SATYARTH PARKASH AUR ISLAM ? सत्यार्थ प्रकाश पोल खोल 1 ( A )

सत्यार्थ प्रकाश का सच्च

पोल खोल 1  (A )

 *अस्सलामु  अलैकुम*


मेरे नॉन मुस्लिम औऱ मुस्लिम भाइयो के लिए एक लेख । 


* सत्यर्थ प्रकाश का सच्च की  शुरुआत  करने  जा  रहा  हु  जिसमें दयानंद सरस्वती  की  किताब  सत्यार्थ  प्रकाश  में  जो  14  समुलास  में क़ुरआन  के बारे  में  टिप्पणी  की  है  अपनी  मंदबुद्धि  का  प्रदर्शन  करते  हुए  जो  कुछ  लिखा  उसके  बारे  मे  जवाब  देने  की  कोशिश  करूंगा इन्शाल्लाह  और  उनकी  क्या  मान्यता  है  उसके  बारे  में  चर्चा  करेंगे ।

  कभी - कभी  बीच  मे पोल  खोल  के  भाग  आते  रहेंगे  इन्शाल्लाह । आप  लोग  भी  दुआ  करे  ये काम  हो  जाये  पर  ये  कंपलीट  होने  में काफी  टाइम  लग सकता  है ।  कोशिश  करेंगे  जलदी  हो  जाये ।

*  1  प्रशन : - अल्लाह किस अल्लाह के नाम से शुरू कर रहा है ? 




* अल्लाह के पाक नाम से शुरू जो निहायत महेरबान खुद रहम फरमाने वाला ।

*  उत्तर :-  

*  अर्थात :- बेशक  वह  सुलैमान  की  तरफ़  से  है और  बेशक  वह  अल्लाह  के  नाम  से  है , जो  निहायत मेहरबान  रहम  वाला  ।(27:20)


*  ये  आयात  में  हज़रत  सुलैमान  अलेहसल्लम  का  जिक्र  है  जो  की  अपने  एक  खत  (लेटर)  में  

 

लिखा  था  ।  जिसका  जिक्र  इस  आयत  किया  गया  है ।  


*  इस  से  पता  चला  हर  नेक  काम  करने  से  पहले  ये  लिखाना  या  पढ़ना  चाहिए ।

*  इससे  मुताबिक  अहादीसो  में  कई  सारी  हदीसे  मोजूद है  जिसमें   कहा  गया  है  हर  अच्छे  काम  से  पहले  लिखो  भी  और  पढ़ो  भी  ।

*  ये  केवल  क़ुरआन की  एक आयात  जिसमे खुल के बताया गया  है  कि  ये  शब्द  का प्रयोग  सुलैमान  अलेहसल्लम  ने किया  था ।

*  इसमे  कई   बड़े - बड़े  अपने  वक़्त  के  मोहदीसों , उलमाओं  इत्यादि  लोगो  की  राय  है  कि  ये  जो  हर  सूरह के  पहले  बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिररहिम्   लिखा  गया  है  ये दोनों  सुरों  में फर्क  बताने  के लिए  है , की  एक  सुरह  समाप्त  हो  रहा  है  दुसरे  सूरह की शुरुआत हो  रही है  । (अल्लाहुवआला)

*  और  सुलैमान अलेहसल्लम  ने  इसका  इस्तेमाल  अपने  पत्र  में  उपयोग  किया  था , ना  की  
 

ने


*   बरहाल  इससे  पता  चला  कि  हर  शुभ  काम  से  पहले बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिररहिम्  लिखना  और  पढ़ना  चाहिए ।* 

* बाकी  अल्लाह  बहत्तर  जानने  वाला  है  ! 

