थे । 









*  आगे देख ते है इनकी गुस्ताखिया और 

ना - फरमानी ..............

Note:-  या अल्लाह लिखने में 

बयान करने में कोई शरियन गलती हुई हो ,तो मेरे मालिक तू दिलो के राज जानने वाला है माफ फ़रमा दे।(आमीन)     




                                                          अल्हम्दुलिल्लाह




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