Aatma aur parmatma ke bich ka antar ?

                     एक नजर इधर भी !


                         

   मेरे नॉन मुस्लिम भाईयो के लिए ले लेख

         Note : थोड़ा बड़ा हो सकता है।


* वह जिसने मौत और जिंदगी पैदा की ताकि तुम्हारी जांच (परीक्षा) हो कि तुम में अच्छा काम कौन करता है, और वही है इज्जत वाला बख्शीश वाला।( 67:2)


* हर जान को मौत का मज़ा चकना है,और हम(अल्लाह)अच्छी और बुरी परिस्तिथि में डाल कर मानव की परीक्षा लेता है  अंत मे तुम्हे मेरे(अल्लाह) पास ही आना है।{क़ुरआन(21:35)& (32:11)  }



* जिंदगी का मकशद यह है, अच्छे कर्म(अमल) करना।।

                                                       

 *सर्व प्रथम हमे ये जानना होगा की अल्लाह(एक मालिक) और उसके गुण क्या है!   

                  

 *तुम फ़रमाओ पालनहारा एक है .पालनहार बे-नियाज़ (सर्वशक्तिमान) है.न उसकी औलाद है. ना वह किसी से पैदा हुआ(अजन्मी). ना उसके जैसा दूसरा कोई नही .(अल क़ुरआन 112)


*मानव को अल्लाह(पालनहार)ने ज्ञान एक लिमिट तक दिया है, जितना वह समझ सके ना कि पुरा !


Ex. जैसे हम आकाशगंगा के ग्रह( शुक्र,शनि, बृहस्पति etc . )रचना का मकशद  नही जानते कि पालनहार क्यों और किस लिए रचे है,*चीटियां और उससे भी सूक्षम और अति सूक्षम जीव मोजूद है दुनिया मे मोजूद है जो कि हमारी आंखों से नही देख पाते पर हम उनकी उत्पति का मकसद नही जानते। क्योंकि हमें उसका ज्ञान नही दिया है। हा, यह है की उसके बारे में जानने की कोशिश कर सकते। पर उसके बारे में पूरी तरह से रिजल्ट नही निकाल सकते केवल रिसर्च कर सकते है पूरा ज्ञान तो केवल पालनहार(अल्लाह) को ही है।



*अपनी अक्ल से उसकी पाक जात को समझना मुमकिन नही,क्योंकि जो चीज़ अक्ल के जरिये से समझ मे आति है अक्ल उसको अपने मे घेर ले लेती है, अल्लाह (एक ईश्वर)की शान यह है कि कोई चीज़ उसकी जात को घेर नही सकती।उसी तरह उसके गुण(सिफ़त) भी है।



*जो भी चीजे धरती और उस से बाहार होती है उसके पीछे कोई हिकमत होती है। उसका ज्ञान केवल पालनहार को हैं।।


*  पालनहार की जात स्वयं कदीम(अनादि),अजलि(सक्षम)औऱ अबदी( अमर) उसी तरह उसके गुण(शिफात) भी । अनादि, सक्षम और अमर है।अब एक सवाल यह है, की दुनियां वजूद में कैसे आई ?


*इस से पहले मनाव की उत्पत्ति का मकसद बता दिया गया है।                                            

*अब दुनिया या बोल लीजिये बृह्मांड की की उत्पत्ति कैसी होइ? उसे,कुछ आसान शब्दों में बयान करने की कोशिश करता हु।।


 *फिर उसने आकाश को क़स्द(संकल्प) फरमाया,जब कि वह धुँआ(गैस)था,और उसने धरती से कहा आओ, स्वेच्छा अनिच्छा के साथ उन्होंने कहा, हम स्वेच्छा के साथ आये.(41:11)अल क़ुरआन।


*आकाशगंगा के निर्माण से पहले सुर्ष्टि का सारा द्रवय परभिक वायुगत यानी(धुँआ की शक्ल) में था।अब यह प्रश्न उड़ता है,की धुँआ, धरती etc का raw मेटीरियल कहा से आया?मैंने इसे पहले ही बता दिया कि ,मानव को हर चीज़ का ज्ञान नही दिया गया है, जिसने उसे रचा वही बहत्तर जनता है, तो यहाँ कोई प्रशन बनता ही नहीं।



*फिर उसके बाद आकाशगंगा का निर्माण कैसे हुआ? 


* क्या? उन लोगों ने जिन्होंने इंकार कीया देखा नही की( यह मानव को समझाया जा रहा है) ये आकाश और धरती बन्द थी,फिर हमने(सर्वशक्तिमान)उन्हें खोल दिया और हमने पानी से हर जीवित चीज़ बनाई तो क्या वे नही मानते(21:30)यहा बिग-बैंग  बताया गया है।


*what's big- bang=प्रथमिक रसायन के रूप में थी, फिर एक महान(बोहत बड़ा) विस्फोट हुआ(यानी धमाक) जिसे बिग-बैंग कहते है।जिसके के नतीजे में आकाशगंगा के रूप में उभरा, फिर आकाशगंगा में नक्षत्र,ग्रह, सूर्य,चंद्र, पृथ्वी इत्यादि का निर्माण हुआ।इस आयत से यही मतलब है। ये थ्योरी कोई भी बेसिक स्पेस विज्ञान की बुक में आसानी से मिल जाएंगी। मूझे उमीद है कि आपने कही न कही पढ़ा या सुना जरूर होगा  😇.