*  जो  क़ुरआन की पहली आयात  नाजिल हुई वो  ये  है




* ये  होता  है  पालनहार  का  संदेश  कास  दयानद जी ये   आयात  पर  पर  गौर  करते ।  पर  क्या  कर  सकते  है  दिमाग  पर  जंग  लगा  था  । 😊


*   दयानद  जी  की  ये  भी  एक  और  आपत्ति थी  कि जानवरों  को  जबह  करते  वक्क्त  बिस्मिल्लाह  का  उच्चारण  होता  है  जी  बिस्मिल्लाह  का  मतलब  शुरू होता है ।  और  जबह  करते  वक़्त  बिस्मिल्लाही अल्लाहु अकबर  पढ़ा  जाता  है  नाकि बिस्मिल्लाहिर्रह्मानिररहिम्  ।


* और  हमे  पालनहार  ने  मांस  का  सेवन  करने  की  अनुमति दी  है ।


* जिसके  कई  फ़ायदे  है  मानव  शरीर  के  लिये । 

* मानव शरीर  मे  सबसे  ज्यादा  किसी  चीज़  की  आवश्यकता  है  तो  वो  चीज़  है  प्रोटीन  मांस ही सबसे अच्छा माध्यम  प्रोटिन  का । 



*  बरहाल  सबको  पता  ही  है  इन्शान  परभक्षी है ।

*  इस  विषय  बारे  में  अधिक  जानकारी  अपने  आस-पास 
के  डॉक्टर  संपर्क  करे । 😊

*  मेरे  कुछ  सवाल  की  मानव शरीर मांसाहारी है या नही ?



 * अब रही दयालु वाली बात तो बेशक अगर कोई मनुष्य जाने अनजाने में कोई गलती कर देता है और उसको उस चीज़ का पछतावा होजाता है और दोबारा उस काम से रोक जाने के बारे में अहद कर लेता है तो बेशक वो तवाबुर्रहीम है यानी तौबा को काबुल करने वाला है अल्लाह को बंदों पर सकती नही करता बल्कि इन्शान ही खुद खाई में गिरा जा रहा है । वो तो इतना करीम की अगर कोई आज भी सच्चे दिल से तौबा कर ले तो माफ फ़रमा देता हैं ।









* परंतु  वैदिक  ईश्वर  ऐसा  नही  करता  वेदों  के हिसाब  से वह  अपने  भक्तों  को  कभी  माफ  नही  करता   तो  यहाँ  पर  दयालु  नाम की कोई  चीज़  ही नही  है । तो  वो  ईशवर  से  हम  कोई  गरज  नही  जो  माफ  करना नही  जानता ।😢


* बरहाल  कोई   मसला  नही  !  जो  लोग  क़ुरआन  और  अरबी  का  (A)  भी  नही  जानते  वो  लोग  क़ुरआन  के  बारे  में  टिप्पणी  करना  चालू  कर  देते  है  तो  मुझे   काफी  सोच  आती  है ।  अगर  दयानद  जी  100  बार  भी  पुर्नजन्म  ले लेंगे  वैदिक  मान्यता  के  हिसाब  से  तो  भी क़ुरआन  






* सही  उच्चारण  भी  नही  कर  पाएंगे  इनसे   ज्यादा  तो  हमारे  मकतब  के  पढ़ने   वाले बच्चे  समझदार है  और  ज्याद   अक्ल  रखते  है। ये पोल खोल  का 1 ( A )  है 1 .B अब इनकी  क्या  मान्यता  है   उसके  बारे  में  बताऊंगा  (इन्शाल्लाह) या  अल्लाह  बयान  करने  या  लिखने  में  कोई भी  किस्म  की  खामी  लगती गुस्ताखि  हुई हो  तू बहेतर जानने  वाला  है  माफ फ़रमा  दे  ( आमीन ) अल्हम्दुलिल्लाह ।

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Soch ke bhi hasi aati hai ? सोच के भी हंसी आती है ।

  सोच के  भी हंसी आती है ।

क्या क़ुरान की पृथ्वी चपटी है ?


Quran and earth


     एक और नई बात ! मेरे नॉन मुस्लिम और मुस्लिम भाईयो  के लिए एक लेख !


*आज - का बहुत से लोग या कह लेजिए अति विद्धवान लोग जो अपनी बेवकूफि का जोहर दिखाने में लगे है , मुझे  तो कभी-कभी सोच आती है या कह लेजिये की हंसी आतीं है। ऐसी बाते सुनकर।


*आज कल एक और नई बात लाई गई है ,इस्लाम विरोधी के जरिये जो खाली बेवकूफी से कम नही लगती बरहाल इस्लाम विरोधियो को कोई न कोई मुद्दा तो चाहिए।


* और वो बेवकूफी वाली बात ये है क़ुरआन मजीद फुरकान हामिद में ये लिखा है , की पृथ्वी चपटी है। ऐसी बात सुनकर हंसी न आये तो क्या आये  ।
बरहाल इसका स्पष्टीकरण करने ही कोशिश करूंगा
( इन्शाल्लाह ) और वेदों से भी कुछ तो मुझे दिखाना ही होगा ! अगर इस बात से किसी व्यक्तिको कोई भी एतराज हो खुद प्रमाण चेक कर। 


* अब ये देखेंगे की क़ुरआन में पृथ्वी को चपटी बताई गई है  ?


* हिंदी और संस्कृत में ( भु )के लिए धरती, जमीन,पृथ्वी इत्यादि शब्दो का प्रयोग किया जाता है।
* उदहारण ०"पीवरिन उदवपति ततः"अर्थात :- सब पद्धार्थ को भुगाणे का हेतु स्थूल पृथ्वी को उखड़ते है, उसको तुम भी शिद्ध करो।(यहाँ पर खेती के बारे में बताया गया है।) यहाँ जो शब्द का प्रयोग किया गया है । वो जमीन के किये उपयोग में लाया गया है।

( यजुर्वेद 12:71)और इसी तरह

(यजुर्वेद के 14:10,  12:69) में भी मिल जाइयेगा


* अरबी भाष में धरती, जमीन और पृथ्वी ,हमारा ग्रह जिसमे हम रहते है।सब के लिए । एक शब्द है वो।
(अल-अर्ध)  Al'ARD


* उसका परिक्षण करेंगे !

* वह शब्द का इस्तेमाल कहा और कैसा होता है उसका उदहारण आपको देता हूं।                             
         


   







अल-क़ुरआन ( सूरह 2:164)


* ये केवल समझदारों के लिए उदहारण है

* 1. अल-अर्ध  वो ग्रह(पृथ्वी) के लिए है।

*  2. अल- अर्ध वो (भु , जमीन ,धरती) के लिए है।

* 3. अल-अर्ध  वो ग्रह(पृथ्वी) के लिए है।


* इसी  तरह से ये आयात में भी जमीन के बारे में बताया गया है।






*फर्श  का मायना :- मानव और इसमें रहे वाले सब जीव जंतु के जमीन को नर्म करदी है, जिसमे से साग, सब्जी, इत्यादि की खेती होती है, चलना फिरना आसान किया है।


* जिस तरीके के से हम अपने पैरो के जरिये चले है वैसे हम कभी भी पानी या इत्यादि जगहों पर नही चला सकते इसीलिए यहा पर धरती को फर्श की तरह बिछाया है।
 (मतलब फैलाया है) जिसका उदहारण ०


* इंडिया, इत्यादि देशो का वर्ग किलोमीटर फैला है । आदि।






* फर्श से ये मुराद है।


* अब देखते है , की पृथ्वी का आकार कैसे है।





*  अब यहा पर दो शब्द है एक (अल-अर्ध ) और दोसरा दाहा-हाआ ।


* 1.  आप समझ ही गये होंगे। यहा पर पृथ्वी के बारे में बोला जा रहा है।


* 2.दाहा-हाआ जिसका अर्थ है अंडाकार।


* 1972 में पहली पृथ्वी की पहली इमेज मंजरे आम पर आई जिसमे पूर्ण तह पता चला कि पृथ्वी का आकार गोल नही बल्कि अंडाकार है।






*  क़ुरआन में इसके मुताबिक ये भी आयत मौजूद है। (सूरह 31:29)(सूरह 39:5) समझदारों के लिए निशानी बताई गई है।