 अल क़ुरआन में और भी ज्ञान-विज्ञान की बाते है,जहा तक मनुष्य नही पहुचा है सिर्फ रिसर्च कर रहा है,जिसमे से कुछ एक्सप्ले .


*क्या ,तुम्हारे अक्ल के मुताबिक तुम्हारा बनना मुश्किल है? आसमान का बनने वाला सर्वशक्तिमान(पालनहार) है(79:27). 


 *पृथ्वी का अंडाकार में होना या बोल सकते है गोल होना।इन आयतों में मिल जाएंगे(31:29),(39:5) चेक करके देख लेना, अक्ल रखने वालों के लिए निशानी बताई गई है,.


 *चंद सूरज से रोशनी लेता है इन आयतों से पता चला जाएंगे(10:5)&(71:16). 



*वेयज्ञेनिक एडॉन हबल(1925) लगभग प्रमाणिक खोज करी है, आकाशगंगा दिन ब दिन फैल रही है। जिस का प्रमाण क़ुरआन इस तरह है।.



*आसमान को अल्लाह  ने अपने जोर से बनाया और उसे वसुअत देने वाला है (51:47). 



(वसुअत=लंबाई-चोड़ाई,जोर, ताकत.)और बहोत कुछ है अल्लाह के पाक कलाम में, पर अब तक मानव वहा तक नही पहुच पाया।



केवल जो ऊपर मुस्लिम वज्ञानिक  है जिनका नाम जाहिर है लोगो मे इसके अलाव भी बोहत से है। इन होने क़ुरआन पर गोरो फिकर करके , दुनिया के इंशानो के लिए बोहत कुछ दिया है।


*अब रही जीवआत्मा (रूह) की बात?  
 अल्लाह के पाक कलाम (क़ुरआन) में एक जगह आता है कि।  

                                                
*और तुम से रूह( जीवात्मा)के बारे में पूछते है तुम फरमाओ रूह मेरे रब जा एक हुकम से एक चीज़ है मगर तुम्हे उसका इल्म ना मिला मगर थोड़ा।(17:85) 


*थोड़ा इल्म से मुराद:- जब तक मानव शरीर मे आत्मा(रूह) रहती है, जब तक वह जीता है , इत्यदि..


 * अब यह प्रश्न उठता है कि रूह(आत्मा) पैदा किस चीज़ से होइ :-इसका उत्तर:-हमे नही पता,क्योंकी उसका ज्ञान हमे नही दिया गया है।         

                        
*अब मै आपने आर्य या कह लीजिये कट्टर हिन्दू भाईयो  कुछ प्रशन करना चाहता हूँ? 


1.महा प्रलय कब आईगी?

2. जीवतात्मा की संख्या कितनी है।

3.वेदास कब (कितनी तारीख को मिले),कैसे, इसका प्रमाण क्या है?

4.स्वमी दयानद सरस्वती धरती पर कब और कहा पुर्णजनम लेगे?

5.कहते है कि लाखो मंत्र वेदास में थे अब खाली 20589 मंत्र बाकी राह गए है, तो अब वैदिक ईशवर पुनः किसी और ऋषि मुनि पर स्रुति क्यों नही कर ता, क्या हमें वो जो लाख मंत्र बर्बाद हो गये उसकी जरूरत भी नही है। इस लिए बाकि के मंत्र कब और किस ऋषि मुनि पर अवरोतित होंगे?


 6.दुनिया को फिर से निर्माण करना है , तो उसे नष्ट क्यों करता है वैदिक ईश्वर? .

7. क्या ईश्वर को नही पता कि इन्शान नंगा पैदा होता है तो 2 जुड़ी कपड़े साथ में भेज दे ? 

*आत्मा, परमात्मा और प्रकुति के चक्र में फसे है वो लोग वो जानना चाहते है जिसका इल्म उन्हें दिया ही नही गया है, वो लोग खुद भी गुमराह है और औरो को भी गुमराह कर रहे है।जबी पता है कि दुनिया मे अमल के लिये पैदा किया गया है। सिर्फ और सिर्फ के exam के लिए भेजा गया है केवल ।।।


1. एक अल्लाह(पालनहार)  की उपासना करना, उसके सात किसी को भागीदारी ना करना।।


2.अपनी ना-जायज़ इच्छाओं को उसकी आज्ञासे छोड़ देना।।           
                                         
3. Prophet(PBUH) को सच्चा नबी मान कर उन की शरीयत पे चलने की कोशिश करना।।     
             
 4. इन ही के आधार पर सत्य और असत्य का फल मिलेंगा।उस पालनहार ने मानव को उतना ज्ञान प्रदान किया है जितनी उसको उसकी आवशकता है नाकि पूरा।सही और गलत में फर्क समझा दिया गया है। उसके आधार पर जिंदगी गुजार करनी है। 

 * हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही(2-256).  


 *पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).    

       
*नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।(81:27,28,29)(40:28)

           
* ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है(सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     

     
 * और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)


*कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      

*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है।(17:81)         


            Note:-  या अल्लाह लिखने में बयान करने में कोई शरियन गलती हुई हो , मेरे मालिक तू दिलो के राज जानने वाला है माफ फ़रमा दे।(आमीन)     

                                                          अल्हम्दुलिल्लाह


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