(सुब्हान अल्लाह) इतने डिटेल में और कही नही मिल सकता आपको । इसे कहते है ईश्वरीय ज्ञान जो कि क़ुरआन केवल। (अल्हम्दुलिल्लाह)


* अब देखते है , की आकाश गंगा (गलेक्सि) में ग्रहों की हालत ।

* वही है जिसने रात दिन बनाया और सूर्य ,चंद्र भी । प्रत्येक अपने-अपने कक्ष में तैर रहे है।( सुरह 21:33)


* यह तैर से मुराद घूमना , हरकत करना।

आकाशगंगा का फैलाव इस आयत में मिल जायेगा।(सूरह 51:7)


* अगर आपको अधिक आकाश गंगा के बारे में जानना चाहते हो तो मेरा वो वाला लेख पढ़ें।(एक नजर इधर भी)   यहाँ देखे @ और  भी सभी प्रकार का ज्ञान -विज्ञान क़ुरआन में मौजूद है जहाँ तक वज्ञानिक भी तक पहुचे नही। अगर आपको और भी ज्ञान - के बारे में जानकारी चाहिए तो मुझे कमेंट में बता दे।




* अब देख ते है , की वेदों में इन बारे क्या लिखा है।

* सूर्य लोक ठहरा हुआ है, पृथ्वी ठहरा हुआ है,यह सब जगत ठहरा हुआ है, सब पर्वत विश्रामस्थान में ठहरा हुआ है,घोड़ों को स्थान में मैन खड़ा कर दिया है।
(मतलब जैसे किसी घोड़ो को किसी स्थान में बंद देते है वैसे ही रोक दिया है।)
 ( अथर्वेद 6:77:1 )


* जिसमे भूमि, अंतरिक्ष और आकाश दृढ स्थापित है। (अथर्वेद 10:7:12)


* यजुर्वेद( 32:6 , 1:21 , )

अथर्वेद(13:1:6) में भी यही बाते लिखी है।



* सूर्य आदि लोको को रच कर और उसने सबको डोरी लगाकर बांद दिया है।
(अथर्वेद 4:1:4 )


अगर डोरी छोड़ दोंगे तो सब भाग जाएंगे क्या ?


* हे मनुष्य ! जो तेरा मन NOTE:-( चारो दिशाओं में भ्रंश वाली पृथ्वी पर)
(  मतलब चार कोनो वाली पृथ्वी पर) दूर तक जाता है।( ऋग्विद 10:58:3)


* इस मंत्र में पृथ्वी को 4 कोनो वाली बताई गई है ।



* और इससे भी बढ़कर दयानन्द सस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश के 8 समुलास में लिखा है । है। कि उनसे प्रशन किया लगा कि सूर्य , चन्द्र इत्यादि में मनुष्य रहते है । उत्तर है : - हा वो भी वेदों के साथ ।



* क्या मजाक है। सूर्य  का तापमान 5500 डिग्री हो तो है। वहाँ तक अभी तक कोई यान तक नही गया तो मानव जीवन तो ना-मुमकिन है। और रही चंद्र की बात तो मनुष्य वहाँ जा चुके है।  यह बाते शिर्फ़ कॉमिक बुक में अच्छी लगती है।


* इससे मिलती जुलती बात वेद में भी है ।

(" वसुनाम जनानाम देवम राध:") अर्थात :- पृथिवि आदि वसुओं और मनुष्यो का अभिसित धनरूप है, उस अग्नि को तुम लोग उपयोग में लाओ। (वसुओं  का मतलब बसने की जगह)



* और भी बहोत बाते है वेदों में ये तो चंद है। बरहाल मैं क़ुरआन में जो इसके बारे था समझा ने की कोशिश की है या (अल्लाह) अगर बयान करने कोई गलती हुई हो तो दिलो के राज जानने वाला है माफ फ़रमा।(अमीन)

* ये लिख किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नही बल्कि इस्लाम विरोधियों को जवाब देना है। जो वो लोग क़ुरआन पर टिप्पणी करते है और खुद अपने धार्मिक गर्न्थो के बारे में कुछ नही जानते।



                 धन्यवाद




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Aatma aur parmatma ke bich ka antar ? एक नजर इधर भी !

                     
                             



   मेरे नॉन मुस्लिम भाईयो के लिए ले लेख

         Note : थोड़ा बड़ा हो सकता है।


* वह जिसने मौत और जिंदगी पैदा की ताकि तुम्हारी जांच (परीक्षा) हो कि तुम में अच्छा काम कौन करता है, और वही है इज्जत वाला बख्शीश वाला।( 67:2)


* हर जान को मौत का मज़ा चकना है,और हम(अल्लाह)अच्छी और बुरी परिस्तिथि में डाल कर मानव की परीक्षा लेता है  अंत मे तुम्हे मेरे(अल्लाह) पास ही आना है।{क़ुरआन(21:35)& (32:11)  }



* जिंदगी का मकशद यह है, अच्छे कर्म(अमल) करना।।

                                                       

 *सर्व प्रथम हमे ये जानना होगा की अल्लाह(एक मालिक) और उसके गुण क्या है!   

                  

 *तुम फ़रमाओ पालनहारा एक है .पालनहार बे-नियाज़ (सर्वशक्तिमान) है.न उसकी औलाद है. ना वह किसी से पैदा हुआ(अजन्मी). ना उसके जैसा दूसरा कोई नही .(अल क़ुरआन 112)


*मानव को अल्लाह(पालनहार)ने ज्ञान एक लिमिट तक दिया है, जितना वह समझ सके ना कि पुरा !


Ex. जैसे हम आकाशगंगा के ग्रह( शुक्र,शनि, बृहस्पति etc . )रचना का मकशद  नही जानते कि पालनहार क्यों और किस लिए रचे है,*चीटियां और उससे भी सूक्षम और अति सूक्षम जीव मोजूद है दुनिया मे मोजूद है जो कि हमारी आंखों से नही देख पाते पर हम उनकी उत्पति का मकसद नही जानते। क्योंकि हमें उसका ज्ञान नही दिया है। हा, यह है की उसके बारे में जानने की कोशिश कर सकते। पर उसके बारे में पूरी तरह से रिजल्ट नही निकाल सकते केवल रिसर्च कर सकते है पूरा ज्ञान तो केवल पालनहार(अल्लाह) को ही है।



*अपनी अक्ल से उसकी पाक जात को समझना मुमकिन नही,क्योंकि जो चीज़ अक्ल के जरिये से समझ मे आति है अक्ल उसको अपने मे घेर ले लेती है, अल्लाह (एक ईश्वर)की शान यह है कि कोई चीज़ उसकी जात को घेर नही सकती।उसी तरह उसके गुण(सिफ़त) भी है।



*जो भी चीजे धरती और उस से बाहार होती है उसके पीछे कोई हिकमत होती है। उसका ज्ञान केवल पालनहार को हैं।।


*  पालनहार की जात स्वयं कदीम(अनादि),अजलि(सक्षम)औऱ अबदी( अमर) उसी तरह उसके गुण(शिफात) भी । अनादि, सक्षम और अमर है।अब एक सवाल यह है, की दुनियां वजूद में कैसे आई ?


*इस से पहले मनाव की उत्पत्ति का मकसद बता दिया गया है।                                            

*अब दुनिया या बोल लीजिये बृह्मांड की की उत्पत्ति कैसी होइ? उसे,कुछ आसान शब्दों में बयान करने की कोशिश करता हु।।


 *फिर उसने आकाश को क़स्द(संकल्प) फरमाया,जब कि वह धुँआ(गैस)था,और उसने धरती से कहा आओ, स्वेच्छा अनिच्छा के साथ उन्होंने कहा, हम स्वेच्छा के साथ आये.(41:11)अल क़ुरआन।


*आकाशगंगा के निर्माण से पहले सुर्ष्टि का सारा द्रवय परभिक वायुगत यानी(धुँआ की शक्ल) में था।अब यह प्रश्न उड़ता है,की धुँआ, धरती etc का raw मेटीरियल कहा से आया?मैंने इसे पहले ही बता दिया कि ,मानव को हर चीज़ का ज्ञान नही दिया गया है, जिसने उसे रचा वही बहत्तर जनता है, तो यहाँ कोई प्रशन बनता ही नहीं।



*फिर उसके बाद आकाशगंगा का निर्माण कैसे हुआ? 


* क्या? उन लोगों ने जिन्होंने इंकार कीया देखा नही की( यह मानव को समझाया जा रहा है) ये आकाश और धरती बन्द थी,फिर हमने(सर्वशक्तिमान)उन्हें खोल दिया और हमने पानी से हर जीवित चीज़ बनाई तो क्या वे नही मानते(21:30)यहा बिग-बैंग  बताया गया है।


*what's big- bang=प्रथमिक रसायन के रूप में थी, फिर एक महान(बोहत बड़ा) विस्फोट हुआ(यानी धमाक) जिसे बिग-बैंग कहते है।जिसके के नतीजे में आकाशगंगा के रूप में उभरा, फिर आकाशगंगा में नक्षत्र,ग्रह, सूर्य,चंद्र, पृथ्वी इत्यादि का निर्माण हुआ।इस आयत से यही मतलब है। ये थ्योरी कोई भी बेसिक स्पेस विज्ञान की बुक में आसानी से मिल जाएंगी। मूझे उमीद है कि आपने कही न कही पढ़ा या सुना जरूर होगा  😇.


 अल क़ुरआन में और भी ज्ञान-विज्ञान की बाते है,जहा तक मनुष्य नही पहुचा है सिर्फ रिसर्च कर रहा है,जिसमे से कुछ एक्सप्ले .


*क्या ,तुम्हारे अक्ल के मुताबिक तुम्हारा बनना मुश्किल है? आसमान का बनने वाला सर्वशक्तिमान(पालनहार) है(79:27). 


 *पृथ्वी का अंडाकार में होना या बोल सकते है गोल होना।इन आयतों में मिल जाएंगे(31:29),(39:5) चेक करके देख लेना, अक्ल रखने वालों के लिए निशानी बताई गई है,.


 *चंद सूरज से रोशनी लेता है इन आयतों से पता चला जाएंगे(10:5)&(71:16). 



*वेयज्ञेनिक एडॉन हबल(1925) लगभग प्रमाणिक खोज करी है, आकाशगंगा दिन ब दिन फैल रही है। जिस का प्रमाण क़ुरआन इस तरह है।.



*आसमान को अल्लाह  ने अपने जोर से बनाया और उसे वसुअत देने वाला है (51:47). 



(वसुअत=लंबाई-चोड़ाई,जोर, ताकत.)और बहोत कुछ है अल्लाह के पाक कलाम में, पर अब तक मानव वहा तक नही पहुच पाया।



केवल जो ऊपर मुस्लिम वज्ञानिक  है जिनका नाम जाहिर है लोगो मे इसके अलाव भी बोहत से है। इन होने क़ुरआन पर गोरो फिकर करके , दुनिया के इंशानो के लिए बोहत कुछ दिया है।


*अब रही जीवआत्मा (रूह) की बात?  
 अल्लाह के पाक कलाम (क़ुरआन) में एक जगह आता है कि।  

                                                
*और तुम से रूह( जीवात्मा)के बारे में पूछते है तुम फरमाओ रूह मेरे रब जा एक हुकम से एक चीज़ है मगर तुम्हे उसका इल्म ना मिला मगर थोड़ा।(17:85) 


*थोड़ा इल्म से मुराद:- जब तक मानव शरीर मे आत्मा(रूह) रहती है, जब तक वह जीता है , इत्यदि..


 * अब यह प्रश्न उठता है कि रूह(आत्मा) पैदा किस चीज़ से होइ :-इसका उत्तर:-हमे नही पता,क्योंकी उसका ज्ञान हमे नही दिया गया है।         

                        
*अब मै आपने आर्य या कह लीजिये कट्टर हिन्दू भाईयो  कुछ प्रशन करना चाहता हूँ? 


1.महा प्रलय कब आईगी?

2. जीवतात्मा की संख्या कितनी है।

3.वेदास कब (कितनी तारीख को मिले),कैसे, इसका प्रमाण क्या है?

4.स्वमी दयानद सरस्वती धरती पर कब और कहा पुर्णजनम लेगे?

5.कहते है कि लाखो मंत्र वेदास में थे अब खाली 20589 मंत्र बाकी राह गए है, तो अब वैदिक ईशवर पुनः किसी और ऋषि मुनि पर स्रुति क्यों नही कर ता, क्या हमें वो जो लाख मंत्र बर्बाद हो गये उसकी जरूरत भी नही है। इस लिए बाकि के मंत्र कब और किस ऋषि मुनि पर अवरोतित होंगे?


 6.दुनिया को फिर से निर्माण करना है , तो उसे नष्ट क्यों करता है वैदिक ईश्वर? .

7. क्या ईश्वर को नही पता कि इन्शान नंगा पैदा होता है तो 2 जुड़ी कपड़े साथ में भेज दे ? 

*आत्मा, परमात्मा और प्रकुति के चक्र में फसे है वो लोग वो जानना चाहते है जिसका इल्म उन्हें दिया ही नही गया है, वो लोग खुद भी गुमराह है और औरो को भी गुमराह कर रहे है।जबी पता है कि दुनिया मे अमल के लिये पैदा किया गया है। सिर्फ और सिर्फ के exam के लिए भेजा गया है केवल ।।।


1. एक अल्लाह(पालनहार)  की उपासना करना, उसके सात किसी को भागीदारी ना करना।।


2.अपनी ना-जायज़ इच्छाओं को उसकी आज्ञासे छोड़ देना।।           
                                         
3. Prophet(PBUH) को सच्चा नबी मान कर उन की शरीयत पे चलने की कोशिश करना।।     
             
 4. इन ही के आधार पर सत्य और असत्य का फल मिलेंगा।उस पालनहार ने मानव को उतना ज्ञान प्रदान किया है जितनी उसको उसकी आवशकता है नाकि पूरा।सही और गलत में फर्क समझा दिया गया है। उसके आधार पर जिंदगी गुजार करनी है। 

 * हक़ बात( इस्लाम ) कोई जबरदस्ति नही(2-256).  


 *पालनहार आज्ञा देता है नेकी का और बेहयाई को नापसंद करता है।(16:90).    

       
*नसीहत उनके लिए सीधे मार्ग पर चलना चाहे।(81:27,28,29)(40:28)

           
* ये मानव तुम लोग पालनहार(अल्लाह) के मोहताज हो और अल्लाह बे-नियाज़ है(सर्वशक्तिमान) है नसीहत वो मानते है जो अक्ल वाले है (13:19).     

     
 * और हरगिज अल्लाह को बे-खबर ना जानना जालिमो के काम से उन्हें ढील नही दे राहा है, मगर ऐसे दिन के लिए जिसमे आंखे खुली की खुली राह जांयेंगी।(14:42)


*कोई आदमी वह है, की अल्लाह के बारे में झगड़ाता है, ना तो कोई इल्म, ना कोई दलील और ना तो कोई रोशन निशानी।(22:8)(31:20)(52:33,34)(23:72)(23:73).                                                      

*कह दो,"सत्य आ गया और असत्य मिट गया, असत्य तो मिट जाने वाला ही होता है।(17:81)         


            Note:-  या अल्लाह लिखने में बयान करने में कोई शरियन गलती हुई हो , मेरे मालिक तू दिलो के राज जानने वाला है माफ फ़रमा दे।(आमीन)     

                                                          अल्हम्दुलिल्लाह


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